Poetry

तूझे चाहता हूं मैं !

अकेले में जब खुद को

अकेला पाता हूं मैं

तूझे चाहता हूं मैं

नादानियां कौन याद रखता है ?

भूल जाता हूं मैं

तूझे चाहता हूं मैं

निभाना आसान नहीं रिश्तों को

पर निभाता हूं मैं

तूझे चाहता हूं मैं

हां ! जिंदगी मायूस करती है

फिर भी मुस्कुराता हूं मैं

तूझे चाहता हूं मैं

जानता हूं तू हकीकत नहीं, बावजूद इसके

चीखता - पुकारता हूं मैं

तूझे चाहता हूं मैं



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