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टॉप 10 पूसा बासमती धान की उन्नत किस्में! किसानों के लिए गेमचेंजर, 57.1 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक मिलेगी तगड़ी पैदावार..

Pusa Basmati Varieties: देश में धान की खेती 20 से अधिक राज्यों में बड़े पैमाने पर की जाती है. यानी की लगभग हर किसान धान की खेती करता है और अब खरीफ सीजन चल रहा है. ऐसे में किसान भाई IARI द्वारा विकसित धान की इन टॉप 10 किस्मों से तगड़ी पैदावार कर अच्छी कमाई कर सकते हैं.

KJ Staff
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टॉप 10 पूसा बासमती धान की उन्नत किस्में (Image Source-AI generate)

भारत के किसानों के लिए धान की खेती आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन चुकी है. हरियाणा, पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहित 20 से अधिक राज्यों के किसान धान की खेती करते हैं. ऐसे में इस खरीफ सीजन अगर भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) द्वारा विकसित पूसा बासमती की उन्नत इन टॉप 10 किस्मों की पैदावार किसान करते हैं तो अच्छी कमाई के साथ अधिक पैदावार भी प्राप्त कर सकते हैं. आइए इसी क्रम में जानें कौन-सी है ये उन्नत किस्म और क्या है इनकी खासियत.

1. पूसा बासमती 1847 (2021)

यह किस्म वर्तमान में सबसे अधिक लोकप्रिय और उच्च उत्पादक किस्मों में से एक है. अगर पंजाब, दिल्ली, उत्तर प्रदेश के किसान इस किस्म की पैदावार करते हैं तो वह 120 दिनों में 57.1 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक तगड़ी पैदावार प्राप्त कर सकते हैं. साथ ही इस किस्म से किसानों को यह फायदा होगा. इसमें बैक्टीरियल ब्लाइट और ब्लास्ट जैसी गंभीर बीमारियों के प्रति प्रतिरोधी है, जिससे किसानों को नुकसान कम होता है और गुणवत्ता बेहतर मिलती है.

2. पूसा बासमती 1692 (2020)

पूसा बासमती 1692 (2020 )यह जल्दी पकने वाली किस्म है. इस किस्म का चुनाव अगर हरियाणा, दिल्ली, पश्चिम उत्तर प्रदेश के किसान करते हैं तो वह केवल 115 दिनों में इस किस्म से 52.6 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है. कम समय में अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं और साथ ही इस किस्म कीग्रेन क्वालिटी भी निर्यात के लिए उपयुक्त है.

3. पूसा बासमती 1985 (2021)

यह किस्म किसानों को 51.6 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन देने में सक्षम किस्म है और 115 दिनों में तैयार हो जाती है. यह बैक्टीरियल ब्लाइट के प्रति सहनशील है और उच्च गुणवत्ता के चावल के लिए जानी जाती है. कम समय और बेहतर उत्पादन के कारण यह किस्म किसानों के लिए लाभकारी विकल्प हो सकती है.

4. पूसा बासमती 1882 (2022)

यह नई किस्म विशेष रूप से सूखा सहनशील है. जिन क्षेत्रों में पानी की कमी रहती है, वहां यह किस्म किसानों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रही है. ऐसे में पंजाब, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड के किसान अगर इस किस्म की पैदावार करते है तो वह इससे 46.9 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है लगभग 134 दिनों में प्राप्त कर सकते हैं.

5. पूसा बासमती 1885 (2021)

पूसा बासमती 1885 (2021)  यह नई किस्म किसानों को 135 दिनों में 46.8 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन देने में सक्षम किस्मों में से एक है साथ ही इस किस्म की खासियत है कि यह बैक्टीरियल ब्लाइट और ब्लास्ट रोगों के प्रति प्रतिरोधी है, जिससे फसल सुरक्षित रहती है. इसकी गुणवत्ता भी उच्च स्तर की होती है.

6. पूसा बासमती 1718 (2017)

अगर किसान भाई इस किस्म का चुनावा करते हैं तो वह इससे 135 दिनों के भीतर 46.4 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज प्राप्त कर सकते हैं. इसके अलावा, यह किस्म उत्तर भारत के कई राज्यों में व्यापक रूप से उगाई जाती है और स्थिर उत्पादन के लिए जानी जाती है.

7. पूसा बासमती 1979 (2021)

किसानों को यह किस्म 45.8 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन देने वाली किस्मों में से एक है. अगर दिल्ली, हरियाणा, पंजाब के किसान अगर इस किस्म का चुनाव करते हैं तो  यह किस्म लगभग 133 दिनों में तैयार होकर किसानों को अच्छी उपज दे सकती है. साथ ही यह किस्म बैक्टीरियल ब्लाइट के प्रति सहनशील है और जिस वजह से इसकी बाजार में अच्छी मांग है.

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(Image Source-AI generate)

8. पूसा बासमती 1886 (2021)

पूसा बासमती 1886 (2021) यह किस्म किसानों के लिए उचित विकल्प साबित होे सकती है और इस नई किस्म से किसान भाई 145 दिनों के भीतर लगभग 44.9 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं. इसके अलावा, इस किस्म की खासियत है कि यह रोग प्रतिरोधी होने के साथ-साथ स्थिर उपज देने के लिए जानी जाती है, जिससे किसानों को बाजारों में किस्म के अच्छे दाम मिलने की संभावना बढ़ जाती है.

9. पूसा बासमती 1637 (2016)

यह किस्म किसानों के बीच काफी लोकप्रिय किस्मों में से एक किस्म है, जो केलव 130 दिनों में तैयार  हो जाती है और किसान भाइयों को इस किस्म से 42 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन मिल सकता है. यह किसानों के लिए एक भरोसेमंद विकल्प है और लंबे समय से उपयोग में है.

10. पूसा बासमती 1728 (2016)

धान की यह किस्म किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकती है, क्योंकि इस किस्म की पैदावार पंजाब, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड सहित जम्मू-कश्मीर में भी की जा सकती है और इस किस्म से किसान भाई 41.8 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन 140 दिनों में प्राप्त कर सकते हैं.

लेखक: रवीना सिंह

English Summary: Pusa Basmati Top 10 Varieties High yield Paddy Farming guide india Published on: 01 June 2026, 06:49 PM IST

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