डेयरी फार्मिंग देश के किसानों और पशुपालकों के लिए ऐसा बिजनेस बन चुका है, जिससे किसान से लेकर पशुपालक अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं. इसी क्रम में केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय गोकुल मिशन (Rashtriya Gokul Mission) की शुरुआत की है, जो किसानों और पशुपालकों के लिए किसी वरदान से कम नहीं. सरकार ने इस सरकारी योजना की शुरुआत इसलिए की है, ताकि स्वदेशी नस्लों में सुधार कर दूध उत्पादन में रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोतरी की जा सकें.
नस्ल सुधार पर खास फोकस
राष्ट्रीय गोकुल मिशन का मुख्य उद्देश्य देशी गायों की जेनेटिक क्वालिटी को बेहतर बनाना है. लंबे समय से किसान कम दूध उत्पादन और कमजोर नस्लों की समस्या से जूझते रहे हैं. अब सरकार उच्च गुणवत्ता वाले सीमन, कृत्रिम गर्भाधान (AI) और आईवीएफ जैसी आधुनिक तकनीकों के जरिए इस समस्या का समाधान कर रही है.
विशेषज्ञों के अनुसार, इन तकनीकों से तैयार होने वाली नई पीढ़ी की गायें अधिक दूध देने के साथ-साथ बीमारियों के प्रति भी ज्यादा प्रतिरोधक क्षमता रखती हैं. इससे किसानों का खर्च कम होता है और मुनाफा बढ़ता है.
गोकुल ग्राम बन रहे गेमचेंजर
योजना के तहत देशभर में गोकुल ग्राम स्थापित किए जा रहे हैं, जहां स्वदेशी पशुओं के संरक्षण और संवर्धन पर काम किया जा रहा है. ये केंद्र पशुपालकों को ट्रेनिंग, बेहतर नस्ल के पशु और आधुनिक डेयरी प्रबंधन की जानकारी उपलब्ध कराते हैं, ताकि गांव स्तर पर इन सुविधाओं के पहुंचने से किसानों को महंगे पशु खरीदने की जरूरत नहीं पड़े. वे अपने ही संसाधनों से बेहतर डेयरी यूनिट तैयार कर सकते हैं.
सब्सिडी और लोन से मिल रही है मदद
सरकार इस मिशन के तहत आर्थिक मदद भी दे रही है. डेयरी उद्यमिता विकास योजनाओं के जरिए किसानों को नई डेयरी यूनिट लगाने या पुरानी यूनिट का विस्तार करने के लिए सब्सिडी भी दी जा रही है. साथ ही इस योजना में खास बात यह है कि एससी-एसटी और महिला पशुपालकों को अतिरिक्त लाभ दिया जा रहा है. इसके अलावा, जो किसान ब्रीडिंग फार्म शुरू करना चाहते हैं, उन्हें बड़े स्तर पर वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है.
इसके अलावा, किसानों को दूध की क्वालिटी जांचने के लिए छोटे स्तर पर मशीनरी लगाने के लिए भी आर्थिक सहायता दी जा रही है.
आसान आवेदन प्रक्रिया
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सरकार ने योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन प्रक्रिया को भी सरल बनाया है. इच्छुक किसान पशुपालन विभाग की वेबसाइट या नजदीकी पशु चिकित्सा केंद्र पर जाकर आवेदन कर सकते हैं.
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आवेदन के दौरान पशुओं की जानकारी, आधार और बैंक खाते का विवरण देना होता है. इसके बाद सब्सिडी की राशि सीधे किसानों के खाते में ट्रांसफर कर दी जाती है.
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इसके अलावा, गांवों में समय-समय पर कैंप लगाए जाते हैं, जहां पशुओं का पंजीकरण (INAPH), टीकाकरण और टैगिंग की सुविधा मुफ्त में दी जाती है.
लेखक: रवीना सिंह
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