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पूसा की टॉप-3 नई धान किस्में! कम समय में देगी 57.1 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पैदावार, जानें किस्म के बारे में सबकुछ..

Paddy Varieties: खरीफ सीजन की शुरुआत होते ही किसान भाइयों को तलाश है. ऐसी धान की किस्मों की जिससे कम समय में अधिक उपज प्राप्त हो सकें. ऐसे में (IARI), पूसा द्वारा विकसित धान ये टॉप 3 वैरायटी किसानों के लिए अच्छा विकल्प साबित हो सकती है. आइए जानें कौन-सी है ये उन्नत किस्में..

KJ Staff
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पूसा की टॉप-3 नई धान किस्में (Image Source-AI generate)

देश में खरीफ सीजन की फसलों की तैयारी तेजी से चल रही है और इसी बीज कई किसानों को ऐसी फसलों की तलाश होगी, जिसकी खेती कर किसान अच्छी उपज के साथ तगड़ी आय अर्जित कर सकें. ऐसे में किसानों के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), पूसा द्वारा विकसित धान की टॉप 3 उन्नत वैरायटी पूसा बासमती 1847, पूसा बासमती 1692 और पूसा बासमती 1985 किसानों के लिए अच्छा विकल्प साबित हो सकती है.

1. पूसा बासमती 1847

पूसा बासमती 1847 वर्तमान समय की सबसे अधिक उत्पादक बासमती किस्मों में शामिल है. यह किस्म दिल्ली, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के किसानों के लिए सही विकल्प साबित हो सकती है. इस किस्म  अगर किसान बुवाई करते हैं तो वह लगभग 120 दिनों में इससे 57.1 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पैदावार पा सकते हैं.

विशेषता- पूसा बासमती 1847 की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह बैक्टीरियल ब्लाइट और ब्लास्ट रोग के प्रति प्रतिरोधी है. इन रोगों के कारण अक्सर धान की फसल को भारी नुकसान होता है, लेकिन इस किस्म में जोखिम काफी कम हो जाता है. बेहतर दाने की गुणवत्ता और उच्च बाजार मूल्य के कारण यह किसानों के लिए लाभदायक विकल्प बन रही है.

2. पूसा बासमती 1692

पूसा बासमती 1692 को वर्ष 2020 में विकसित किया गया था. यह किस्म हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए अनुशंसित है. इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी कम परिपक्वता अवधि है. यानी की अगर किसान इस फसल की पैदावार करते हैं तो वह इस किस्म से केवल 115 दिनों के भीतर 52.6 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं. साथ ही यह किस्म कम समय में तैयार होने के कारण यह जल संरक्षण और फसल चक्र प्रबंधन के लिए भी उपयुक्त मानी जाती है.

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(Image Source-AI generate)

विशेषता- यह किस्म एक अर्ध-बौनी किस्म है, जिससे फसल गिरने (लॉजिंग) की संभावना कम रहती है. इसके साथ ही इसकी उपज क्षमता काफी अधिक है और किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ प्राप्त होता है. 

3. पूसा बासमती 1985

पूसा बासमती 1985 किस्म किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प बनकर उभरी है. यह किस्म दिल्ली, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में खेती के लिए उपयुक्त मानी जाती है. अगर इन इलाकों के लोग इस किस्म की खेती करते हैं तो वह इससे 115 दिनों केम भीतर ही 51.6 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज प्राप्त कर सकते हैं.

विशेषता- पूसा बासमती 1985 की प्रमुख विशेषता यह है कि यह पूसा बासमती 1509 की खुशबू और गुणवत्ता को बनाए रखते हुए बेहतर उत्पादन देती है. इसके कारण घरेलू और निर्यात बाजार दोनों में इसकी मांग बढ़ने से किसानों की मुनाफा होने की संभावना बढ़ जाती है.

लेखक: रवीना सिंह

English Summary: Paddy Top 3 Varieties Farmer Get High Yield Short Duration Rice Seeds Published on: 09 June 2026, 05:14 PM IST

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