यूपी सरकार राज्य के किसानों समेत जिले के किसानों के लिए भी कई कल्याणकारी सरकारी योजनाएं चला रही है, जिसके तहत किसानों को बड़ा मुनाफा भी हो रहा है. इसी के चलते उत्तर प्रदेश सरकार मिर्जापुर जिले के किसानोंं को स्ट्रॉबेरी की खेती करने के लिए प्रोत्साहित करने के साथ-साथ 90 हजार तक भारी अनुदान भी प्रदान कर रही है. इस सरकारी सब्सिडी की मदद से किसान प्रति एकड़ में लाखों की कमाई कर सकते हैं.
स्ट्रॉबेरी किन किस्मों से मिलेगा बेहतर उत्पादन?
अगर आप यूपी के किसान है और इस सरकारी योजना में इच्छुक होने के साथ ऐसी स्ट्रॉबेरी की किस्मों की तलाश में हैं, तो यह किस्में आपके लिए अच्छा विकल्प साबित हो सकती है-
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विंटर डाउन: यह जल्दी फल देने वाली और अधिक पैदावार देने वाली किस्म है, जिसके फल ठंड के मौसम में जल्दी तैयार होते हैं और किसान इस किस्म की पैदावार कर अच्छी उपज प्राप्त कर सकते हैं.
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स्वीट चार्ली: यह एक बहुत ही मीठी और लोकप्रिय किस्म है, जिसके फल गहरे लाल रंग के और आकार में अच्छे होते हैं, जो बाजारों में किसानों को अच्छा मुनाफा दिला सकती है.
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नाबिला: इस किस्म के फल बहुत ही सुंदर, एक जैसे आकार के होते हैं और इस किस्म की अगर किसान पैदावार करते हैं तो वह इन किस्मों से अच्छी आमदनी अर्जित कर सकते हैं.
स्ट्रॉबेरी की खेती से कितनी होगी कमाई?
स्ट्रॉबेरी एक ऐसा फल है, जिसकी बाजारों में मांग बारह महीने बनी रहती है, क्योंकि इसमें कई पोषक तत्व पाएं जाते हैं. ऐसे में अगर किसान भाई स्ट्रॉबेरी की खेती करते हैं, तो वह इससे अच्छा उत्पादन प्राप्त करने के साथ सही देखभाल से करीब 6 से 12 लाख रुपये या उससे अधिक आय अर्जित कर सकते हैं.
योजना में सरकार ने क्या लक्ष्य तय किया है?
यूपी सरकार ने इस सरकारी योजना के तहत किसानों के लिए लक्ष्य तय किया है कि मिर्जापुर जिले में वर्ष 2026-27 में स्ट्रॉबेरी की खेती करने वाले किसानों के लिए खेती का रकबा बढ़ाया गया है, जिसके तहत किसानों के लिए 150 एकड़ में खेती का लक्ष्य तय किया गया है. ऐसे में अगर किसान इस सरकारी योजना में आवेदन करते हैं, तो वह लगभग 90 हजार तक भारी अनुदान प्रदान कर सकते हैं.
योजना में कैसे करें आवेदन?
अगर आप इस सरकारी योजना में इच्छुक है और इस सरकारी योजना में आवेदन करना चाहते हैं, तो ऐसे में आप हॉर्टिकल्चर के ऑफिसियल वेबसाइट पर आवेदन कर सकते हैं. या फिर उद्यान विभाग के कार्यालय जाकर भी संपर्क कर सकते हैं.
लेखक: रवीना सिंह
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