देश के करोड़ों किसानों के लिए सरकार डिजिटल कृषि व्यवस्था को लेकर तेजी से काम कर रही है. केंद्र सरकार अब तक किसानों की 10.18 करोड़ से अधिक किसानों की Farmer ID तैयार कर चुकी है. इस पहल के तहत पात्र किसानों को ही सभी सरकारी योजनाओं का फायदा अधिक पारदर्शी, तेज और आसान तरीके से पहुंचाया जा सकेगा. साथ ही Farmer ID की मदजद से किसानों को अलग-अलग सरकारी योजनाओं और कृषि सेवाओं से एक साझा डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से जोड़ा जाएगा.
Farmer ID से किन योजनाओं का मिलेगा लाभ?
Farmer ID को कृषि क्षेत्र की कई महत्वपूर्ण योजनाओं और सेवाओं से जोड़ने की प्रक्रिया चल रही है. इसमें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-Kisan), प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY), न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर कृषि उपज की खरीद, कृषि ऋण, कृषि इनपुट वितरण और प्राकृतिक आपदा राहत जैसी प्रमुख सेवाएं शामिल हैं.
डिजिटल किसान पहचान व्यवस्था लागू होने के बाद सरकार के पास किसानों से संबंधित जानकारी एकीकृत रूप में उपलब्ध हो सकेगी. इससे पात्र किसानों की पहचान करने, योजनाओं का लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचाने और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिल सकती है.
Farmer ID किस राज्य में तेजी से बन रही हैं?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में Farmer ID तैयार करने के मामले में उत्तर प्रदेश सबसे आगे है. राज्य में अब तक 2.43 करोड़ से अधिक किसानों की डिजिटल पहचान तैयार की जा चुकी है.
इसके बाद महाराष्ट्र में करीब 1.35 करोड़, मध्य प्रदेश में 1.13 करोड़ और राजस्थान में 87.23 लाख किसानों की Farmer ID बनाई जा चुकी है. इसके अलावा कर्नाटक, गुजरात, बिहार समेत कई अन्य राज्यों में भी बड़ी संख्या में किसानों को इस डिजिटल पहचान व्यवस्था से जोड़ा गया है.
फसल बीमा में सैटेलाइट तकनीक से आएगी पारदर्शिता
किसानों को बेहतर और समय पर फसल बीमा का लाभ दिलाने के लिए सरकार तकनीक के इस्तेमाल पर भी जोर दे रही है. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत सैटेलाइट इमेजरी और रिमोट सेंसिंग तकनीक के उपयोग का दायरा बढ़ाया जा रहा है.
इसके लिए YES-TECH यानी Yield Estimation System based on Technology का इस्तेमाल किया जा रहा है. इस तकनीक की मदद से बीमा इकाई स्तर पर फसल उत्पादन का वैज्ञानिक तरीके से अनुमान लगाया जा रहा है. इससे फसल कटाई प्रयोग (CCE) से प्राप्त आंकड़ों को अधिक मजबूत आधार मिलने की उम्मीद है.
सैटेलाइट आधारित तकनीक से बाढ़, सूखा और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित क्षेत्रों की पहचान भी तेजी से की जा सकती है. इसका फायदा यह होगा कि फसल नुकसान का आकलन जल्द किया जा सकेगा और बीमा दावों के निपटान में होने वाली देरी को कम करने में मदद मिलेगी.
किसान ड्रोन को बढ़ावा, खरीद पर मिल रही आर्थिक मदद
कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने के लिए सरकार कृषि यंत्रीकरण उप-मिशन (SMAM) के तहत किसान ड्रोन के इस्तेमाल को प्रोत्साहित कर रही है.
कृषि स्नातकों और पूर्वोत्तर राज्यों के छोटे एवं सीमांत किसानों को ड्रोन खरीदने पर 50 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता दी जा रही है. वहीं, अन्य किसानों के लिए 40 प्रतिशत तक सहायता का प्रावधान है. किसान ड्रोन के लिए कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करने पर भी 40 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है. सरकारी जानकारी के मुताबिक, अब तक 2,122 ड्रोन वितरित या स्वीकृत किए जा चुके हैं. इससे किसानों को फसलों पर दवा और पोषक तत्वों के छिड़काव जैसे कामों में आधुनिक तकनीक का लाभ मिल सकता है.
लेखक: रवीना सिंह
Share your comments