भारत की रसोई में तेल की अहम भूमिका होती है इसके बिना खाने में स्वाद नहीं आता और भारतीय रसोई में खाना बनाने में तेल की अहम भूमिका है. साथ ही अलग-अलग राज्यों में पारंपरिक तौर पर सरसों के तेल और तिल के तेल का इस्तेमाल किया जाता है. दोनों ही तेल अपने-अपने पोषक तत्वों और विशेष गुणों के लिए जाने जाते हैं. ऐसे में अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि रोजाना खाना बनाने के लिए कौन-सा तेल ज्यादा फायदेमंद है. आइए जानते हैं दोनों तेलों की खासियत और विशेषज्ञ क्या सलाह देते हैं.
सरसों का तेल क्यों है खास?
उत्तर भारत और पूर्वी भारत के अधिकांश घरों में सरसों का तेल वर्षों से इस्तेमाल किया जा रहा है. इसकी तीखी खुशबू और स्वाद भोजन को अलग पहचान देते हैं. पोषण की दृष्टि से भी यह तेल कई महत्वपूर्ण तत्वों से भरपूर माना जाता है. सरसों के तेल में मोनोअनसैचुरेटेड (MUFA) और पॉलीअनसैचुरेटेड फैटी एसिड (PUFA) अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं. इसके अलावा इसमें ओमेगा-3 और ओमेगा-6 फैटी एसिड भी मौजूद होते हैं, जो हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभदायक माने जाते हैं.
तिल का तेल भी पोषण का खजाना
तिल का तेल भारत के दक्षिणी राज्यों सहित कई एशियाई देशों में काफी लोकप्रिय है. इसका स्वाद हल्का और मेवों जैसा होता है, जिससे कई पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद बढ़ जाता है. तिल का तेल विटामिन E, हेल्दी फैट और शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट्स का अच्छा स्रोत माना जाता है. इसमें मौजूद सेसामिन और सेसामोल जैसे प्राकृतिक यौगिक शरीर को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाने में मदद कर सकते हैं. यही वजह है कि इसे कोशिकाओं की सुरक्षा और समग्र स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है.
दोनों तेलों में क्या है अंतर?
सरसों और तिल का तेल दोनों ही स्वास्थ्यवर्धक माने जाते हैं, लेकिन इनके स्वाद, खुशबू और पोषण प्रोफाइल में कुछ अंतर होता है. सरसों का तेल तीखे स्वाद और तेज खुशबू वाला होता है, जबकि तिल के तेल का स्वाद हल्का और नटी फ्लेवर लिए होता है. सरसों का तेल भारतीय मसालेदार व्यंजनों के लिए बेहतर माना जाता है, वहीं तिल का तेल हल्के स्वाद वाले भोजन और पारंपरिक दक्षिण भारतीय व्यंजनों में अधिक इस्तेमाल किया जाता है. पोषण की बात करें तो दोनों तेलों में हेल्दी फैट मौजूद होते हैं. सरसों का तेल ओमेगा फैटी एसिड का अच्छा स्रोत है, जबकि तिल का तेल एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन E की वजह से विशेष महत्व रखता है.
किन बातों का रखें ध्यान?
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तेल का इस्तेमाल हमेशा सीमित मात्रा में करें.
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बहुत अधिक बार एक ही तेल को गर्म करके दोबारा उपयोग करने से बचें.
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संतुलित आहार और नियमित शारीरिक गतिविधि के साथ ही किसी भी तेल का लाभ मिलता है.
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यदि आपको हृदय रोग, उच्च कोलेस्ट्रॉल या अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, तो डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह के अनुसार तेल का चुनाव करें.
लेखक: रवीना सिंह
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