Poetry

इश्क है तो इज़हार कर !

गर किसी को चाहता है दिल

वक्त-बेवक्त का न इंतज़ार कर

किनारे खड़ी ये कश्ती दूर निकल जाएगी

गर इश्क है तो इज़हार कर

राह में जितनी तकलीफें आएं

सबको तू पार कर

बुलंद रख हौसला अपना

जी भर के प्यार कर

जवाब दे कुछ सवालों के

कुछ तू भी तैयार कर

हमेशा सीखने को मिलता है

जीत से ज्यादा हार कर

सुलझा हर एक पहेली

अपनी चाल का इंतजार कर

शतरंज का खेल है

अपना वज़ीर तैयार कर



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