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उर्वरक सब्सिडी का प्रावधान चिंताजनक: एफएआई

भारतीय रासायनिक उर्वरक उद्योग ने उर्वरक सब्सिडी का बकाया बढ़ने पर चिंता जताते हुए सब्सिडी को किसानों के बैंक खातों में सीधे पहुंचाने के लिए निश्चित समयसीमा तय करने और चालू वित्तवर्ष में इसके लिए 14,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रावधान करने की सरकार से मांग की है. उनका कहना है कि इस समय सब्सिडी के लिए अपनाया जा रहा मॉडल वास्तव में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) जैसा नहीं है. जिसके कारण उर्वरक कंपनियों की बकाया राशि बढ़ती जा रही है. उर्वरक कंपनियों के संघ फर्टिलाइजर एसोसिएशन आफ इंडिया (एफएआई) के महानिदेशक सतीश चन्दर ने 3 दिसंबर को राजधानी में मीडिया को बताया था कि 'सरकार ने चालू वित्तवर्ष के लिए सब्सिडी का जो प्रावधान किया है वह उस पर कम पड़ रहा है और इसके लिए 14,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रावधान करने की आवश्यकता है अन्यथा डीबीटी योजना निष्क्रिय हो जायेगी.

एसोसिएशन द्वारा राजधानी में 5 से 7 दिसंबर तक आयोजित हुए वार्षिक संगोष्ठी के संबंध में चर्चा करते हुए सतीश चन्दर ने उर्वरक उद्योग की कुछ प्रमुख उपलब्धियों और समस्याओं का उल्लेख किया। उन्होंने किसानों को सीधे सब्सिडी पहुंचाने के मौजूदा मॉडल की आलोचना करते हुए कहा कि, ‘‘उर्वरक क्षेत्र में लागू डीबीटी का वर्तमान मॉडल सच में डीबीटी नहीं है क्योंकि इसमें सब्सिडी सीधे किसानों को नहीं दी जाती। उद्योग के माध्यम से सब्सिडी जारी की जाती है. सब्सिडी का भुगतान ‘पीओएस’ (प्वायंट ऑफ सेल मशीन) के माध्यम से उर्वरकों की बिक्री से जुड़ा हुआ है. इससे सब्सिडी के भुगतान चक्र का समय तीन से छह महीने तक बढ़ जाता है और उर्वरक उद्योग के लिए कार्यशील पूंजी की ज़रुरत बढ़ती है और ब्याज खर्च भी ऊंचा हो जाता है.’’

उन्होंने यह भी कहा कि इस साल पहली नवंबर को लंबित सब्सिडी भुगतान की स्थिति और लागत में बढ़ोतरी के चलते 2018-19 के बजट में उर्वरक सब्सिडी मद हेतु 70,000 करोड़ रुपये का प्रावधान अपर्याप्त है। यूरिया के लिए गैस की लागत में 34 % की वृद्धि तथा पोटाशियम और फास्फोरस उर्वरकों के सब्सिडी दरों में वृद्धि को देखते हुए इस मद में 14,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त सब्सिडी की आवश्यकता होगी. चन्दर ने आगे कहा, ‘‘सब्सिडी बिलों के लिए पर्याप्त धन नहीं होने पर डीबीटी योजना निष्क्रिय हो जायेगी.’’

उन्होंने कहा कि डीबीटी के तहत हाल में भुगतान की स्थिति सुधरी है लेकिन पीछे की बकाया बड़ी राशि अब भी रुकी पड़ी है.1 नवंबर 2018 को 23 उर्वरक कंपनियों का सब्सिडी का कुल बकाया 22,638 करोड़ रुपये था और आने वाले महीनों में बजट की कमी से यह बकाया और बढ़ने की संभावना है. उन्होंने बताया कि भारत 5.5 करोड़ टन उर्वरक उत्पादों के वार्षिक उपयोग के साथ दुनिया में उर्वरकों का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता देश है.

विवेक राय, कृषि जागरण



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