आज के समय में किसान सिर्फ खेती-बाड़ी पर ही निर्भर नहीं रह गए है. वह पारंपरिक खेती के साथ कमाई बढ़ाने के लिए ऐसे बिजनेस की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे कम लागत में अच्छा मुनाफा कमाया जा सकें. ऐसे में किसान भाइयों के लिए मछली पालन अच्छा विकल्प साबित हो सकता है, लेकिन कुछ किसानों के पास पैसों की कमी होने के कारण वे इस करोबार को शुरु नहीं कर पाते. इसी को देखते हुए केंद्र सरकार प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत 60% तक भारी अनुदान प्रदान कर रही है.
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना क्या है?
देश के किसान खेती करने के साथ मछली पालन की ओर बेहद ही तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन कुछ किसानों की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर हैं कि वह मछली पालन की शुरुआत नहीं कर पाते. इसी बात को मद्देनजर और किसानों की इनकम बढ़ाने के उद्देश्य के साथ भारत सरकार ने मछली पालन के लिए सबसे बड़ी योजना की शुरुआत की प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना Pradhan Mantri Matsya Sampada Yojana जिसके तहत सरकार श्रेणी के हिसाब से 90% तक सब्सिडी प्रदान कर रही है.
किसकों कितनी मिलेगा अनुदान?
अगर आप किसान है और आप केंद्र सरकार दुवारा शुरु की गई प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का लाभ उठाना चाहते हैं, तो सबसे पहले यह जान लें कि सरकार श्रेणी के हिसाब से इस प्रकार सब्सिडी प्रदान करेंगी-
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इस सरकारी योजना के तहत सामान्य वर्ग के पुरुषों को कुल लागत पर 40% तक की सब्सिडी की छूट दी जाएगी.
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अगर आवेदक अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति वर्ग से हैं या फिर महिला हैं, तो उन्हें 60% तक भारी अनुदान प्रदान किया जाएगा.
योजना की आवेदन की आखिरी तारीख क्या है?
अगर आप बिहार के किसान है तो मत्स्य प्रजाति विविधीकरण योजना के तहत 60% तक भारी अनुदान वाली योजना के लिए आवेदन 31 अगस्त 2026 तक ही कर सकते हैं. इसी के साथ बिहार सरकार इस सरकारी योजना के तहत राज्य स्तरीय योजनाओं में अति पिछड़ा वर्ग और अनुसूचित जाति के लिए यह आंकड़ा 70% से 80% तक पहुंच जाता है.
वहीं, यूपी सरकार मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत तालाब सुधार और एरेशन सिस्टम लगाने पर 40% से 60% तक सब्सिडी की सहायता सीधे किसानों के बैंक खातों में डाल रही है, जिससे इन इलाकों के किसानों को बड़ी राहत मिल रही है और उनकी इनकम में भी इजाफा हो रहा है.
लेखक: रवीना सिंह
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