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मूंग की टॉप-3 उन्नत किस्में! ज्यादा उत्पादन और कम अवधि में बेहतर मुनाफा, जानें किस्मों के बारे में सबकुछ

Moong Dal Varieties: देश के किसानों के बीच दलहन किस्म काफी लोकप्रिय हो रही है और इस समय खरीफ सीजन की फसलों की बुवाई जोरों से चल रही है. ऐसे में किसान अगर ICAR द्वारा विकसित मूंग की इन टॉप-3 उन्नत किस्मों की खेती करते हैं, तो बढ़िया मुनाफा कमा सकते हैं.

KJ Staff
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मूंग की टॉप-3 उन्नत किस्में (Image Source-AI generate)

देश में दलहन उत्पादन बढ़ाने की दिशा में कृषि वैज्ञानिक रिसर्च करते रहते हैं, ताकि नई किस्मों से दलहन उत्पादन में बढ़ोतरी की जा सकें. अब खरीफ सीजन चल रहा है और ऐसे में किसान भाइयों को तलाश दलहन किस्म की. अगर किसान ICAR द्वारा विकसित मूंग की इन टॉप-3 उन्नत किस्मों की खेती करते हैं, तो बढ़िया उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं. आइए आगे इस लेख में जानें कौन-सी है ये उन्नत किस्में और किसानों को कितना मिलेगा उत्पादन.

1.पूसा विशाल (Pusa Vishal - 2000)

मूंग की यह किस्म उत्तर-पश्चिमी मैदानी क्षेत्रों के लिए बेहद उपयुक्त मानी जाती है. पूसा विशाल किसानों के बीच अपनी स्थिर पैदावार और जल्दी पकने की क्षमता के कारण काफी लोकप्रिय है. अगर किसान भाई इस किस्म का चुनाव करते हैं, तो इस किस्म से कम अवधि (करीब 65 दिन) में 11.5 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक प्राप्त कर सकते हैं. 

खासियत- इसके अलावा इस किस्म की खासियत है- पीले मोज़ेक वायरस (YMV) जैसी प्रमुख बीमारी के प्रति प्रतिरोधी है, जिससे फसल को नुकसान कम होता है. दाने बड़े और आकर्षक होते हैं, जो बाजार में अच्छी कीमत दिलाते हैं.

2.पूसा 1431 (Pusa 1431 - 2018)

पूसा 1431 मूंग की एक आधुनिक और उन्नत किस्म है, जिसे खासतौर पर अधिक उत्पादन और बेहतर गुणवत्ता के लिए विकसित किया गया है. यह किस्म उत्तरी भारत के कई हिस्सों में तेजी से लोकप्रिय हो रही है. अगर किसान भाई इस खरीफ सीजन इस किस्म की पैदावार करते हैं, तो लगभग 66 दिन है में करीब 12.9 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज प्राप्त कर सकते हैं.

खासियत-इस किस्म में उच्च प्रोटीन (लगभग 25.4%) पाया जाता है, जिससे इसकी बाजार मांग बढ़ जाती है. साथ ही यह लीफ स्पॉट, वेब ब्लाइट और एन्थ्रेक्नोज जैसी बीमारियों के प्रति भी प्रतिरोधी है.

3.पूसा 1641 (Pusa 1641 - 2021)

हाल ही में विकसित पूसा 1641 मूंग की एक नई और उन्नत किस्म है, जो उत्पादन के मामले में काफी आगे मानी जा रही है. यह किस्म विशेष रूप से उत्तर भारत के क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है.

इसकी औसत पैदावार लगभग 13.1 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक हो सकती है, जो इसे सबसे ज्यादा उत्पादन देने वाली किस्मों में शामिल करती है. इसकी परिपक्वता अवधि करीब 63 दिन है, यानी यह जल्दी तैयार होने वाली किस्म है.

खासियत- यह किस्म भी पीला मोज़ेक वायरस (YMV) के प्रति प्रतिरोधी है और इसमें दानों का आकार अच्छा होता है. साथ ही इसमें 100 दानों का वजन लगभग 4.2 ग्राम होता है, जो इसकी गुणवत्ता को दर्शाता है.

लेखक: रवीना सिंह

English Summary: Top 3 Moong Dal Varieties Short Duration High Profit Farming Published on: 20 May 2026, 06:36 PM IST

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