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केवीके वैशाली के केला प्रोसेसिंग मॉडल को राष्ट्रीय पहचान, कुमारी नम्रता को मिला सर्वश्रेष्ठ पोस्टर अवार्ड

केवीके वैशाली की कुमारी नम्रता को केला प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन के जरिए ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर उत्कृष्ट शोध के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया. इस मॉडल से महिलाओं की आय, उद्यमिता और रोजगार बढ़े हैं, जबकि फसल की बर्बादी घटाकर कृषि को लाभकारी बनाने की दिशा में नई मिसाल स्थापित हुई.

रामजी कुमार

बिहार के वैशाली जिले में केला प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की पहल अब राष्ट्रीय स्तर पर मिसाल बन गई है. कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), वैशाली की विषय वस्तु विशेषज्ञ (कृषि अभियांत्रिकी) कुमारी नम्रता को डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (आरपीसीएयू), पूसा में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में 'सर्वश्रेष्ठ पोस्टर प्रस्तुति पुरस्कार' से सम्मानित किया गया. यह सम्मान महिला सशक्तिकरण, कृषि उद्यमिता और मूल्य संवर्धन के क्षेत्र में किए गए नवाचारों की राष्ट्रीय स्तर पर मिली बड़ी पहचान माना जा रहा है.

कुमारी नम्रता ने "बिहार के वैशाली जिले में केला प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन के माध्यम से महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण में भूमिका" विषय पर अपना शोध पोस्टर प्रस्तुत किया. पोस्टर में दर्शाया गया कि कैसे केले जैसी शीघ्र नष्ट होने वाली फसल को प्रसंस्करण के माध्यम से आर्थिक अवसर में बदलकर ग्रामीण महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों (SHGs), किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) और छोटे किसानों के लिए स्थायी आय का स्रोत बनाया जा सकता है.

कटाई के बाद होने वाले नुकसान को बनाया रोजगार का अवसर

वैशाली देश के प्रमुख केला उत्पादक क्षेत्रों में शामिल है. हर वर्ष बड़ी मात्रा में केले की फसल कटाई के बाद खराब हो जाती है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. केवीके वैशाली ने इसी चुनौती को अवसर में बदलते हुए महिलाओं को केला चिप्स, केला आटा, केला कुकीज़, केला जैम और केला फिग जैसे मूल्य संवर्धित उत्पाद तैयार करने का प्रशिक्षण दिया.

शोध के अनुसार प्रसंस्करण तकनीक अपनाने से न केवल फसल की बर्बादी कम हुई बल्कि महिलाओं के लिए स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार और उद्यमिता के नए रास्ते भी खुले.

प्रशिक्षण से उद्यमिता तक का सफल मॉडल

पोस्टर में वैशाली जिले के कुतुबपुर दुमरी गांव की अनु कुमारी की सफलता की कहानी भी प्रस्तुत की गई. केवीके से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद उन्होंने केला प्रसंस्करण इकाई स्थापित की. वर्ष 2025 में उन्होंने प्रतिदिन लगभग एक क्विंटल क्षमता वाली इकाई शुरू की, एमएसएमई के तहत पंजीकरण कराया और प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) के तहत मशीनरी पर अनुदान भी प्राप्त किया.

आज उनका उद्यम स्थानीय महिलाओं को रोजगार देने के साथ-साथ बाजार में गुणवत्तापूर्ण उत्पाद उपलब्ध करा रहा है.

350 से अधिक महिलाओं को मिला प्रशिक्षण

केवीके वैशाली द्वारा अब तक 350 से अधिक महिलाओं, 25 से अधिक स्वयं सहायता समूहों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है. इसके परिणामस्वरूप 15 से अधिक नए उद्यम स्थापित हुए हैं और 100 से अधिक लोगों के लिए रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं.

शोध में यह भी सामने आया कि प्रशिक्षण के बाद महिलाओं का तकनीकी ज्ञान बढ़ा, उत्पादों की विविधता में वृद्धि हुई, घरेलू आय में 50 से 150 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई तथा बाजार से जुड़ाव मजबूत हुआ. साथ ही कटाई के बाद होने वाले नुकसान में उल्लेखनीय कमी आई.

राष्ट्रीय सम्मेलन में मिली सराहना

यह राष्ट्रीय सम्मेलन 27 से 29 जून तक डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा एवं इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ एक्सटेंशन एजुकेशन (INSEE) के संयुक्त तत्वावधान में "कृषि-खाद्य प्रणाली में महिलाओं की भूमिका का पुनर्परिभाषण सतत कृषि विकास हेतु प्रसार रणनीतियाँ" विषय पर आयोजित किया गया था.

सम्मेलन के समापन समारोह में विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पी. एस. पांडे ने कुमारी नम्रता को प्रशस्ति-पत्र एवं स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया. इस अवसर पर देशभर से आए कृषि वैज्ञानिकों, प्रसार विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं ने वैशाली मॉडल को महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण उद्यमिता का प्रभावी उदाहरण बताया.

महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार काम

केवीके वैशाली के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. अनिल कुमार सिंह के नेतृत्व में केंद्र लगातार महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण युवाओं को खाद्य प्रसंस्करण, गुणवत्ता नियंत्रण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, एफएसएसएआई मानकों तथा उद्यमिता विकास का प्रशिक्षण दे रहा है.

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मॉडल को अन्य केला उत्पादक जिलों में भी अपनाया जाए तो किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ ग्रामीण महिलाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर सृजित किए जा सकते हैं. केला केवल एक फल नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का माध्यम भी बन सकता है. वैशाली का यह मॉडल दिखाता है कि वैज्ञानिक तकनीक, स्थानीय संसाधनों और महिला शक्ति के समन्वय से कृषि को लाभकारी उद्यम में बदला जा सकता है. कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने, मूल्य संवर्धन बढ़ाने और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में यह पहल देश के अन्य कृषि क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणादायी उदाहरण है.

English Summary: KVK Vaishali banana processing model wins national award for women empowerment and value addition Published on: 06 July 2026, 04:54 PM IST

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