किसानों की सबसे बड़ी पूंजी होती उसके खेत की जमीन और इस समय किसान अपनी खेत की जमीन पर खरीफ फसलों की तैयारी करने में बेहद ही व्यस्त है. साथ ही कुछ किसान भाइयों को तलाश है उन फसल की जिससे ताबातोड़ उत्पादन मिलने की संभावना अधिक हो. ऐसे में ICAR द्वारा विकसित सोयाबीन किस्में किसानों के लिए सबसे बेहतर विकल्प हो सकती है, जिनमें- पूसा सोयाबीन 9712, पूसा सोयाबीन 12 और पूसा सोयाबीन 6. आगे इस आर्टिकल में जानते हैं इन किस्मों की खासियत और लाभ.
1.पूसा सोयाबीन 9712
पूसा सोयाबीन 9712 किस्म जल्दी पकने वाली और रोग प्रतिरोधी किस्म है, जो किसानों के बीच काफी लोकप्रिय है. यह किस्म मुख्य रूप से दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों के लिए उपयुक्त मानी जाती है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह लगभग 115 दिनों में पककर तैयार हो जाती है, जिससे किसान समय पर अगली फसल ले सकते हैं.
उत्पादन की बात करें तो यह किस्म औसतन 22.5 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज दे सकती है. इसके अलावा, यह मूंगबीन येलो मोजेक वायरस (YMV) के प्रति प्रतिरोधी है, जिससे फसल को नुकसान कम होता है. कम समय और अच्छी पैदावार के कारण यह किस्म छोटे और मध्यम किसानों के लिए बेहद फायदेमंद है.
2.पूसा सोयाबीन 12
पूसा सोयाबीन 12 किस्म उत्तर भारत के मैदानी इलाकों के लिए बेहद उपयुक्त है. यह किस्म लगभग 128 दिनों में तैयार होती है और इसकी औसत पैदावार 22.9 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पहुंच सकती है. यानी किसान भाई इस इस उन्नत किस्म से कम समय में अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं.
इसके अलावा, इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह न केवल येलो मोजेक वायरस बल्कि राइजोक्टोनिया ब्लाइट जैसी खतरनाक बीमारियों के प्रति भी प्रतिरोधी है. इससे किसानों को कीटनाशकों पर कम खर्च करना पड़ता है और मुनाफा बढ़ता है. बेहतर उत्पादन और कम जोखिम के चलते यह किस्म किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है.
3.पूसा सोयाबीन 6
पूसा सोयाबीन 6 किस्म दिल्ली, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों के लिए उपयुक्त है. यह किस्म लगभग 116 दिनों में तैयार हो जाती है और इसकी औसत पैदावार 21.4 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है और इस किस्म की बुवाई कर कम समय में अच्छी उपज प्राप्त कर सकते हैं.
साथ ही इसकी खास बात यह है कि यह येलो मोजेक वायरस, राइजोक्टोनिया ब्लाइट और बैक्टीरियल पस्ट्यूल जैसी कई बीमारियों के प्रति प्रतिरोधी है. इसके अलावा, यह स्टेम फ्लाई और डिफोलिएटर्स जैसे कीटों के प्रति भी मध्यम सहनशीलता रखती है. इस कारण यह किस्म कम जोखिम में स्थिर उत्पादन देने के लिए जानी जाती है.
किसानों के लिए क्यों फायदेमंद हैं ये किस्में?
-
कम समय में फसल तैयार होने से दोहरी खेती का मौका
-
रोग प्रतिरोधक क्षमता के कारण कम लागत
-
अधिक उत्पादन से बेहतर मुनाफा
-
बदलते मौसम में भी स्थिर उपज
लेखक: रवीना सिंह
Share your comments