रासायनिक उर्वरकों की बढ़ती लागत और मृदा उर्वरता में धीरे-धीरे हो रही कमी आधुनिक कृषि की प्रमुख चिंताएँ बन गई हैं. निरंतर खेती तथा रासायनिक उर्वरकों पर अत्यधिक निर्भरता के कारण अक्सर पोषक तत्वों का असंतुलन, मृदा संरचना का क्षरण तथा मृदा की जैविक सक्रियता में कमी देखी जाती है. राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुसार संतुलित उर्वरीकरण, जैविक आदानों, जैव उर्वरकों तथा अन्य सतत् कृषि उपायों को बढ़ावा देकर पोषक तत्व उपयोग दक्षता में 25–30% वृद्धि तथा रासायनिक उर्वरकों की खपत में 25% कमी लाने का लक्ष्य है. ऐसी परिस्थितियों में हरित पत्ती खाद (Green Leaf Manuring - GLM) मृदा उत्पादकता बनाए रखने का एक सरल, किफायती और पर्यावरण-अनुकूल विकल्प प्रदान करती है.
हरित पत्ती खाद (Green Leaf Manuring) क्या है?
• हरित खाद (Green Manuring - GM) और हरित पत्ती खाद (Green Leaf Manuring - GLM) को अक्सर एक जैसा समझ लिया जाता है, लेकिन दोनों में जैविक पदार्थ (बायोमास) के स्रोत का अंतर होता है. यद्यपि मृदा उर्वरता निर्माण में दोनों का उद्देश्य और कार्य समान हैं.
• GM में एक फसल को विशेष रूप से खेत में उगाया जाता है और कोमल अवस्था में उसी खेत में मिट्टी में मिला दिया जाता है. इसे स्व-स्थान (In-situ) हरित खाद भी कहा जाता है.
• GLM में खेत के बाहर उगने वाले वृक्षों, झाड़ियों तथा शाकीय पौधों की ताजी पत्तियाँ और कोमल टहनियाँ एकत्र कर खेत की तैयारी के समय या बुवाई से पहले मिट्टी में मिला दी जाती हैं.
• बंजर भूमि, खेत की मेड़ें, वानिकी क्षेत्र आदि में उगने वाले पौधे GLM के प्रमुख स्रोत हैं.
• विघटित होने वाला यह जैविक पदार्थ पोषक तत्व उपलब्ध कराता है तथा मृदा की उर्वरता, संरचना और जैविक गतिविधियों में सुधार करता है.
• GLM में प्रयुक्त पत्तियों अथवा कोमल जैविक पदार्थ के प्रकार के आधार पर उनका अपघटन तथा पोषक तत्वों की उपलब्धता भिन्न-भिन्न होती है.
• GM तथा GLM दोनों ही मृदा उर्वरता बढ़ाने, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने तथा पोषक तत्व उपयोग दक्षता में सुधार करने में सहायक हैं.
हरित पत्ती खाद के सामान्य पौधे
तेजी से जैविक पदार्थ उत्पादन तथा पोषक तत्वों से भरपूर पत्तियों के कारण कई वृक्ष एवं झाड़ी प्रजातियाँ GLM के लिए उपयुक्त हैं. यद्यपि वृक्ष और झाड़ियाँ दोनों ही GLM के अच्छे स्रोत हैं, फिर भी वृक्ष प्रजातियाँ सामान्यतः अधिक और दीर्घकालिक जैविक पदार्थ उपलब्ध कराती हैं, जबकि झाड़ियाँ अपेक्षाकृत तेजी से जैविक पदार्थ उत्पन्न करती हैं तथा मेड़ों और सीढ़ीदार खेतों पर आसानी से प्रबंधित की जा सकती हैं. सामान्यतः उपयोग की जाने वाली प्रजातियाँ निम्नलिखित हैं:
दलहनी वृक्ष (Leguminous Trees)
• सुबबूल (ल्युकेना ल्यूकोसेफाला)
• ग्लिरिसिडिया (ग्लिरिसिडिया सेपियम)
• अगाथी (सेसबेनिया ग्रैंडीफ्लोरा)
• करंज (पोंगामिया पिन्नाटा)
दलहनी झाड़ियाँ (Leguminous Shrubs)
• ढैंचा (सेसबेनिया बिस्पिनोसा / सेसबेनिया एक्यूलेटा)
• टेफ्रोसिया (टेफ्रोसिया पर्पुरिया)
• नील (इंडिगोफेरा टिंक्टोरिया)
• सनई (क्रोटालारिया जुनसिया)
• फ्लेमिंगिया (फ्लेमिंगिया मैक्रोफाइला / फ्लेमिंगिया कोंजेस्टा)
गैर-दलहनी वृक्ष (Non-Leguminous Trees)
• नीम (अज़ादिरैक्टा इंडिका)
• कैसिया (कैसिया सियामिया)
• प्रोसोपिस (प्रोसोपिस जुलीफ्लोरा)
गैर-दलहनी झाड़ियाँ (Non-Leguminous Shrubs)
• आक / मदार (कैलोट्रोपिस गिगैंटिया / कैलोट्रोपिस प्रोसेरा)
• जेट्रोफा (जेट्रोफा कर्कस)
इनमें से ग्लिरिसिडिया और सुबबूल विशेष रूप से अधिक महत्त्वपूर्ण माने जाते हैं क्योंकि इनमें जैविक पदार्थ (बायोमास) उत्पादन की क्षमता अधिक होती है तथा इनकी पत्तियों में नाइट्रोजन की मात्रा अपेक्षाकृत अधिक पाई जाती है. एम्ब्रोसिया (एम्ब्रोसिया प्रजाति) तथा यूपेटोरियम (यूपेटोरियम प्रजाति) जैसी खरपतवार झाड़ियों का कोमल जैविक पदार्थ भी हरित पत्ती खाद के रूप में उपयोग किया जाता है, क्योंकि इनमें पोषक तत्वों की अच्छी मात्रा होती है तथा ये मृदा उर्वरता में सुधार करने में सहायक होती हैं.
तालिका 1. कुछ हरित पत्ती खाद प्रजातियों में पोषक तत्वों की मात्रा
|
हरित पत्ती खाद |
वैज्ञानिक नाम |
पोषक तत्वों की मात्रा (%) (वायु-शुष्क आधार पर) |
||
|
N |
P₂O₅ |
K₂O |
||
|
पौधे |
||||
|
ग्लिरिसिडिया |
ग्लिरिसिडिया सेपियम |
2.76 |
0.28 |
4.60 |
|
करंज |
पोंगामिया ग्लाब्रा |
3.31 |
0.44 |
2.39 |
|
नीम |
अज़ादिरैक्टा इंडिका |
2.83 |
0.28 |
0.35 |
|
गुलमोहर |
डेलोनिक्स रेजिया |
2.76 |
0.46 |
0.50 |
|
पेल्टोफोरम |
पेल्टोफोरम फेरुजिनियम |
2.63 |
0.37 |
0.50 |
|
खरपतवार |
||||
|
गाजर घास |
पार्थेनियम हिस्टेरोफोरस |
2.68 |
0.68 |
1.45 |
|
जलकुंभी |
आइकहॉर्निया क्रैसिपीस |
3.01 |
0.90 |
0.15 |
|
इटसिट / हॉर्स पर्सलेन |
ट्रायन्थीमा पोर्टुलाकैस्ट्रम |
2.64 |
0.43 |
1.30 |
|
मॉर्निंग ग्लोरी |
इपोमिया प्रजाति |
2.01 |
0.33 |
0.40 |
|
आक / मदार |
कैलोट्रोपिस गिगैंटिया |
2.06 |
0.54 |
0.31 |
|
अमलतास |
कैसिया फिस्टुला |
1.60 |
0.24 |
1.20 |
प्रयोग की विधि (Method of Application)
-
निकटवर्ती वृक्षों एवं झाड़ियों से ताजी हरी पत्तियाँ तथा कोमल टहनियाँ एकत्र कर खेत में समान रूप से फैला दी जाती हैं. आवश्यकता होने पर कोमल जैविक पदार्थ को 5–10 सेमी के छोटे टुकड़ों में काट लिया जाता है, जिससे मिट्टी में मिलाना तथा उनका उचित अपघटन आसान हो सके. कठोर एवं काष्ठीय (लकड़ी जैसे) भागों को अलग कर देना चाहिए.
-
इसके बाद इस सामग्री को बुवाई या रोपाई से लगभग 2–3 सप्ताह पूर्व मिट्टी में मिला दिया जाता है, ताकि पर्याप्त अपघटन हो सके.
-
धान की खेती में हरी पत्तियों को प्रायः रोपाई से पूर्व अंतिम पडलिंग (कीचड़ तैयार करने) के समय मिट्टी में मिला दिया जाता है.
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उपलब्धता के अनुसार प्रति हेक्टेयर लगभग 5–10 टन ताजी हरी पत्तियाँ मिट्टी में मिलाई जा सकती हैं.
धान आधारित फसल प्रणालियों में भूमिका
•हरित पत्ती खाद (GLM) धान की खेती के लिए विशेष रूप से लाभकारी है.
• धान की रोपाई से पहले पोषक तत्वों से समृद्ध पत्तियों को मिट्टी में मिलाने से फसल की प्रारंभिक एवं वानस्पतिक वृद्धि अवस्थाओं में पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ती है.
• अनेक पारंपरिक धान उत्पादक क्षेत्रों में किसान ग्लिरिसिडिया, सुबबूल, सेसबेनिया तथा अन्य स्थानीय रूप से उपलब्ध प्रजातियों की पत्तियों का उपयोग उर्वरक नाइट्रोजन के पूरक स्रोत के रूप में सफलतापूर्वक करते रहे हैं.
हरित पत्ती खाद के लाभ
• GLM के लिए उपयोगी वृक्षों और झाड़ियों को खेत की मेड़ों, पहाड़ियों, सीढ़ीदार खेतों तथा ढालू भूमि पर उगाया जा सकता है, जहाँ वे मृदा संरक्षण तथा अपरदन (कटाव) को कम करने में सहायक होते हैं.
• इनकी छँटी हुई पत्तियाँ एवं टहनियाँ मल्च (आवरण) के रूप में उपयोग की जा सकती हैं, जिससे मृदा में नमी का संरक्षण होता है, खरपतवारों का दमन होता है तथा पोषक तत्व पुनः मिट्टी में लौट आते हैं.
• पत्तीयुक्त जैविक पदार्थ का नियमित प्रयोग मृदा में कार्बनिक पदार्थ की मात्रा बढ़ाता है, लाभकारी सूक्ष्मजीवों की सक्रियता को प्रोत्साहित करता है तथा दीर्घकालिक मृदा उर्वरता में सुधार करता है.
सावधानियां
• केवल ताजी एवं रोगमुक्त पत्तियों का उपयोग करें.
• उचित अपघटन के लिए पत्तियों को बुवाई या रोपाई से पर्याप्त समय पहले मिट्टी में मिला दें.
• विषैले अथवा एलीलोपैथिक (अन्य पौधों की वृद्धि को प्रभावित करने वाले) पौधों की पत्तियों के उपयोग से बचें.
• जैविक पदार्थ का खेत में समान रूप से वितरण सुनिश्चित करें.
• सर्वोत्तम परिणामों के लिए हरित पत्ती खाद को संतुलित उर्वरीकरण तथा मृदा परीक्षण आधारित पोषक तत्व प्रबंधन के साथ एकीकृत करें.
निष्कर्ष
सतत कृषि को बढ़ावा देने तथा रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने की बढ़ती आवश्यकता के बीच हरित पत्ती खाद (GLM) छोटे एवं सीमांत किसानों के लिए पोषक तत्व प्रबंधन का एक व्यावहारिक, किफायती और प्रभावी विकल्प प्रदान करती है. खेतों की मेड़ों, सड़कों के किनारों, नहर तटों तथा बंजर भूमि पर उपलब्ध वृक्षों और झाड़ियों से प्राप्त प्रचुर जैविक पदार्थ मृदा उर्वरता सुधारने के लिए एक मूल्यवान संसाधन है. जैव उर्वरकों, कम्पोस्ट, फसल अवशेष पुनर्चक्रण तथा संतुलित उर्वरक उपयोग के साथ इस तकनीक को व्यापक रूप से अपनाने से मृदा स्वास्थ्य में सुधार, कृषि लागत में कमी, दीर्घकालिक कृषि स्थिरता तथा राष्ट्रीय कृषि लक्ष्यों की प्राप्ति में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है.
लेखकगण: डॉ. सोनका घोष, वैज्ञानिक एवं अनुप दास, निदेशक
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना
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