नई दिल्ली, 02 जून, 2026। कृषि विज्ञान केन्द्र, दिल्ली द्वारा खेत बचाओ अभियान के अंतर्गत उर्वरकों के संतुलित उपयोग, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण तथा उन्नत कृषि तकनीकों के प्रसार हेतु दिल्ली के झटीकेरा गाँव में विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों को मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार, उर्वरकों का संतुलित उपयोग सुनिश्चित करने, खेती की लागत कम करने, फसल विविधीकरण और विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभों के बारे में जानकारी प्रदान करके, उन्हें वैज्ञानिक खेती के तरीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है।
दिल्ली क्षेत्र में खेत बचाओ अभियान
कार्यक्रम के दौरान कृषि विज्ञान केन्द्र, दिल्ली के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. डी. के. राणा ने किसानों को संबोधित करते हुए बताया कि भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के निर्देशानुसार 01 जून से 30 जून, 2026 तक देशभर में खेत बचाओ अभियान संचालित किया जा रहा है। इस अभियान के अंतर्गत कृषि विज्ञान केन्द्र, दिल्ली द्वारा निर्धारित रूट मैप के अनुसार दिल्ली के दक्षिण-पश्चिम, उत्तर-पश्चिम एवं उत्तरी जिलों के विभिन्न गाँवों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि अभियान का उद्देश्य जन-जागरूकता एवं जन-आंदोलन के माध्यम से मिट्टी की उर्वरता में वृद्धि, फसलों की उत्पादकता में सुधार तथा टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देना है, जिससे स्वस्थ मिट्टी, समृद्ध खेती और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित किया जा सके। अभियान के तहत दिल्ली के रासायनिक उर्वरकों के अधिक उपयोग वाले चयनित गाँवों में लगभग 3,000 किसानों को जागरूक करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन
कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केन्द्र, दिल्ली के बागवानी विशेषज्ञ डॉ. राकेश कुमार ने किसानों को नियमित रूप से मिट्टी की जांच कराने तथा मृदा परीक्षण की अनुशंसाओं के अनुसार ही उर्वरकों का प्रयोग करने की सलाह दी।
उन्होंने बताया कि फसल की आवश्यकता के अनुरूप नाइट्रोजन, फास्फोरस एवं पोटाश (एन.पी.के.) के साथ-साथ सल्फर, जिंक एवं अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों तथा जैव उर्वरकों का संतुलित उपयोग बेहतर उत्पादन एवं मृदा स्वास्थ्य सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने प्राकृतिक एवं जैविक खाद, कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट तथा प्राकृतिक खेती की तकनीकों को अपनाने पर भी विशेष बल दिया।
पादप सुरक्षा विशेषज्ञ डॉ. बाबूलाल फगोडिया ने किसानों को आगामी धान फसल की वैज्ञानिक खेती, पोषक तत्व प्रबंधन तथा धान नर्सरी की बुवाई के दौरान अपनाई जाने वाली सावधानियों की विस्तृत जानकारी प्रदान की।
प्रसार विशेषज्ञ कैलाश ने असंतुलित उर्वरक उपयोग से होने वाले दुष्प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए किसानों को उन्नत, कम लागत एवं टिकाऊ कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया, जिससे वे सीमित संसाधनों में अधिक उत्पादन प्राप्त कर अपनी आय बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दे सकें।
मृदा विशेषज्ञ बृजेश कुमार ने किसानों को मिट्टी एवं सिंचाई जल की नियमित जांच कराने तथा प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर ही उर्वरकों के उपयोग की सलाह दी। कार्यक्रम के दौरान वैज्ञानिकों द्वारा खेतों में जाकर मिट्टी के नमूने लेने की वैज्ञानिक विधि का प्रदर्शन भी किया गया तथा किसानों को मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।
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