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ग्रामीण विकास में ऐतिहासिक पहल: 1.25 लाख करोड़ रु. का प्रावधान, 1 जुलाई से नई व्यवस्था लागू- शिवराज सिंह
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95,692 करोड़ रु. का इंटरिम अलोकेशन राज्यों को जारी, पंचायतों को मिलेगा सीधा लाभ- शिवराज सिंह चौहान
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30,000 करोड़ रु. पहले ही मनरेगा के तहत आवंटित; ट्रांजिशन में एक भी मजदूर बेरोजगार न रहे- शिवराज सिंह चौहान
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DBT, e-KYC और फेस ऑथेंटिकेशन में राज्यों की तेज प्रगति, बैठक में शिवराज सिंह ने दिए दिशा-निर्देश
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26 राज्यों ने बजट में किया प्रावधान, 4 राज्यों से जल्द निर्णय का केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने किया आग्रह
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पंचायतों के माध्यम से विकास कार्यों को गति देने पर शिवराज सिंह चौहान का जोर
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28-29 जून को दिल्ली में राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन आयोजित होगा- शिवराज सिंह चौहान
नई दिल्ली, 9 जून 2026,"विकसित भारत जी राम जी" पर अमल के संबंध में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज राज्यों के ग्रामीण विकास मंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक ली। केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में ग्रामीण रोजगार, श्रमिक सुरक्षा और गांवों के समग्र विकास को नई गति देने के लिए इस व्यापक वित्तीय और नीतिगत पहल की घोषणा की है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मंत्रियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक में कहा कि 1 जुलाई 2026 से लागू होने जा रही नई ऐतिहासिक व्यवस्था के तहत ट्रांजिशन पूरी तरह सुचारू, श्रमिक-केंद्रित और बिना किसी व्यवधान के होना चाहिए। बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री चंद्रशेखर पेम्मासामी भी शामिल हुए।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बैठक में कहा कि यह केवल एक योजना का परिवर्तन नहीं है, बल्कि करोड़ों मजदूरों के जीवन और आजीविका से जुड़ा विषय है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि “एक दिन भी कोई मजदूर बिना काम के न रहे” और रोजगार, मजदूरी भुगतान तथा वैधानिक अधिकारों की गारंटी में किसी प्रकार की बाधा स्वीकार्य नहीं होगी।
उन्होंने जानकारी दी कि केंद्र सरकार ने पहले ही मनरेगा के तहत 30 हजार करोड़ रु. आवंटित कर दिए हैं। इसके अतिरिक्त आज 95,692 करोड़ रु. का इंटरिम अलोकेशन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जारी किया गया। इस प्रकार कुल राशि 1.25 लाख करोड़ रु. से अधिक हो जाएगी।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह राशि देश की लगभग 2.80 लाख ग्राम पंचायतों तक पहुंचेगी, जिससे प्रत्येक पंचायत को लाखों रुपये का फंड उपलब्ध होगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस धनराशि का उपयोग अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार चिन्हित विकास कार्यों में किया जाए, जिससे रोजगार सृजन के साथ-साथ ग्रामीण परिसंपत्तियों का निर्माण भी सुनिश्चित हो।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार केवल धन उपलब्ध नहीं करा रही है, बल्कि यह सुनिश्चित करना चाहती है कि समय पर मजदूरी भुगतान हो, श्रमिकों के अधिकार सुरक्षित रहें और विकास कार्यों में कोई व्यवधान न आए। उन्होंने राज्यों से आग्रह किया कि वे पर्याप्त मात्रा में कार्यों को पूर्व स्वीकृति दें, ताकि 1 जुलाई से ही काम तेजी से शुरू हो सके।
डिजिटल और प्रशासनिक तैयारियों पर बात करते हुए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि DBT, SMS आधारित सूचना प्रणाली, e-KYC और फेस ऑथेंटिकेशन जैसी प्रक्रियाओं में कई राज्यों ने उल्लेखनीय प्रगति की है, जो नई व्यवस्था के सफल क्रियान्वयन का संकेत है।
उन्होंने बताया कि 26 राज्यों ने “विकसित भारत-ग्रामीण भारत” के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए अपने बजट में वित्तीय प्रावधान कर लिए हैं जबकि झारखंड, कर्नाटक, तेलंगाना और मिजोरम को जल्द से जल्द यह प्रक्रिया पूरी करने का आग्रह किया गया है। उन्होंने स्वयं इन राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखने की बात भी कही।
राज्यों को निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि वे शीघ्र राज्य स्तरीय अधिसूचना जारी करें। मिजोरम, पुडुचेरी और आंध्र प्रदेश द्वारा अधिसूचना जारी किए जाने की सराहना करते हुए उन्होंने अन्य राज्यों से भी तेजी से कार्रवाई करने को कहा। साथ ही कृषि के पीक सीजन को अधिसूचित करने, 100 प्रतिशत e-KYC सुनिश्चित करने और जिला व ब्लॉक स्तर पर क्षमता निर्माण तथा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए।
शिवराज सिंह ने बताया कि ग्राम पंचायत और ग्राम सभा के माध्यम से ही कार्यों का चयन किया जाएगा और इन्हीं प्रस्तावों के आधार पर कार्यों को अंतिम रूप दिया जाएगा। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि 1 जुलाई तक मनरेगा के तहत रोजगार और मजदूरी भुगतान में किसी प्रकार की कमी या व्यवधान न आए।
बैठक के दौरान विभिन्न राज्यों के लिए इंटरिम अलोकेशन की घोषणा केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह द्वारा की गई। आवंटन इस प्रकार है- आंध्र प्रदे 7,707.21 करोड़ रु., अरुणाचल प्रदे 560.70 करोड़ रु., असम 1,929.24 करोड़ रु., बिहार 6,715.83 करोड़ रु., छत्तीसगढ़ 3,354.85 करोड़ रु., गोवा 3.70 करोड़ रु., गुजरात 1,540.54 करोड़ रु., हरियाणा को 590.23 करोड़ रु., हिमाचल प्रदे 1,201.78 करोड़ रु., झारखंड 2,705.64 करोड़ रु., कर्नाटक 5,709.09 करोड़ रु., केरल 3,136.44 करोड़ रु., मध्य प्रदेश 6,252.03 करोड़ रु., महाराष्ट्र 4,420.32 करोड़ रु., मणिपुर 581.99 करोड़ रु., मेघालय 1,155.09 करोड़ रु., मिजोरम 611.65 करोड़ रु., नागालैंड 287.85 करोड़ रु., ओडिशा 3,763.80 करोड़ रु. और पंजाब 1,331.61 करोड़ रु.।
इसी प्रकार राजस्थान के लिए 7,581.87 करोड़ रुपये, सिक्किम के लिए 97.57 करोड़ रुपये, तमिलनाडु के लिए 7,957.57 करोड़ रुपये, तेलंगाना के लिए 4,229.74 करोड़ रुपये, त्रिपुरा के लिए 1,041.07 करोड़ रुपये, उत्तर प्रदेश के लिए 12,221.48 करोड़ रुपये, उत्तराखंड के लिए 626.43 करोड़ रुपये और पश्चिम बंगाल के लिए 8,508.00 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है, जिससे राज्यों को कुल 92,550.17 करोड़ रुपये मिलेंगे। केंद्र शासित प्रदेशों में पुडुचेरी को 40.56 करोड़ रुपये, जम्मू-कश्मीर को 1,151.02 करोड़ रुपये, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह को 4.44 करोड़ रुपये, लद्दाख को 85.98 करोड़ रुपये, दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव को 9.02 करोड़ रुपये तथा लक्षद्वीप को 0.32 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जिससे यूटीज़ को कुल 1,291.32 करोड़ रुपये प्राप्त होंगे। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के इस कुल प्रावधान के अलावा केंद्रीय प्रशासन और सोशल ऑडिट के लिए 1,850.62 करोड़ रु. रखे गए हैं, जिससे इंटरिम अलोकेशन की कुल राशि 95,692.31 करोड़ रु. पर पहुंचती है। इससे क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी।
केंद्रीय मंत्री चौहान ने कहा कि यह पहल केवल एक योजना नहीं, बल्कि “विकसित भारत” के लक्ष्य की दिशा में “विकसित गांव” बनाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। इसकी सफलता राज्यों की प्रतिबद्धता, तैयारी और सक्रिय सहभागिता पर निर्भर करेगी।
उन्होंने सभी राज्यों को 28 और 29 जून को दिल्ली के पूसा संस्थान में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन में भाग लेने का निमंत्रण दिया, जहां इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।
शिवराज सिंह ने विश्वास व्यक्त किया कि सभी राज्यों के सहयोग से, प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में यह पहल ग्रामीण भारत की तस्वीर बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और करोड़ों मजदूरों को स्थायी रोजगार और बेहतर जीवन उपलब्ध कराएगी।
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