आज खेती केवल मेहनत का नहीं, बल्कि सही तकनीक और वैज्ञानिक सोच का भी व्यवसाय बन चुकी है. जो किसान समय के साथ नई तकनीकों को अपनाते हैं, वे सीमित संसाधनों में भी बेहतर उत्पादन और अधिक मुनाफा कमा रहे हैं. उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले के पिपरिया खरम गांव के प्रगतिशील किसान अवतार सिंह इसकी जीवंत मिसाल हैं. भारतीय सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने खेती को अपना जीवन बना लिया. लेकिन एक समय ऐसा भी आया, जब अपने खेत की तीन फीट उपजाऊ मिट्टी हट जाने के कारण लोगों ने उनकी जमीन को खेती के लायक नहीं माना.
विशेषज्ञों ने मछली पालन भी असफल बताया. ऐसे कठिन दौर में जायडेक्स कंपनी की जायटॉनिक टेक्नॉलोजी आधारित उत्पादों ने न केवल उनकी मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार किया, बल्कि एक ही वर्ष में उनकी उपज लगभग दोगुनी कर दी. आज उनकी सफलता यह बताती है कि वैज्ञानिक कृषि तकनीक किसान की आय बदलने की क्षमता रखती है. ऐसे में आइए प्रगतिशील किसान अवतार सिंह की सफलता की कहानी के बारे में विस्तार से जानते हैं-
सेना से खेत तक का सफर
प्रगतिशील किसान अवतार सिंह पहले भारतीय सेना में कार्यरत थे. वर्ष 2001 में सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने पूरी तरह खेती को अपनाया. करीब 15 एकड़ भूमि पर वे धान, गेहूं, सरसों सहित विभिन्न फसलों की खेती करते हैं.
उनका मानना है कि सेना ने उन्हें अनुशासन और धैर्य सिखाया, जबकि खेती ने परिस्थितियों से लड़ना और लगातार सीखते रहना सिखाया. पिछले दो दशकों में उन्होंने खेती के कई उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन कभी हार नहीं मानी.
जब एक फैसला बना सबसे बड़ी चुनौती
कुछ वर्ष पहले उनके खेत का एक बड़ा हिस्सा ऊंचा-नीचा था, जहां सिंचाई करना कठिन था. उन्होंने सोचा कि खेती की जगह पर इस खेत में क्यों न मछली पालन किया जाए. इसके लिए लगभग तीन फीट तक मिट्टी उन्होंने खेत से हटा दी.
लेकिन योजना सफल नहीं हुई. मछली पालन विशेषज्ञों ने बताया कि रेतीली जमीन होने के कारण इसमें पानी टिक नहीं पाएगा और मछलियों का विकास संभव नहीं होगा.
जब उन्होंने दोबारा खेती करने की सोची, तब गांव के लोगों ने कहा-
"अब इस जमीन में खेती संभव नहीं है. उपजाऊ मिट्टी तो निकल चुकी है."
यानी एक ही खेत उनके लिए दोहरी चुनौती बन चुका था.
उम्मीद की नई किरण बनी जायटॉनिक टेक्नॉलोजी
इसी दौरान उनकी मुलाकात जायडेक्स कंपनी के एक प्रतिनिधि से हुई. उन्होंने अवतार सिंह को जायटॉनिक टेक्नॉलोजी आधारित जायटॉनिक मिनी किट और अन्य उत्पादों के बारे में जानकारी दी.
शुरुआत में अवतार सिंह ने इसे एक प्रयोग के तौर पर अपनाया.
पहले खेत में गोबर की खाद डाली गई और उसके साथ जायटॉनिक मिनी किट को मिलाकर खेत में प्रयोग किया गया.
अवतार सिंह बताते हैं कि पहले ही वर्ष फसल में सुधार दिखाई देने लगा और दूसरे वर्ष से उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी शुरू हो गई.
मिट्टी में आया चमत्कारी बदलाव
अवतार सिंह के अनुसार सबसे बड़ा परिवर्तन उनकी मिट्टी में आया.
पहले जहां खेत की मिट्टी पूरी तरह रेतीली हो चुकी थी, वहीं अब मिट्टी में भुरभुरापन बढ़ गया. उसमें नमी बनाए रखने की क्षमता विकसित हुई.
पहले सिंचाई के तुरंत बाद पानी जमीन में नीचे चला जाता था, लेकिन अब खेत में पानी अधिक समय तक रुकने लगा.
इसका सीधा असर फसल की जड़ों के विकास पर पड़ा और पौधों की बढ़वार पहले से कहीं बेहतर हुई.
उत्पादन हुआ लगभग दोगुना
अवतार सिंह बताते हैं कि पहले पारंपरिक तरीके से खेती करने पर गेहूं का उत्पादन लगभग 12 से 13 क्विंटल प्रति एकड़ मिलता था. जायटॉनिक टेक्नॉलोजी आधारित उत्पादों के नियमित उपयोग के बाद यही उत्पादन बढ़कर 24 से 25 क्विंटल प्रति एकड़ तक पहुंच गया.
केवल गेहूं ही नहीं, धान और सरसों में भी शानदार परिणाम
अवतार सिंह की सफलता केवल गेहूं तक सीमित नहीं रही. उन्होंने धान की खेती में भी बेहतरीन परिणाम प्राप्त किए. उनके अनुसार धान का उत्पादन लगभग 34 से 35 क्विंटल प्रति एकड़ तक पहुंचा. वहीं सरसों में भी उन्होंने करीब 9 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन प्राप्त किया, जिसे वे पहले की तुलना में काफी बेहतर मानते हैं.
बदलते मौसम में भी मजबूत रही फसल
जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ते तापमान और असामान्य मौसम का असर किसानों पर साफ दिखाई दे रहा है. अवतार सिंह बताते हैं कि वर्तमान समय में वे जायडेक्स कंपनी का जायटॉनिक सुरक्षा उत्पाद का भी उपयोग करते हैं. इस उत्पाद की मदद से गर्मी और मौसम के तनाव का प्रभाव फसल पर कम पड़ता है.
उनका कहना है कि इससे बालियों में दाना बेहतर भरता है और अंतिम उत्पादन पर सकारात्मक असर दिखाई देता है.
जैविक और रासायनिक खेती का संतुलित मॉडल
अवतार सिंह पूरी तरह रासायनिक खेती या पूरी तरह जैविक खेती के बजाय संतुलित खेती में विश्वास रखते हैं. वे गोबर की खाद के साथ जायडेक्स के जैविक उत्पाद जायटॉनिक गोधन को मिलाकर खेत में डालते हैं.
उनका कहना है कि इससे मिट्टी की गुणवत्ता भी सुधरती है और रासायनिक उर्वरकों की उपयोग दक्षता भी बेहतर होती है.
आखिर कैसे जायडेक्स की जायटॉनिक टेक्नॉलोजी किसानों को बना रही है समृद्ध?
अवतार सिंह का अनुभव बताता है कि केवल अधिक खाद डालना ही समाधान नहीं है, बल्कि मिट्टी की जैविक सक्रियता बढ़ाना भी उतना ही आवश्यक है.
जायटॉनिक टेक्नॉलोजी आधारित उत्पादों के नियमित उपयोग से उन्हें कई महत्वपूर्ण लाभ मिले-
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मिट्टी की संरचना में सुधार हुआ.
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जलधारण क्षमता बढ़ी.
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पौधों की जड़ें अधिक मजबूत हुईं.
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पोषक तत्वों का बेहतर उपयोग हुआ.
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फसलों की बढ़वार तेज हुई.
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मौसम के प्रतिकूल प्रभाव कम हुए.
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उत्पादन लगभग दोगुना हो गया.
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खेती की लाभप्रदता बढ़ी.
इन्हीं कारणों से वे पिछले 5-6 वर्षों से लगातार जायडेक्स के उत्पादों का उपयोग कर रहे हैं.
किसानों के लिए प्रेरणा
आज जिस खेत को लोग बेकार मान चुके थे, उसी खेत में अवतार सिंह रिकॉर्ड उत्पादन ले रहे हैं. उनका मानना है कि खेती में सफलता केवल मेहनत से नहीं, बल्कि सही तकनीक, वैज्ञानिक सलाह और गुणवत्तापूर्ण कृषि उत्पादों के चयन से मिलती है.
वे अन्य किसानों से भी अपील करते हैं कि बिना वैज्ञानिक जानकारी के किसी नई तकनीक को नकारें नहीं. यदि सही तरीके से आधुनिक जैविक तकनीकों को अपनाया जाए तो खराब से खराब मिट्टी में भी बेहतर उत्पादन लिया जा सकता है.
नोट: यह लेख प्रगतिशील किसान अवतार सिंह द्वारा साझा किए गए व्यक्तिगत अनुभवों और दावों पर आधारित सफलता की कहानी है. इसमें वर्णित परिणाम स्थानीय परिस्थितियों, मिट्टी, मौसम, फसल प्रबंधन तथा अन्य कृषि कारकों के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं.
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