यूपी सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए और राज्य को दुग्ध उत्पादन में अग्रणी बनाने के लिए एक विशेष कदम उठाया है. मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के नेतृत्व में ‘ऑपरेशन-4’ डेयरी मास्टर प्लान को लागू कर दिया गया है. इस सरकारी योजना के तहत गांव-गांव में डेयरी इकाइयों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे महिलाओं और युवा इन सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर अपनी आय में इजाफा कर सकते हैं और अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं.
क्या है ‘ऑपरेशन-4’ डेयरी मास्टर प्लान?
यूपी सरकार द्वारा शुरु किया गया ‘ऑपरेशन-4’ डेयरी मास्टर प्लान एक मुख्य पहल है. इस पहल का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक खेती के साथ पशुपालन को जोड़कर किसानों की आय को दोगुना करना है. खास बात यह है कि इस योजना के तहत 2 से लेकर 25 गायों तक की डेयरी यूनिट स्थापित करने पर भारी सब्सिडी दी जा रही है, जिससे छोटे और मध्यम वर्ग के किसान भी आसानी से डेयरी व्यवसाय शुरू कर सकें.
‘ऑपरेशन-4’ कैसे काम करता है?
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ऑपरेशन-4’ दरअसल चार प्रमुख योजनाओं का एक संयुक्त मॉडल है, जिसमें मुख्यमंत्री स्वदेशी गो संवर्धन योजना, मुख्यमंत्री प्रगतिशील पशुपालक प्रोत्साहन योजना, नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना और मिनी नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना शामिल हैं. इन योजनाओं को इस तरह डिजाइन किया गया है कि हर वर्ग के पशुपालक को लाभ मिल सकें, चाहे वह छोटे स्तर पर शुरुआत करना चाहता हो या बड़े पैमाने पर डेयरी फार्म स्थापित कर सकते हैं.
कितनी मिलेगी सब्सिडी छूट?
यूपी सरकार की इस पहल से किसानों को डेयरी व्यवसाय शुरु करने के लिए राज्य सरकार की ओर से भारी सब्सिडी प्रदान की जा रही है, जो कुछ इस तरह से किसानों को मुहैया करवाई जाएगी.
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इसमें कुल लागत का 50% तक सरकार द्वारा सब्सिडी के रूप में दिया जाता है.
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इसके अलावा, 35% बैंक ऋण और केवल 15% लाभार्थी का खुद का निवेश होता है. इस व्यवस्था से किसानों पर आर्थिक बोझ कम होता है और वे आसानी से इस व्यवसाय में प्रवेश कर सकते हैं.
किन स्वदेशी नस्लों पर सरकार का फोकस?
यूपी सरकार द्वारा शुरु किया गया ऑपरेशन-4’ दरअसल चार प्रमुख योजनाओं का एक संयुक्त मॉडल है, जिसमें मुख्यमंत्री स्वदेशी गो संवर्धन योजना और तीन योजनाओं को और शामिल किया गया है. इन योजनाओं के तहत सरकार का मुख्य फोकस गिर, साहीवाल और गंगातीरी जैसी स्वदेशी नस्लों को विशेष प्राथमिकता दी गई है. ये नस्लें न केवल अधिक दूध देती हैं बल्कि इनका दूध गुणवत्ता में भी बेहतर माना जाता है.
लेखक: रवीना सिंह
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