देश में मक्का उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कृषि वैज्ञानिकों द्वारा लगातार नई और उन्नत किस्में विकसित की जा रही हैं. हाल ही में जारी जानकारी के अनुसार, कई ऐसी हाईब्रिड मक्का किस्में सामने आई हैं जो कम समय में अधिक पैदावार देने के साथ-साथ पोषण गुणवत्ता में भी बेहतर हैं. ऐसे में किसान भाई इस खरीफ सीजन अगर मक्का की इन टॉप 3 किस्मों पूसा सुपर स्वीट कॉर्न-2 (संकर), पूसा एच.क्यू.पी.एम.-1, पूसा बायोफोर्टिफाइड संकर मक्का1 तो तगड़ा मुनाफा कमा सकते हैं.
आइए जानते हैं इन टॉप 3 मक्का किस्मों के बारे में विस्तार से-
1. पूसा सुपर स्वीट कॉर्न-2 (संकर)
यह किस्म वर्ष 2020 में विकसित की गई थी अगर इन इलाके उत्तर भारत के कई राज्यों जैसे हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु और राजस्थान के किसान इस किस्म का चुनाव करते हैं तो इस किस्म से केवल 77 दिनों के भीतर ही 95 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पैदावार प्राप्त कर बाजार में बेचकर अच्छी आय अर्जित कर सकते हैं.
इसके अलावा, इस किस्म में हरे भुट्टों की अधिक संख्या, बेहतर गुणवत्ता और अधिक हरा चारा उत्पादन की क्षमता भी होती है. इसमें लगभग 16.4% शर्करा (ब्रिक्स वैल्यू) पाई जाती है, जिससे यह बाजार में अच्छी कीमत दिलाती है. यह किस्म विशेष रूप से उन किसानों के लिए लाभकारी है जो स्वीट कॉर्न की खेती से अतिरिक्त आय कमाना चाहते हैं.
2. पूसा एच.क्यू.पी.एम.-1 (उन्नत संकर)
इस खरीफ सीजन किसान भाई अगर मक्का की इस किस्म का चुनाव करते हैं, तो बढ़िया मुनाफा कमा सकते है. साथ ही मक्का की इस किस्म की ये खासियत है कि पूरे देश में इसकी खेती की जा सकती है. यह खरीफ, रबी और बसंत- तीनों मौसमों में किसानों को अच्छी उपज देने वाली सक्षम किस्म है. अगर किसान इस किस्म की बुवाई करते हैं तो वह 111 से 129 दिनों के बीच लगभग 81.9 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज प्राप्त कर सकते हैं, जबकि कुछ क्षेत्रों में यह 83 क्विंटल तक भी पहुंच सकती है.
यह किस्म उन किसानों के लिए खास तौर पर उपयोगी है जो पोषक तत्वों से भरपूर मक्का उगाना चाहते हैं और इसे खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में बेचना चाहते हैं. इससे किसानों को बेहतर बाजार मूल्य मिलने की संभावना रहती है.
3. पूसा बायोफोर्टिफाइड संकर मक्का-1
मक्का की यह किस्म वर्ष 2021 में विकसित की गई है और विशेष रूप से उत्तर पहाड़ी और उत्तर पूर्वी मैदानी क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है. ऐसे में अगर किसान इस किस्म का चुनाव कर बुवाई करते हैं तो वह इस किस्म से करीब 107 दिनों में लगभग 76.2 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज प्राप्त कर सकते हैं. साथ ही इसकी प्रमुख विशेषता इसका बायोफोर्टिफिकेशन है, यानी इसमें पोषक तत्वों की मात्रा अधिक होती है. इसमें प्रो-विटामिन-ए (6.60 पीपीएम), लाइसिन (3.37%) और ट्रिप्टोफैन (0.72%) पाया जाता है.
इसके अलावा, यह किस्म उन क्षेत्रों के लिए बेहद फायदेमंद है जहां कुपोषण की समस्या अधिक है, क्योंकि यह पोषण से भरपूर अनाज प्रदान करती है. इसके साथ ही इसकी उपज भी अच्छी है, जिससे किसानों को आर्थिक लाभ मिलता है.
लेखक: रवीना सिंह
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