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मीठे पानी में मोती उत्पादन से आत्मनिर्भर बनेंगे युवा व किसान: डॉ. वज़ीर सिंह लाकड़ा

डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के अधीनस्थ मात्स्यिकी महाविद्यालय, ढोली में आयोजित तीन दिवसीय “मीठे पानी में मोती संवर्धन तकनीक” प्रशिक्षण कार्यक्रम का गुरुवार यानी की आज समापन हो गया. प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को मोती उत्पादन और आधुनिक तकनीकों अलावा, कई जानकारी दी गई.

फार्मर द जर्नलिस्ट
youth farmer
ढोली में आयोजित तीन दिवसीय “मीठे पानी में मोती संवर्धन तकनीक” प्रशिक्षण कार्यक्रम आज समापन

डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के अधीनस्थ मात्स्यिकी महाविद्यालय, ढोली में आयोजित तीन दिवसीय “मीठे पानी में मोती संवर्धन तकनीक” प्रशिक्षण कार्यक्रम का गुरुवार को सफलतापूर्वक समापन हो गया। प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को मोती उत्पादन की आधुनिक तकनीकों, उद्यमिता विकास, जल गुणवत्ता प्रबंधन तथा व्यावहारिक प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। शुभारंभ के अवसर पर मुख्य अतिथि पूर्व निदेशक सह पूर्व कुलपति, आईसीएआर केंद्रीय मात्स्यिकी शिक्षण संस्थान, मुंबई के डॉ. वज़ीर सिंह लाकड़ा ने कहा कि मीठे पानी में मोती पालन ग्रामीण युवाओं और किसानों के लिए आय का बेहतर स्रोत बन सकता है। उन्होंने कहा कि यदि प्रशिक्षु प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त तकनीकी ज्ञान को व्यवहार में उतारें तो वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकते हैं।

उन्होंने कहा कि बिहार में जल संसाधनों की उपलब्धता मोती उत्पादन के लिए अनुकूल है और वैज्ञानिक तरीके अपनाकर किसान कम लागत में बेहतर आमदनी अर्जित कर सकते हैं।

कार्यक्रम के दौरान महाविद्यालय के मत्स्य संसाधन प्रबंधन विभागाध्यक्ष डॉ. घनश्यामनाथ झा ने परियोजना के उद्देश्य एवं इसके लाभों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण का उद्देश्य युवाओं, किसानों एवं इच्छुक उद्यमियों को मोती उत्पादन की वैज्ञानिक तकनीकों से जोड़ना है ताकि स्वरोजगार के नए अवसर विकसित हो सकें।

तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में कुल नौ तकनीकी एवं व्यावहारिक सत्र आयोजित किए गए। प्रथम दिवस में मोती की खेती की अवधारणा, स्वस्थ सीपियों के चयन की तकनीक तथा मोती पालन में उद्यमिता विकास की संभावनाओं पर विशेषज्ञों ने जानकारी दी। वहीं व्यावहारिक सत्र में नाभिक प्रत्यारोपण की तैयारी एवं क्लोरेला की बड़े पैमाने पर खेती की तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया।

द्वितीय दिवस के दौरान मसल्स में नाभिक प्रत्यारोपण की मानक प्रक्रियाएं, ऑपरेशन से पहले एवं बाद की सावधानियां, जल गुणवत्ता मानकों का महत्व तथा मछली एवं मीठे पानी के मोती की एकीकृत खेती के विषय पर व्यावहारिक प्रशिक्षण आयोजित किया गया।

तृतीय दिवस में प्रतिभागियों को ढोली स्थित पर्ल यूनिट का भ्रमण कराया गया, जहां मोती उत्पादन की संपूर्ण प्रक्रिया को व्यवहारिक रूप से समझाया गया।

समापन समारोह सह प्रमाण-पत्र वितरण कार्यक्रम में सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय की अधिष्ठाता डॉ. उषा सिंह, जीविका मुरौल की श्रीमती अर्चना कुमारी तथा मात्स्यिकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. प्रेम प्रकाश श्रीवास्तव ने प्रशिक्षुओं को प्रमाण-पत्र प्रदान किया।

कार्यक्रम का संचालन सहायक प्राध्यापक डॉ. राम कुमार कुर्मी ने किया, जबकि मोती संवर्धन परियोजना की मुख्य अन्वेषिका डॉ. अदिता शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

इस अवसर पर डॉ. शिवेंद्र कुमार, डॉ. राजीव कुमार ब्रह्मचारी, डॉ. मुकेश कुमार सिंह, डॉ. प्रवेश कुमार, डॉ. एच.एस. मोगलेकर, डॉ. तनुश्री घोरई, डॉ. एस. विद्यासागर सिंह, डॉ. गुलशन कुमार, डॉ. सनाईमा सिंघा, डॉ. अभिलाष थापा, चांदनी राय दत्त, अभिलिप्सा बिस्वाल, डॉ. राजेश कुमार, सुधीर कुमार, मुकेश कुमार, गौतम कुमार सहित महाविद्यालय के शिक्षक, कर्मी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

रिपोर्ट: रामजी कुमार, समस्तीपुर, बिहार।

English Summary: Youth Farmers will become self reliant through-freshwater pearl production Published on: 07 May 2026, 04:32 PM IST

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