1. Home
  2. पशुपालन

बारिश में पशुओं की सेहत का रखें खास ध्यान, इन बीमारियों से रहें सावधान, जानें बचाव के आसान उपाय

Animal Care Tips: देशभर में जिस तरह से मानसून कहर बरपा रहा है. ऐसे में पशुपालकों के लिए बड़ी परेशानी खड़ी हो जाती है और इस मौसम में लगातार बारिश होने से पशुओं में बीमारियां बेहद ही तेजी से फैलती है, जिससे पशुपालकों को बड़ा नुकसान झेलना पड़ता है, तो ऐसे में चलिए आगे इस लेख में जानें पशुओं को कैसे सुरक्षित रख सकते हैं.

KJ Staff
KJ Staff
cow
बारिश में पशुओं की सेहत का रखें खास ध्यान (Image Source-AI generate)

बरसात का मौसम जितना राहत भरा होता है उतना ही इंसानों और पशुपालकों के लिए कई तरह की परेशानी लेकर आता है. इस बारिश के मौसम में पशुपालकों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ता है, क्योंकि इस मौसम में लगातार बारिश होने से पशुशाला में नमी आ जाती है, जिससे पशुओं में संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में इस नमी के मौसम में जीवाणु सीधा हमला पशुओं के ऊपर करते हैं और इसी वजह से पशुओं की सेहत खराब हो जाती है वह गंभीर बीमारी की चपेट में आ जाते हैं.

बारिश के मौसम में किन बीमारियों का खतरा रहता है?

बारिश के मौसम में पशुओं में कई तरह की बीमारी होने का खतरा रहता है और इस दौरान पशुपालकों को अपने पशुओं की सही तरह से देखभाल करनी जरुरी होती है, क्योंकि इन नमी वाले मौसम में पशुओं में इन बीमारियों का खतरा अधिक बढ़ जाता है-

गलघोंटू 

बरसात में पशुओं को प्रभावित करने वाली गंभीर बीमारियों में गलघोंटू भी शामिल है. यह बीमारी Pasteurella multocida नामक बैक्टीरिया से जुड़ी होती है. संक्रमित पशु में तेज बुखार, सुस्ती और गर्दन या शरीर के आगे के हिस्से में सूजन जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं.

ऐसे लक्षण नजर आने पर पशु को दूसरे पशुओं से अलग रखना और जल्द से जल्द पशु चिकित्सक से संपर्क करना जरूरी है. बीमारी को नजरअंदाज करना पशु के लिए गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है.

लंगड़ा बुखार 

लंगड़ा बुखार या ब्लैक क्वार्टर भी पशुपालकों के लिए चिंता का विषय हो सकता है. इसका संबंध मिट्टी में मौजूद बैक्टीरिया से होता है और कुछ परिस्थितियों में यह बीमारी तेजी से गंभीर रूप ले सकती है. ऐसे में अगर पशु के शरीर में अचानक सूजन, तेज बुखार या चलने में परेशानी दिखाई दे तो इसे सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज न करें. तुरंत विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर होता है.

खुरपका-मुंहपका 

खुरपका-मुंहपका यानी FMD भी पशुओं के लिए महत्वपूर्ण संक्रामक रोग है. इसमें मुंह, जीभ और खुरों के आसपास छाले या घाव दिखाई दे सकते हैं. पशु को चारा खाने और चलने में परेशानी हो सकती है. इस तरह के लक्षण दिखाई देने पर संक्रमित पशु को अलग रखना चाहिए और पशु चिकित्सक की सलाह के अनुसार उपचार एवं आगे की रोकथाम की व्यवस्था करनी चाहिए.

बारिश के मौसम में कैसे करें पशुओं का बचाव?

  • बारिश के मौसम में पशुओं को सुरक्षित रखने के लिए सबसे पहला कदम उनकी पशुशाला को साफ और सूखा रखना है. शेड की छत से बारिश का पानी अंदर न आए और फर्श पर पानी जमा न हो, इसका ध्यान रखें.

  • बारिश में चारा जल्दी खराब हो सकता है. इसलिए पशुओं को गीला, सड़ा या फफूंद लगा चारा देने से बचें. चारे को ऐसी जगह रखें जहां बारिश का पानी न पहुंच सके.

  • बीमारियों से बचाव के लिए समय पर टीकाकरण बेहद महत्वपूर्ण है. पशुपालकों को अपने क्षेत्र के पशु चिकित्सक या पशुपालन विभाग से संपर्क करके पशुओं के लिए जरूरी टीकाकरण की जानकारी लेनी चाहिए.

  • बरसात के दौरान पशुओं के व्यवहार पर लगातार नजर रखना जरूरी है. अगर कोई पशु अचानक खाना कम कर दे, सुस्त दिखाई दे, बुखार हो, शरीर में सूजन आए, मुंह में छाले दिखाई दें या लगातार दस्त हों तो तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें.

लेखक: रवीना सिंह

English Summary: Rainy Season Livestock Diseases Prevention Tips livestock care Published on: 12 August 2026, 01:54 IST

Like this article?

Hey! I am KJ Staff. Did you liked this article and have suggestions to improve this article? Mail me your suggestions and feedback.

Share your comments

हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें. कृषि से संबंधित देशभर की सभी लेटेस्ट ख़बरें मेल पर पढ़ने के लिए हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें.

Subscribe Newsletters

Latest feeds

More News