खुदरंग शायर : जॉन एलिया

अभी इक शोर सा उठा है कहीं

कोई ख़ामोश हो गया है कहीं

है कुछ ऐसा कि जैसे ये सब कुछ

इस से पहले भी हो चुका है कहीं

जो यहाँ से कहीं न जाता था

वो यहाँ से चला गया है कहीं

आज शमशान की सी बू है यह

क्या कोई जिस्म जल रहा है कहीं

 तू मुझे ढूँड, मैं तुझे ढूँडूँ

कोई हम में से रह गया है कहीं

जॉन एलिया

Comments