आज के समय में भारत का आधा हिस्सा कृषि पर ही निर्भर है. यानी की खेती देश के किसानों की रीढ़ बन चुकी है. इस समय देश के किसान भाई- बहन खरीफ सीजन की खेती करने व्यस्त है और कुछ किसान ऐसी फसलों की तलाश कर रहे हैं, जिससे कम समय में अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकें. ऐसे में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), पूसा द्वारा विकसित ये तीन उन्नत बासमती किस्में किसानों के लिए इस खरीफ सीजन मुनाफे का सौदा साबित हो सकती है.
चलिए आगे इस लेख में जानें क्या इन किस्मों की खासियत और कितना मिलेगा उत्पादन-
1. पूसा बासमती 1692
अगर आप इस खरीफ सीजन पूसा बासमती 1692 का चुनाव करते हैं कम समय में अच्छा उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं. साथ ही यह किस्म मुख्य रूप से हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए अनुशंसित है. किसान अगर इस किस्म की खेती करते हैं, तो वह इससे लगभग 120 दिनों 52.6 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पैदावार प्राप्त कर सकते हैं.
खासियत- यह एक अर्द्ध-बौनी, शीघ्र पकने वाली और अधिक उपज देने वाली बासमती किस्म है. कम अवधि में फसल तैयार होने के कारण किसान समय पर अगली फसल की बुवाई भी कर सकते हैं, जिससे फसल चक्र बेहतर बनता है.
2. पूसा बासमती 1847
पूसा बासमती 1847 को दिल्ली, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए एक उचित विकल्प साबित हो सकती है, जिससे किसान लगभग 120 दिनों में 57.1 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक तगड़ी उपज प्राप्त कर सकते हैं और कम समय अधिक कमाई अर्जित कर सकते हैं.
खासियत- पूसा बासमती 1509 का उन्नत संस्करण है और बैक्टीरियल ब्लाइट तथा ब्लास्ट जैसे प्रमुख रोगों के प्रति बेहतर प्रतिरोधक क्षमता रखती है. इससे किसानों को रोग नियंत्रण पर होने वाला खर्च कम करने में मदद मिल सकती है.
3. पूसा बासमती 1885
पूसा बासमती 1885 भी वर्ष 2021 में विकसित की गई एक उन्नत बासमती किस्म है. इसे दिल्ली, हरियाणा और पंजाब के लिए अनुशंसित किया गया है. यह सिंचित परिस्थितियों में खरीफ मौसम के लिए उपयुक्त है और लगभग 135 दिनों में परिपक्व हो जाती है. इस किस्म से किसान भाई 46.8 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज प्राप्त कर सकते हैं.
खासियत- पूसा बासमती 1121 का उन्नत रोग प्रतिरोधी संस्करण है. यह बैक्टीरियल ब्लाइट और ब्लास्ट जैसे गंभीर रोगों के प्रति बेहतर प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करती है. साथ ही, इसमें बासमती की गुणवत्ता, लंबे दाने और बेहतर बाजार मूल्य की संभावनाएं भी बनी रहती हैं. ऐसे में किसान इस फसल की पैदावार कर अच्छी कमाई कर सकते हैं.
लेखक: रवीना सिंह
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