देश के किसानों के हित में सरकार कई सरकारी योजना चला रही है और भारी अनुदान मुहैया करा रही है, ताकि किसानों की लागत कम हो और मुनाफा अधिक. इसी दिशा में राजस्थान सरकार ने राज्य के किसानों के लिए बड़ा कदम उठाया है, जिसके तहत सरकार ने “नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल-तिलहन एवं दलहन योजना” के तहत 135 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है. इस योजना का लाभ राज्य के लाखों किसान भाइयों को मिलने की उम्मीद है.
किन फसलों पर मिलेगी सब्सिडी?
इस योजना के तहत किसानों को मूंग, उड़द, अरहर, सोयाबीन, सरसों, तिल और अरंडी जैसी प्रमुख दलहनी और तिलहनी फसलों के प्रमाणित बीज उपलब्ध कराए जाएंगे. सूत्रों के मुताबिक कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा का कहना है कि कुछ बीज किसानों को मुफ्त दिए जाएंगे, जबकि अन्य पर भारी सब्सिडी प्रदान की जाएगी. इससे छोटे और सीमांत किसानों को विशेष रूप से फायदा होगा, जो अक्सर महंगे बीज खरीदने में सक्षम नहीं होते.
प्रमाणित बीजों से किसानों को क्या फायदा होगा?
राज्य के किसान भाई अगर प्रमाणित बीजों के उपयोग करते हैं, तो उनकी फसल की गुणवत्ता बेहतर होगी और उत्पादन भी बढ़ेगा. इसके अलावा, इन बीजों में रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है, जिससे फसल खराब होने का जोखिम भी कम हो जाता है. राजस्थान जैसे राज्य में, जहां जलवायु चुनौतियां अक्सर खेती को प्रभावित करती हैं, वहां इस तरह की पहल किसानों के लिए काफी राहत भरी साबित हो सकती है.
फसल प्रदर्शन कार्यक्रम से मिलेगा प्रशिक्षण
योजना का एक अहम हिस्सा फसल प्रदर्शन कार्यक्रम भी है. राज्यभर में करीब 70 हजार फसल प्रदर्शनों का आयोजन किया जाएगा. इन कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, उन्नत बीजों और बेहतर फसल प्रबंधन के बारे में जानकारी दी जाएगी.
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, अभी भी कई किसान पारंपरिक तरीकों और पुराने बीजों का इस्तेमाल करते हैं, जिससे उत्पादन क्षमता सीमित रह जाती है. ऐसे में फसल प्रदर्शन कार्यक्रम किसानों को नई तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित करेंगे. इन आयोजनों में बीज उपचार, उर्वरक प्रबंधन, सिंचाई तकनीक और कीट नियंत्रण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी जानकारी दी जाएगी. इससे किसानों को कम लागत में अधिक उत्पादन हासिल करने में मदद मिलेगी.
कब शुरू होगा बीज वितरण
सरकार ने सभी जिलों को निर्देश जारी कर दिए हैं कि बीज वितरण प्रक्रिया को जल्द से जल्द शुरू किया जाए. कृषि विभाग का लक्ष्य है कि किसानों को समय पर बीज उपलब्ध हो, ताकि वे बुवाई के दौरान किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करें. राज्य सरकार का विशेष फोकस इस बार दलहन और तिलहन उत्पादन बढ़ाने पर है.
लेखक: रवीना सिंह
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