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अदरक की खेती से कमाएं मुनाफा, जानिए कैसे

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प्राचीन काल से अदरक को एक मसाले और औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है. इसको आयुर्वेदिक ग्रंथों में भी सबसे प्रमुख बूटी कहा गया है. अदरक में कई पोषक तत्व होते है, जिससे जोड़ों के दर्द, मतली समेन कई परेशानियों का इलाज होता है. हमारे देश में अदरक एक प्रमुख मसाला है. इसको खुशबू लाने के लिए आचार, चाय समेत कई व्यजंनो में इस्तेमाल किया जाता हैं. देशभर में अदरक की मांग होती है, इसलिए किसानों को इसकी खेती वैज्ञानिक तरीके से करनी चाहिए. जिससे खेती में ज्यादा से ज्यादा फायदा हो. आज हम इस लेख में अदरक की उन्नत खेती की पूरी जानकारी देने वाले है.

जलवायु

अदरक की खेती करने के लिए गर्म व आर्द्रता वाली जगह की आवश्कता होती है. इसकी अच्छी उपज करीब 1500 से 1800 मिलीमीटर, वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्रों में होती है. इसके अलावा जल निकास का प्रबंधन होना चाहिए. ध्यान रहे कि खेत में पानी ना जमा होने दें, क्योंकि पानी में यह ज्यादा देर बच नहीं पाएगी.

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मिट्टी

अदरक चिकनी,  रेतली व लाल समेत हर तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है. फसल की वृद्धि के वक्त करीब 6-6.5 पी एच वाली मिट्टी अच्छी मानी जाती है. ध्यान रहे कि हर साल एक ही ज़मीन पर अदरक की खेती ना करें. एक ही भूमि पर बार-बार खेती करने से रोग और कीटों में वृद्धि हो जाती है. इसके चलिए फसल चक अपनाएं.

खेत की तैयारी

सबसे पहले खेत में अनुशंसित मात्रा में गोबर की सड़ी खाद या फिर कम्पोस्ट डाल दें. अब देशी हल से 2 से 3 बार आड़ी-तिरछी जुताई करके खेत को समतल बना लें. साथ ही खेत को छोटी-छोटी क्यारियों में बांट दें. आखिरी जुताई के समय उर्वरकों की अनुशंसित मात्रा का प्रयोग करना चाहिए.

उन्नत किस्मों का चयन

अदरक की कई उन्नत किस्में पाई जाती है जैसे मारन, कुरुप्पम्पदी, एरनाद, वायनाड, हिमाचल और नाडिया है. इसकी खेती में अच्छी उपज पाने के लिए अपने क्षेत्र की प्रचलित और भरपूर उत्पादन देने वाली किस्मों को चुनना चाहिए.

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बुवाई का समय

इसकी बुवाई मई से जून माह में की जाती है, बीज कंदों को बोने से पहले लगभग 0.25 प्रतिशत इथेन, 45 प्रतिशत एम और 0.1 प्रतिशत बाविस्टोन का मिश्रण तैयार कर लें. इसके बाद बीज कंदों को लगभग एक घंटे तक घोल में डुबाकर रखे. फिर इसको छाया में ही सूखा लें. खेत में लगभग 4 सेंटीमीटर गहरे गड्डे को खोद लें. जब बीज ठीक तरीके से सूख जाए. तब उसी में बो देना चाहिए. बुवाई के बाद ही गड्डे में घास फूस पत्तियों और गोबर की खाद को डाल दें और अच्छी तरह से ढंक देना चाहिए.

सिंचाई

इसकी खेती में बराबर नमी का बना रहना अच्छा माना जाता है. इसकी पहली सिंचाई बुआई के तुंरत बाद कर देनी चाहिए. इसके फसल की सिंचाई वर्षा की तीव्रता और आवर्ती के आधार पर करें.

फसल की कटाई

अदरक की फसल लगभग 7 से 8 महीनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है. अगर फसल का प्रयोग मसाले बनाने में करना है, तो इसकी लगभग 6 माह बाद कटाई कर देनी चाहिए. इसके अलावा फसल तो नए उत्पाद बनाने के लिए उगा रहे है तो कटाई लगभग 8 माह कर दें. फसल में जब पत्ते पीले और पूरी तरह सूखने लगे तो समझ जाए कि फसल कटाई के लिए तैयार है. इसके बाद गांठों को उखाड़कर बाहर निकाल दें और 2-3 बार पानी से धोकर साफ करें. अब 2-3 दिनों के लिए छांव में सुखा लें.

पैदावार और भण्डारण

अदरक की खेती में उन्नत किस्मों और अच्छे प्रबंधन द्वारा लगभग 350 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पैदावार कर सकते है. बता दें कि भारत में अदरक की पैदावार ज्यादा होती है. इसकी खेती के लिए कर्नाटक, उड़ीसा,  अरूणाचल प्रदेश,  आसाम,  मेघालय और गुजरात को मुख्य राज्य माना जाता है. अदरक की वैज्ञानिक तरीके से खेती करके किसान काफी मुनाफा कमा सकते है.

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