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40 वर्षों के गौरवशाली "वाग्धारा- सम्मान" के सर्वोच्च "जीवन गौरव सम्मान" से मुंबई में सम्मानित हुए डॉ. राजाराम त्रिपाठी.
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राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने मंच से कोंडागांव स्थित मां दंतेश्वरी हर्बल फार्म आने की घोषणा की.
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डॉ. त्रिपाठी ने चेताया, खेती लाभकारी नहीं बनी तो भारत खाद्य आयात पर निर्भर हो जाएगा.
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मुंबई में लगातार बारिश के बावजूद देशभर की विभूतियों से खचाखच भरा रहा मुक्ति ऑडिटोरियम.
साहित्य, संस्कृति और सामाजिक चेतना के क्षेत्र में चार दशकों से उल्लेखनीय कार्य कर रही संस्था 'वाग्धारा' तथा राष्ट्रीय समाचार नेटवर्क 'भारत एक्सप्रेस' के संयुक्त तत्वावधान में मुंबई के अंधेरी स्थित मुक्ति ऑडिटोरियम में 'वाग्धारा सम्मान समारोह 2026' का भव्य आयोजन सम्पन्न हुआ. विगत पाँच दिनों से मुंबई में लगातार हो रही मूसलाधार वर्षा के बावजूद देश के विभिन्न राज्यों से आए साहित्य, कला, कृषि, विज्ञान, पत्रकारिता और समाजसेवा जगत की विभूतियों तथा नागरिकों से सभागार खचाखच भरा रहा.
समारोह के मुख्य अतिथि तेलंगाना के राज्यपाल महामहिम शिव प्रताप शुक्ल ने देश की नौ विशिष्ट विभूतियों को सम्मानित किया. इस वर्ष का सर्वोच्च सम्मान 'वाग्धारा जीवन गौरव सम्मान 2026' देश के प्रख्यात जैविक कृषि विशेषज्ञ, पर्यावरणविद्, साहित्यकार, जनजातीय विकास के प्रबल पक्षधर तथा मां दंतेश्वरी हर्बल समूह के संस्थापक डॉ. राजाराम त्रिपाठी को प्रदान किया गया. प्राकृतिक एवं जैविक खेती, कृषि नवाचार, किसानों की आय वृद्धि, जनजातीय सशक्तिकरण और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया.
सम्मान ग्रहण करने के पश्चात अपने संबोधन में डॉ. राजाराम त्रिपाठी ने कहा कि आज खेती और किसानों की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है. युवा तेजी से खेती से विमुख हो रहे हैं और देश का पेट भरने की जिम्मेदारी 45 से 70 वर्ष आयु वर्ग के बुजुर्ग किसान निभा रहे हैं. उन्होंने कहा कि विश्व की सर्वाधिक जनसंख्या वाले भारत में प्रतिवर्ष लगभग 3 लाख करोड़ रुपये मूल्य के खाद्य तेल, दाल, मसाले और मेवों का आयात हो रहा है. यदि समय रहते खेती को लाभकारी नहीं बनाया गया तो आने वाले वर्षों में देश की नई पीढ़ियों को भरपेट भोजन के लिए भी आयात पर निर्भर होना पड़ सकता है.
उन्होंने कहा कि खेती की लागत 50 प्रतिशत तक कम करने तथा किसानों की आय कई गुना बढ़ाने के सफल और व्यावहारिक मॉडल आज भी देश में मौजूद हैं. इन्हें समझने के लिए उन्होंने महामहिम राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल सहित सभी विशिष्ट अतिथियों को बस्तर के कोंडागांव स्थित मां दंतेश्वरी हर्बल फार्म एवं अनुसंधान केंद्र आने का आमंत्रण दिया.
डॉ. राजाराम त्रिपाठी की इस चिंता को गंभीरता से स्वीकार करते हुए महामहिम राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि किसानों और खेती को लेकर व्यक्त की गई चिंता पूरी तरह उचित है. उन्होंने कहा कि इस विषय पर पूरे देश को गंभीरता से विचार करना होगा तथा ठोस कदम उठाने होंगे. इसी दौरान उन्होंने मंच से घोषणा की कि वे शीघ्र ही बस्तर के कोंडागांव स्थित मां दंतेश्वरी हर्बल फार्म का दौरा करेंगे और वहां विकसित प्राकृतिक खेती, कम लागत तथा अधिक आय वाले कृषि मॉडलों का प्रत्यक्ष अवलोकन करेंगे. समारोह का यह क्षण उपस्थित जनसमूह की जोरदार तालियों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बना.
समारोह में वरिष्ठ अभिनेता रजा मुराद तथा हिंदी मराठी के सुप्रसिद्ध अभिनेता सचिन खेडेकर को 'वाग्धारा नवरत्न सम्मान' से सम्मानित किया गया. इसके अतिरिक्त पश्चिम रेलवे के सीपीआरओ विनीत अभिषेक को 'नेपाल सिंह स्मृति रेल सेवा सम्मान', वरिष्ठ पत्रकार डॉ. धनंजय बोस, भाषा सेतु के लिए डॉ. नामदेव गोडा, लोककला के लिए शिवगुरुन शुक्ल, समाजसेवा के लिए डॉ. आलोक सोनी, मानव कल्याण एवं न्याय के लिए पूर्व न्यायाधीश श्रीमती स्वाति चौहान तथा संगीत साधना के लिए डॉ. स्मृति त्रिपाठी को भी उनके-अपने क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया.
डॉ. राजाराम त्रिपाठी ने अपना 'वाग्धारा जीवन गौरव सम्मान 2026' बस्तर की पावन माटी, बस्तर के जनजातीय समाज, मां दंतेश्वरी हर्बल समूह के सभी सहयोगियों तथा अपने परिवारजनों को समर्पित किया.
समारोह में भारत एक्सप्रेस के सीएमडी एवं एडिटर-इन-चीफ उपेंद्र राय, वाग्धारा के अध्यक्ष गौरीशंकर सारस्वत, कार्यकारी अध्यक्ष श्रीमती दुर्गेश्वरी सिंह 'मेहक', सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष आचार्य पवन त्रिपाठी, चयन समिति के अध्यक्ष जयंत देशमुख, प्रसारक समिति के अध्यक्ष सर्वदीप शर्मा, महासचिव एडवोकेट भार्गव तिवारी सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही. कार्यक्रम का प्रभावी संचालन अरविंद शर्मा 'राही' एवं रवि यादव ने संयुक्त रूप से किया.
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