एग्जोटिक झींगा मुनाफे का व्यापार

आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों के किसान अब धान की खेती से मुंह मोड़ कर झींगापालन की ओर  मुड रहे हैं | झींगे की एग्जोटिक ब्रीड को लिटोपेनियस वनामेई कहा जाता है |हाल के दिनों में किसानों का रुझान एग्जोटिक झींगा पालन की ओर ज्यादा हो रहा है जिससे आंध्र प्रदेश से होने वाले सी फ़ूड एक्सपोर्ट में राज्य की हिस्सेदारी 45% तक पहुँच गई है| हाल ही में एक आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में धान की पैदावार 10 फीसदी घटी है और ऐसा ज्यादातर तटीय इलाकों में हो रहा है और किसानों का रुझान झींगा पालन की ओर ज्यादा हो रहा है |आंध्र प्रदेश राइस रिसर्च इंस्टीच्यूट के डायरेक्टर डॉ पि सत्यनारायण के मुताबिक धान के मुकाबले झींगा पालन में पांच गुना ज्यादा आमदनी होती है और इसमें ज्यादा लेबर की जरुरत नहीं होती |
झींगा पालन में मुख्य रूप से वेस्ट गोदावरी के तटीय जिलों कृष्णा ,नेल्लोर, प्रकाशम् और गुंटूर में हो रहा है | इससे मतस्य पालन का रकबा ..1,22,916 हेक्टेयर पहुँच गया है |मरीन प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेव्लोपमेंट अथोरिटी के चेयरमैन ए जयतिलक ने कहा की एग्जोटिक  झींगे के  व्यवसाय में लागत के अनुसार तीसरे साल से ही मुनाफा मिलने लगता है और ये तटीय किसानों के आय के लिये अच्छा विकल्प सिद्ध हो रहा है|   

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