बाजरे की खेती मुख्य रुप से खरीफ सीजन में यानी की बरसात के मौसम में की जाती है. साथ ही इस फसल की बुवाई का सबसे उत्तम समय जून से जुलाई के महीनों को माना जाता है. अगर इस खरीफ सीजन किसान भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) द्वारा विकसित पूसा श्रृंखला की इन टॉप 3 उन्नत किस्म को अपनाते है तो ये उनके लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकती हैं. इनमें पूसा कम्पोजिट 612, पूसा कम्पोजिट 701 और पूसा 1201 (संकर) प्रमुख हैं.
1. पूसा कम्पोजिट 612
पूसा कम्पोजिट 612 को वर्ष 2015 में किसानों के लिए जारी किया गया था. यह किस्म विशेष रूप से महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु के किसानों के लिए उपयुक्त मानी जाती है. इसे खरीफ मौसम में वर्षा आधारित तथा सिंचित दोनों परिस्थितियों में सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है.
यह किस्म किसानों को लगभग 80 दिनों में औसतन 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन देने की क्षमता रखती है. इसकी एक प्रमुख विशेषता यह है कि यह द्वि-उद्देश्यीय (अनाज एवं चारा) उपयोग के लिए उपयुक्त है. साथ ही यह डाउनी मिल्ड्यू रोग के प्रति प्रतिरोधी होने के कारण किसानों को रोग प्रबंधन पर कम खर्च करना पड़ता है.
2. पूसा कम्पोजिट 701
बाजरे की यह किस्म पूसा कम्पोजिट 701 उत्तर भारत के किसानों के लिए एक उन्नत विकल्प है. यह किस्म राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और दिल्ली में खेती के लिए अनुशंसित है. अगर किसान इस किस्म का चुनाव करते हैं तो वह लगभग 80 दिनों में इस फसल को तैयार कर 23.5 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं.
इस किस्म की सबसे बड़ी विशेषता इसका उच्च लौह (48 पीपीएम) और जिंक (41 पीपीएम) स्तर है, जिससे यह पोषण की दृष्टि से भी बेहतर मानी जाती है. इसके अलावा यह डाउनी मिल्ड्यू रोग के प्रति उच्च प्रतिरोधी है, जिससे फसल सुरक्षित रहती है और उत्पादन में स्थिरता बनी रहती है.
3. पूसा 1201 (संकर)
बाजरे की यह किस्म सिंचित खेती में अधिक उत्पादन देने वाली किस्म है यदि किसान सिंचित क्षेत्रों में अधिक उत्पादन प्राप्त करना चाहते हैं, तो पूसा 1201 (संकर) एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है. इस संकर किस्म को वर्ष 2018 में विकसित किया गया था और इसे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (दिल्ली) के लिए अनुशंसित किया गया है. साथ ही किसान इस किस्म को लगभग 80 दिनों में तैयार कर इससे 28.1 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज प्राप्त कर सकते हैं.
पूसा 1201 की खास बात यह है कि यह डाउनी मिल्ड्यू और ब्लास्ट दोनों प्रमुख रोगों के प्रति उच्च प्रतिरोधी है. इसके अलावा इसमें 55 पीपीएम लौह और 48 पीपीएम जिंक पाया जाता है, जिससे यह पोषण की दृष्टि से भी उत्कृष्ट मानी जाती है.
किस्म का चयन करते समय इन बातों का रखें ध्यान
बाजरे की किस्म का चयन हमेशा स्थानीय जलवायु, सिंचाई की उपलब्धता और मिट्टी की प्रकृति को ध्यान में रखकर करना चाहिए. यदि खेत वर्षा पर निर्भर है तो वर्षा आधारित परिस्थितियों के लिए अनुशंसित किस्मों को प्राथमिकता दें, जबकि सिंचित क्षेत्रों में अधिक उत्पादन देने वाली संकर किस्में बेहतर परिणाम दे सकती हैं.
साथ ही प्रमाणित बीज का उपयोग, संतुलित उर्वरक प्रबंधन, समय पर बुवाई और रोग-कीटों की नियमित निगरानी से इन किस्मों की पूरी उत्पादन क्षमता प्राप्त की जा सकती है.
लेखक: रवीना सिंह
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