आज के समय में किसान खेती रासायनिक तरीकों से बड़े पैमाने पर कर रहे हैं और इससे उनकों फसल से अच्छा उत्पादन भी प्राप्त हो रहा है. इसी के चलते सरकार देश के किसान बहन-भाइयों को प्राकृतिक खेती करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है, ताकि किसान की खेत की मिट्टी की सेहत भी ठीक रहें और फसलों से अच्छी उपज भी मिलती रहे और लोग स्वास्थ्य भी रहे. ऐसे में केंद्र सरकार किसानों को प्राकृतिक खेती करने के लिए 4,000 रुपये प्रति एकड़ तक सब्सिडी भी मुहैया करा रही है.
कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने क्या कहां?
किसानों के खेती में सुधार करने के उद्देश्य से लोकसभा में चर्चा हुई की प्राकृतिक खेती करने से किसानों की खेती से मिलने वाले उत्पादन और खेती की मिट्टी की सेहत में क्या सुधार होगा, तो इसी क्रम में कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा में एक लिखित तौर पर बताया की प्राकृतिक खेती मिशन के तहत किसानों को अनुदान भी मिलेगा और यह सहायता किसानों को 2 साल तक दी जाएगी.
कितने राज्यों में प्राकृतिक खेती पर अध्ययन हुआ?
प्राकृतिक खेती को लेकर राज्य मंत्री ने यह जानकारी दी की आईसीएआर ने वर्ष 2020-21 में अखिल भारतीय प्राकृतिक कृषि नेटवर्क कार्यक्रम के अंतर्गत प्राकृतिक खेती को लेकर अध्ययन आरंभ किया गया था और यह अध्ययन करीब देश के 16 राज्यों में किया जा रही है, जिसमें शामिल है-
-
11 राज्य कृषि विश्वविद्यालय
-
8 आईसीएआर संस्थान
-
एक डीम्ड विश्वविद्यालय
इस अध्ययन के माध्यम से किसान को प्राकृतिक खेती करने के लाखों अच्छे परिणामों को समझाया जाएगा.
नीति आयोग की रिपोर्ट क्या मूल्यांकन है?
किसानों को सरकार प्राकृतिक खेती करने के लिए प्रोत्साहित भी कर रही है और साथ ही किसानों को प्राकृतिक खेती करने से क्या लाभ होंगे इसका गहन अध्ययन भी कर रही है. इसी के चलते नीति आयोग की मूल्यांकन रिपोर्ट के भी सकारात्मक परिणाम सामने आए है. आपको बता दे कि रिपोर्ट के अनुसार 91.2 प्रतिशत किसानों के फसल से मिलने वाली उपज में भी बढ़ोतरी हुई है और साथ ही खेत की मिट्टी की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ है.
योजना में क्या लाभ मिलेगा?
केंद्र सरकार किसानों को इस सरकारी योजना के तहत प्रति एकड़ प्रति वर्ष 4,000 रुपये तक सहायता मुहैया कराई जाएगी. साथ बता दी की सरकार यह सहायता किसानों को 2 सालों तक ही प्रदान करेंगी और किसान इस सरकारी अनुदान का लाभ केवल एक एकड़ भूमि पर ही लें सकेंगे.
लेखक: रवीना सिंह
Share your comments