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प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की विकास दर को दो अंकों में ले जाने का प्रण लिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आर्थिक विकास को 10 प्रतिशत से अधिक करने के लिए वचन लिया है। और विलोपन को अधिक समावेशी और सही आर्थिक असंतुलन बनाने के लिए एक रोड़मैप तैयार किया है। मोदी ने कहा कि दुनिया को उम्मीद है कि भारत जल्द ही दोगुनी रफ्तार से अपने जीडीपी को 5 ट्रिलियन तक पहुंचाएगा।

पॉलिसी थिंक टैंक की आधिकारिक परिषद की चौथी बैठक में अपनी उद्घाटन टिप्पणी में आधिकारिक तिमाही में 7.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करने के बाद चुनौती अब विकास दर को बढ़ाने की है। जिसके लिए कई और महत्वपूर्ण कदम उठाए जाने अभी बाकी है।

नया आर्थिक विकास लक्ष्य संरचनात्मक सुधारों के कार्यान्वयन का पालन करता है जैसे कि खराब ऋण से निपटने के लिए माल और सेवाओं कर और दिवालियापन कोड के माध्यम से एक एकल बाजार बनाना

वेदांत कैरिन तेल और गैस के सुधीर माथुर मुख्य कार्यकारी अधिकारी के मुताबिक उद्योग के अधिकारियों को मानना है कि सही नीति समर्थन के साथ दोगुनी रफ्तार से  वृद्धि हो सकती है। आर्थिक विकास को बढ़ावा देने, विनिर्माण, बढ़ावा देने के लिए ऊर्जा की सही लागत आवश्यक है

मोदी के संदेश ने ग्रामीण आबादी के लाभ के लिए सभी कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी और त्वरित कार्यान्वयन के अगले वर्ष की शुरुआत में राष्ट्रीय चुनाव से पहले अपने अंतिम वर्ष में प्राथमिकता देने का भी संकेत दिया।

बैठक में कुछ गैर-बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री ने कृषि ऋण छूट योजनाओं से वित्तीय सहायता मांगने और कुछ 15 वें वित्त आयोग को दिए गए जनादेश में विरोध करने का दावा किया  जिसमें उनका दावा है कि पसंदीदा राज्य जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने में असफल रहा।

मोदी ने 2022 तक एक आकस्मिक और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था को हासिल करने के लिए प्रमुख बिंदुओं पे काम करने पर जोर दिया। जिसमें किसानों की आमदनी को दोगुना कर दिया गया, पिछड़े जिलों के विकास कि गति तेज करना,प्रस्तावित स्वास्थ्य बीमा योजना को कार्यान्वित किया जो 100 मिलियन परिवारों को 5 लाख रुपये वार्षिक स्वास्थ्य कवर देगी, बच्चों का टीकाकरण और पोषण के स्तर को बढ़ाने आदि लक्षय शामिल है।

मोदी ने आर्थिक असंतुलन को दूर करने की आवश्यकता पर जोर दिया और सुझाव दिया कि मानव विचलन के सभी मानको पर देश भर में को 115 पिछड़े जिले के रूप में पहचाने गए क्षेत्रो में तेज़ सुधार की आवश्यकता है।

 

भानु प्रताप
कृषि जागरण



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