अगर आप किसान है और खेती करने के अलावा, अन्य करोबार करने की सोच रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद ही जरुरी है. राजस्थान सरकार किसानों को मछली पालन करने के लिए प्रोत्साहित भी कर रही है और साथ ही मछली पालन करने के लिए दे रही है 40% तक भारी अनुदान और साथ ही योजना में तालाब निर्माण, तालाब सुधार, मछली बीज, उपकरण और अन्य आवश्यक सुविधाएं भी मुहैया कराई जा रही है, ताकि उत्पादन से लेकर आय में भी वृद्धि हो सकें.
फार्म पॉन्ड का कैसे करें बेहतर उपयोग?
राजस्थान में बड़ी संख्या में किसानों ने सिंचाई के लिए अपने खेतों में फार्म पॉन्ड या छोटे तालाब बनाए हुए है. ऐसे में इनका उपयोग केवल सिंचाई तक सीमित रहता है, लेकिन अब इन्हीं तालाबों का उपयोग मछली पालन के लिए भी किया जा सकता है. यानी की इससे किसानों को एक ही संसाधन से दोहरा लाभ मिल सकता है.
एक ओर किसान सिंचाई कर सकते हैं. वहीं दूसरी ओर मछली उत्पादन से अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं.
मानसून क्यों है सबसे उपयुक्त समय?
मछली पालन की शुरुआत मानसून में करना सबसे लाभदायक रहता है. बारिश के कारण तालाबों में पर्याप्त जल भर जाता है, जिससे मछलियों के विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार होता है. यदि इस समय अच्छी गुणवत्ता वाले मछली बीज तालाब में छोड़े जाएं और नियमित रूप से संतुलित आहार तथा जल प्रबंधन किया जाए, तो कुछ ही महीनों में मछलियां बाजार योग्य आकार प्राप्त कर सकती हैं. इससे किसानों को कम समय में बेहतर उत्पादन और अच्छा मुनाफा मिलता है.
योजना के तहत किन कार्यों पर मिलेगी सब्सिडी?
राजस्थान सरकार की मछली पालन प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत पात्र किसानों को कई प्रकार की सुविधाओं पर आर्थिक सहायता दी जा रही है-
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नए तालाब का निर्माण
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पुराने तालाब का सुधार एवं मरम्मत
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गुणवत्तायुक्त मछली बीज की खरीद
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मछली पालन से जुड़े आवश्यक उपकरण
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अन्य स्वीकृत मत्स्य विकास कार्य
ऐसे करें योजना के लिए आवेदन
योजना का लाभ लेने के इच्छुक किसानों को अपने जिले के मत्स्य पालन विभाग से संपर्क करना होगा. आवेदन के दौरान विभाग द्वारा मांगे गए सभी आवश्यक दस्तावेज जमा करने होंगे.
आमतौर पर आवेदन के लिए निम्न दस्तावेज आवश्यक होते हैं-
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आधार कार्ड
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भूमि संबंधी दस्तावेज
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बैंक खाते का विवरण
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पासपोर्ट आकार का फोटो
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अन्य विभागीय दस्तावेज
प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता भी मिलेगी
राजस्थान मत्स्य पालन विभाग केवल आर्थिक सहायता ही नहीं देता, बल्कि किसानों को वैज्ञानिक तरीके से मछली पालन करने का प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराता है जैसे- तालाब की तैयारी कैसे करें, कौन-सी मछली प्रजाति स्थानीय परिस्थितियों के लिए बेहतर रहेगी, संतुलित आहार कैसे दें, पानी की गुणवत्ता कैसे बनाए रखें और मछलियों को बीमारियों से कैसे बचाएं. नियमित तकनीकी मार्गदर्शन मिलने से नए किसान भी आसानी से इस व्यवसाय को सफल बना सकते हैं.
लेखक: रवीना सिंह
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