1. Home
  2. ख़बरें

राजस्थान के 700 से अधिक किसान जुड़े ‘मां दंतेश्वरी हर्बल समूह’ से, बस्तर मॉडल की राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी स्वीकार्यता!

राजस्थान के 700 से अधिक जैविक किसानों ने कोंडागांव स्थित “मां दंतेश्वरी हर्बल समूह” से जुड़कर बस्तर मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दी है. किसानों ने काली मिर्च, हर्बल फसलें और नेचुरल ग्रीनहाउस जैसे नवाचारों का अध्ययन किया. यह पहल जैविक खेती, प्राकृतिक कृषि, तकनीकी सहयोग और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.

विवेक कुमार राय

असमय वर्षा और लगातार बढ़ती गर्मी के बीच बस्तर की धरती से कृषि क्षेत्र के लिए एक अत्यंत उत्साहजनक और ऐतिहासिक खबर सामने आई है. राजस्थान से आए 700 से अधिक प्रगतिशील जैविक किसानों के उच्चाधिकार प्राप्त प्रतिनिधिमंडल ने कोंडागांव स्थित “मां दंतेश्वरी हर्बल फार्म एवं रिसर्च सेंटर” का विस्तृत अध्ययन करने के बाद “मां दंतेश्वरी हर्बल समूह” की सदस्यता स्वीकार कर ली है. इसे देश में जैविक, हर्बल एवं मसाला खेती के क्षेत्र में किसान-आधारित राष्ट्रीय नेटवर्क के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है.

राजस्थान के अलावा उड़ीसा तथा महाराष्ट्र से पहुंचे प्रगतिशील किसानों ने भी इस दौरान बस्तर में विकसित जैविक एवं प्राकृतिक खेती के विविध मॉडलों का गंभीर अध्ययन किया. प्रतिनिधिमंडल ने पूरे दिन फार्म पर विकसित काली मिर्च, स्टीविया, सफेद मूसली, हर्बल एवं मसाला फसलों, प्राकृतिक नवाचारों तथा किसानों के साथ मिलकर विकसित किए गए खेती मॉडल को निकट से देखा और समझा.

विशेष रूप से यहां विकसित की गई उच्च उत्पादकता वाली काली मिर्च की विशेष किस्म ने किसानों का ध्यान आकर्षित किया. फार्म में विकसित “मां दंतेश्वरी ब्लैक पेपर-16” ऐसी उन्नत किस्म बताई गई, जो सामान्य भारतीय किस्मों की तुलना में कई गुना अधिक उत्पादन देने की क्षमता रखती है तथा कम सिंचाई में भी गर्म क्षेत्रों में सफलतापूर्वक विकसित की जा सकती है. किसानों ने इसे भविष्य की मसाला खेती के लिए अत्यंत संभावनाशील मॉडल बताया.

इसके साथ ही “नेचुरल ग्रीनहाउस” मॉडल भी प्रतिनिधिमंडल के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा. पेड़ों और प्राकृतिक संरचनाओं के सहारे विकसित इस अभिनव मॉडल को प्लास्टिक आधारित महंगे पॉलीहाउस का पर्यावरण-अनुकूल और कम लागत वाला विकल्प माना जा रहा है. किसानों को बताया गया कि जहां सामान्य पॉलीहाउस पर प्रति एकड़ लगभग 40 लाख रुपये तक की लागत आती है, वहीं यह प्राकृतिक ग्रीनहाउस मॉडल अत्यंत कम लागत में अधिक टिकाऊ और प्रकृति-सम्मत समाधान प्रस्तुत करता है.

भ्रमण के पश्चात आयोजित विशेष बैठक में प्रतिनिधिमंडल ने सामूहिक चर्चा के बाद भविष्य में “मां दंतेश्वरी हर्बल समूह” के साथ मिलकर कार्य करने का निर्णय लिया. इसके अंतर्गत राजस्थान के ये सैकड़ों किसान अब जैविक, हर्बल एवं मसाला खेती के क्षेत्र में उत्पादन, तकनीकी सहयोग, प्रशिक्षण और मार्केटिंग तक साझा रणनीति के तहत कार्य करेंगे.

विशेषज्ञों का मानना है कि वीरता, संघर्षशीलता और अद्भुत जीवटता के लिए प्रसिद्ध राजस्थान के किसानों का बस्तर के जैविक एवं हर्बल खेती मॉडल से जुड़ना कृषि क्षेत्र में नए प्रयोगों और अनुभवों के आदान-प्रदान को नई दिशा देगा. इससे देश में टिकाऊ खेती, प्राकृतिक कृषि और किसानों की आय वृद्धि को भी मजबूती मिलने की संभावना है.

इस अवसर पर प्रसिद्ध कृषि नवप्रवर्तक, पर्यावरणविद् तथा Dr. Rajaram Tripathi ने कहा कि किसानों को नई तकनीकों, विज्ञान और वैज्ञानिक सोच से जुड़ना चाहिए, लेकिन उससे भी अधिक आवश्यक यह है कि सफल किसानों के अनुभवों से सीखने की विनम्रता समाज और कृषि व्यवस्था में बनी रहे.

उन्होंने कहा, “वर्षों तक धरती पर पसीना बहाकर खेती करने वाले किसानों का अनुभव किसी भी प्रयोगशाला से कम महत्वपूर्ण नहीं होता. खेत की मिट्टी से निकला अनुभव कई बार बड़ी-बड़ी प्रयोगशालाओं से भी अधिक सच्चा और उपयोगी सिद्ध होता है.”

ज्ञात हो कि बस्तर स्थित “मां दंतेश्वरी हर्बल फार्म एवं रिसर्च सेंटर” पिछले कई वर्षों से जैविक खेती, हर्बल फसलों, प्राकृतिक कृषि नवाचारों तथा आदिवासी किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रहा है. देश के विभिन्न राज्यों से किसान, कृषि विशेषज्ञ और शोधकर्ता यहां लगातार अध्ययन एवं प्रशिक्षण हेतु पहुंच रहे हैं.

English Summary: Rajasthan farmers join Maa Danteshwari Herbal Group bastar model gains national recognition Published on: 21 May 2026, 01:59 PM IST

Like this article?

Hey! I am विवेक कुमार राय. Did you liked this article and have suggestions to improve this article? Mail me your suggestions and feedback.

Share your comments

हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें. कृषि से संबंधित देशभर की सभी लेटेस्ट ख़बरें मेल पर पढ़ने के लिए हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें.

Subscribe Newsletters

Latest feeds

More News