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धनिया की उन्नत खेती कर कमाएं भारी मुनाफा!

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धनिया एक बहुउपयोगी मसाला है, ये एक ऐसी फसल होती है, जिसको किसान मसालों के रूप में तो बेचते है. इसकी खेती से अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है. धनिया के बीज और पत्तियां खाने को स्वादिष्ट बनाती है. ज्यादातर लोग अपने भोजन में धनिया पत्ती का इस्तेमाल सब्जी बनाने में करते हैं. तो वहीं इसका इस्तेमाल खाने को सजाने में भी किया जाता है. लोग धनिया की पत्ती को चटनी भी काफी पसंद करते है. देशभर में धनिया की मांग होती है. इसकी खेती उत्तर प्रदेश, पंजाब, मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, बिहार, आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, कनार्टक में ज्यादा की जाती है. तो आइए जानते है कि धनिया की खेती कैसे की जाती है.

जलवायु

इसकी खेती शुष्क और ठंडे मौसम में अच्छी रहती है. धनिया को पाला रहित मौसम की जरुररत होती है. इसलिए धनिया को खुली धूप की आवश्यकता होती है.

भूमि

धनिया की खेती सभी तरह की मिट्टी में हो सकती है. अगर खेती में जैविक खाद का उपयोग किया है तो अच्छे जल निकास वाली अच्छी दोमट भूमि अच्छी मानी जाती है. तो वहीं असिंचित फसल के लिये काली भारी भूमि ठीक रहती है.

खेत की तैयारी

सबसे पहले खेत को जोतकर मिट्टी को भुरभुरा बना लें. इसके बाद आखिरी जुताई में करीब 15 से 20 टन गोबर या कम्पोस्ट की सड़ी खाद खेत में डाल दें.

उन्नत किस्में

धनिया की कई किस्में आती है. किसान भाई उन्नत किस्म का चयन कर सकते है जो भूमि के लिए उपयुक्त हो.

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बुवाई का समय

धनिया बोने के लिए सबसे अच्छा समय अक्टूबर से नवम्बर का माह रहता है. इसके अलावा हरे पत्तों की फसल के लिये अक्टूबर से दिसम्बर में बुवाई करनी चाहिए.

बुवाई की विधि

धनिया की बुवाई पंक्तियों में करना ज्यादा लाभदायक होता है.  कूड में बीज की गहराई करीब 2 से 4 सेंटीमीटर तक रखें. धनिया के  बीज को अधिक गहराई पर बोने से अंकुरण कम होता है.

सिंचाई

धनिया की खेती में सबसे पहली सिंचाई लगभग 30 से 35 दिन बाद करनी चाहिए. जब फसल में पत्तियां बनने लगे. दूसरी सिंचाई लगभग 50 से 60 दिन बाद करनी चाहिए. जब शाखा निकलने लगे. तो वहीं तीसरी सिंचाई लगभग 70 से 80 दिन बाद यानि फूल आने पर करें. चौथी सिंचाई लगभग 90 से 100 दिन यानी बीज बनने पर कर दें. पांचवी सिंचाई लगभग 105 से 110 दिन बाद कर दें. जब दाना पकने लगे.

फसल कटाई

जब धनिया की पत्तिया पीली औऱ  धनिया डोड़ी का रंग चमकीला भूरा या पीला होने लगे और दानों में लगभग 18 प्रतिशत नमी हो. तब फसल की कटाई कर देनी चाहिए.  ध्यान रहे कि अगर फसली की कटाई वक्त पर नहीं हुई, तो दानों का रंग खराब होने लगता है. इसके बाद धनिया के छोटे-छोटे बंडल बना लें और 1 से 2 दिन तक खेत में खुली धूप में सूखाए.

पैदावार

धनिया की अच्छी पैदावार किस्म, मौसम और फसल की देखभाल पर निर्भर है. अगर धनिया की खेती वैज्ञानिक तकनीक से की गई है, तो सिंचित फसल से लगभग 15 से 20 क्विंटल बीज और असिंचित फसल लगभग 7 से 9 क्विंटल उपज प्रति हेक्टेयर प्राप्त कर सकते है.

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