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कृषि अनुसंधान परिसर, पटना में सामूहिक धान रोपनी: वैज्ञानिक खेती, श्रम सम्मान और टीमवर्क का संदेश

आईसीएआर के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना में वैज्ञानिकों, अधिकारियों, कर्मचारियों और किसानों ने सामूहिक धान रोपनी कर वैज्ञानिक खेती, श्रम सम्मान और टीमवर्क का संदेश दिया. कार्यक्रम में कम वर्षा की चुनौती, धान की सीधी बुआई, सूखा सहिष्णु किस्मों तथा आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने पर विशेष जोर दिया गया.

KJ Staff

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना में दिनांक 10 जुलाई 2026 को  सामूहिक धान रोपनी कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें संस्थान के वैज्ञानिकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने किसानों के साथ खेत में उतरकर धान की रोपनी की. कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कृषि कार्यों के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना, किसानों के श्रम का सम्मान करना तथा वैज्ञानिकों, अधिकारियों, कर्मचारियों और किसानों के बीच बेहतर समन्वय एवं टीम वर्क की भावना को सुदृढ़ करना था. इस सामूहिक सहभागिता ने यह संदेश दिया कि कृषि विकास तभी संभव है, जब वैज्ञानिक समुदाय और किसान एक टीम के रूप में मिलकर कार्य करें.

इस अवसर पर संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास ने कहा कि धान पूर्वी भारत और बिहार की प्रमुख खरीफ फसल है और वर्तमान में वर्षा सामान्य से कम होने के कारण किसानों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने बताया कि राज्य में अब तक लगभग 90 प्रतिशत धान की नर्सरी तैयार हो चुकी है, जबकि लगभग 12 प्रतिशत क्षेत्र में धान की रोपनी का कार्य संपन्न हुआ है. वर्षा की कमी के कारण रोपनी की गति अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच सकी है, फिर भी किसान उपलब्ध संसाधनों के साथ खेती कार्यों को आगे बढ़ा रहे हैं.

डॉ. दास ने कहा कि बदलती जलवायु परिस्थितियों और अनिश्चित मानसून को ध्यान में रखते हुए संस्थान  द्वारा किसानों के बीच धान की सीधी बुआई तकनीक को बढ़ावा दिया जा रहा है. यह तकनीक कम पानी, कम श्रम और कम लागत में धान उत्पादन का प्रभावी विकल्प प्रदान करती है. उन्होंने किसानों को कम अवधि वाली सूखा सहिष्णु उन्नत धान किस्मों, जैसे स्वर्ण श्रेया तथा स्वर्ण पूर्वी धान-3 को अपनाने की सलाह दी.

उन्होंने धान उत्पादन में वैज्ञानिक तकनीकों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बेहतर उत्पादन के लिए नर्सरी प्रबंधन, कतारबद्ध रोपाई, संतुलित उर्वरक एवं जल प्रबंधन, खरपतवार नियंत्रण तथा समेकित फसल प्रबंधन अपनाना आवश्यक है. उन्होंने रोपाई के लिए उपयुक्त आयु की पौध (सीडलिंग) के उपयोग पर विशेष बल देते हुए कहा कि इन वैज्ञानिक विधियों से उत्पादन लागत घटती है और उत्पादकता बढ़ती है. संस्थान के मीडिया सदस्य सचिव श्री उमेश कुमार मिश्र ने बताया कि धान  रोपनी के दौरान महिला किसानों ने पारंपरिक लोकगीत गाए, जिससे कार्यक्रम का वातावरण जीवंत और उत्साहपूर्ण हो उठा.

English Summary: ICAR eastern research campus Patna community paddy transplanting scientific farming teamwork Published on: 10 July 2026, 04:11 PM IST

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