Poetry

मज़ाक है !

वोट देने वाले पागल

लेने वाले चालाक हैं

ये तो कोई नईं बात नहीं

अरे ! सब मज़ाक है

 

ढिंढोरा है दुनिया में

के ऊंची हमारी नाक है

किसान,मज़दूर,भाई-बंधू

अरे ! सब मज़ाक है

ये कागज़-कलम ये फर्ज़ी फाइलें

कुछ नहीं है ख़ाक है

दिखावा है जी दिखावा

सब मज़ाक है !

 

करोड़ों में चंद हैं ये

होना सबका हिसाब है

किसको,कैसे,क्यों चुने

मौज करो, सब मज़ाक है !



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