मोतिहारी के पतौरा गाँव में किसानों के बीच संतुलित उर्वरक उपयोग एवं हरित खाद को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक किसान जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग के महत्व, अत्यधिक रासायनिक खादों के दुष्प्रभावों तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के उपायों के प्रति जागरूक करना था।
कार्यक्रम के दौरान वैज्ञानिकों ने किसानों को बताया कि लगातार असंतुलित रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति में कमी आ रही है, जिससे फसल उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने किसानों को ढैंचा को हरित खाद के रूप में अपनाने की सलाह दी तथा इसके माध्यम से मिट्टी की संरचना में सुधार, जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा में वृद्धि तथा उर्वरक लागत में कमी जैसे लाभों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि ढैंचा जैसी हरित खादें न केवल मृदा की गुणवत्ता को बेहतर बनाती हैं, बल्कि रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता को भी कम करती हैं, जिससे खेती अधिक टिकाऊ एवं पर्यावरण-अनुकूल बनती है। साथ ही, किसानों को ढैंचा की वैज्ञानिक खेती के बारे में जैसे बुवाई का समय, बीज दर, उचित अवस्था में पलटाई तथा हरित खाद के प्रभावी उपयोग की व्यावहारिक जानकारी भी प्रदान की गई।
कार्यक्रम के दौरान किसानों के बीच 60 किलोग्राम ढैंचा बीज का वितरण किया गया। लगभग 60 किसानों ने भाग लेकर मृदा स्वास्थ्य, पोषक तत्व प्रबंधन एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की।
यह कार्यक्रम संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास के मार्गदर्शन में तथा डॉ. मणिभूषण, डॉ. राकेश कुमार एवं श्री एस. महापात्रा की सक्रिय भागीदारी से आयोजित किया गया। किसानों ने इस प्रकार के उपयोगी कार्यक्रमों की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाने की अपेक्षा व्यक्त की।
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