-
योगी-शिवराज की मौजूदगी में लखनऊ से निकलेगा खेती-किसानी का नया रोडमैप
-
लखनऊ में कृषि विकास के महामंथन में तय की जाएगी उत्तर भारत के कृषि विकास की दिशा
-
6 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों के कृषि एवं बागवानी मंत्रियों के साथ ही वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक, विशेषज्ञ और प्रगतिशील किसान एक मंच पर होंगे
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ शुक्रवार को कृषि नीति और किसान हित के साथ ही समग्र कृषि विकास के बड़े विमर्श का केंद्र बनने जा रही है, जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी पूरे आयोजन को राष्ट्रीय महत्व देगी। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्रीगण भागीरथ चौधरी एवं रामनाथ ठाकुर भी सम्मेलन में शामिल होंगे।
उत्तर क्षेत्र सम्मेलन का आयोजन होटल सेंट्रम, लखनऊ में 24 अप्रैल को किया जा रहा है, जहां शुरुआत केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के उद्घाटन भाषण और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संबोधन से होगी। इस सम्मेलन को केवल एक सरकारी बैठक के रूप में नहीं, बल्कि खेती को नई सोच, नई तकनीक और नए बाजारों से जोड़ने वाले मंच के रूप में देखा जा रहा है। उद्घाटन सत्र के तुरंत बाद केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी।
दिनभर चलने वाले विषयगत सत्रों में किसान क्रेडिट कार्ड, एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड, बागवानी की संभावनाएं, दलहन आत्मनिर्भरता मिशन, राष्ट्रीय खाद्य तेल-तिलहन मिशन और डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत किसान रजिस्ट्री जैसे अहम विषयों पर समीक्षा और चर्चा होगी। इन सत्रों में छह राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों
(उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, चंडीगढ़, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख) के कृषि तथा बागवानी मंत्रीगण शामिल होंगे, वहीं प्रगतिशील किसानों, केवीके, स्टार्टअप, एफपीओ, वैज्ञानिकों, नाबार्ड, बैंकों और प्रसंस्करण इकाइयों की होने वाली भागीदारी इस बात का संकेत है कि सम्मेलन का फोकस केवल फाइलों तक सीमित नहीं, बल्कि जमीन से जुड़ी चुनौतियों और समाधान पर रहेगा।
उत्तर प्रदेश सरकार इस अवसर पर गन्ने के साथ इंटर क्रॉपिंग और धान की सीधी बुवाई जैसी अपनी महत्वपूर्ण पहलों को प्रस्तुत करेगी, जो राज्य की कृषि नवाचार क्षमता को राष्ट्रीय मंच पर रेखांकित करेगी। साथ ही हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सर्वोत्तम पद्धतियों पर भी प्रस्तुतियां होंगी, जिससे उत्तर भारत में कृषि सुधार और अनुभव-साझेदारी की एक सकारात्मक दिशा मजबूत होती दिख रही है।
सम्मेलन के एजेंडे में नकली कीटनाशकों और उर्वरकों पर नियंत्रण, उर्वरकों की कालाबाजारी रोकना, प्रभावी वितरण व्यवस्था और संतुलित उपयोग बढ़ाने जैसे मुद्दे भी शामिल हैं। आईसीएआर की ओर से एकीकृत कृषि प्रणाली पर प्रस्तुति इस आयोजन को और महत्वपूर्ण बनाती है, क्योंकि इससे छोटे और सीमांत किसानों के लिए टिकाऊ और बहुआयामी खेती मॉडल पर जोर मिलने की उम्मीद है।
समापन सत्र में उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही सहित विभिन्न राज्यों के कृषि और बागवानी मंत्रियों के संबोधन के बाद केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान का मुख्य समापन वक्तव्य होगा। लखनऊ का यह सम्मेलन न केवल उत्तर भारत की कृषि प्राथमिकताओं को दिशा देगा, बल्कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में किसान-केंद्रित विकास के नए संदेश के रूप में भी देखा जाएगा।
Share your comments