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छुईमुई या लाजवंती का पौधा करेगा रोगों का कारगर इलाज, जानें इसके आयुर्वेदिक गुण

कंचन मौर्य
कंचन मौर्य
Chui Mui Plant

Chui Mui Plant

आप सभी ने छुईमुई या लाजवंती (Chui Mui or Lajwanti Plant) का पौधा जरूर देखा होगा. यह एक संवेदनशील पौधा है, जिसे छूने से उसकी पत्तियां सिकुड़ जाती हैं. इसे कई नामों से जाना जाता है जैसे, छुईमुई, लाजवंती या शर्मीली.  

छुईमुई का वानस्पतिक नाम माईमोसा पुदिका है. छुईमुई की पत्तियों में एंटीवायरल और एंटीफंगल गुण मौजूद होते हैं, इसलिए इसके इस्तेमाल से कई गंभीर बीमारियों का इलाज किया जाता है. इस लेख में पढ़ें छुईमुई या लाजवंती (Chui Mui or Lajwanti Plant)  के बारे में अधिक जानकारी.

छुईमुई या लाजवंती का औषधीय इस्तेमाल (Medicinal use of  Chui Mui or Lajwanti )

आयुर्वेद में छुईमुई को जड़ी बूटी के रूप में प्रयोग किया गया है. इसके पौधे कांटेदार होते हैं, साथ ही जमीन से लगभग 2 से 3 फीट ऊपर उठने वाले होते हैं. इसकी पत्तियां गहरे हरे रंग की होती हैं, जो कि इमली की पत्तियों के समान दिखती हैं. इस पौधे में फूल और फल भी लगते हैं. आइए जानते हैं कि छुईमुई के इस्तेमाल से क्या-क्या फायदे होते हैं.

डायबिटीज में छुईमुई का इस्तेमाल (Chui Mui Plant for Diabetes)

इस समस्या में छुईमुई की पत्तियां शरीर में बढ़े हुए ब्लड शुगर के स्तर को कम करने के लिए लाभकारी हैं. इसके लिए छुईमुई की 100 ग्राम पत्तियों को 300 मिलीलीटर पानी में डालें. अब तेज आंच पर उबालकर काढ़ा बनाएं. इस काढ़े का सेवन करने से डायबिटीज की समस्या दूर होती है.

बवासीर में छुईमुई का इस्तेमाल (Chui Mui Plant for Piles)

बवासीर की समस्या ज्यादा मसालेदार या तीखा खाना खाने से होती है. अगर आप बवासीर से राहत पाना चाहते हैं, तो छुईमुई या लाजवंती के पौधे का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके लिए छुईमुई के पत्तों को सुखा लें, फिर इसका चूर्ण बनाएं. इसके बाद एक चम्मच चूर्ण को एक गिलास दूध में मिलाकर सुबह शाम पीएं . ऐसा नियमित रूप से करने पर बवासीर और अर्श की समस्या में राहत मिलेगी.

डायरिया की समस्या में छुईमुई का इस्तेमाल (Chui Mui Plant for Diarrhea)

अगर किसी को खूनी दस्त या पेचिश की समस्या है, तो उसे छुईमुई या लाजवंती की पत्तियों का इस्तेमाल करना चाहिए. इसके लिए मरीज को छुईमुई की पत्तियों का अर्क बनाकर पीना चाहिए. इसके अलावा खूनी दस्त की रोकथाम करने के लिए मरीज छुईमुई के पौधे की जड़ का चूर्ण बनाकर लगभग 3 ग्राम चूर्ण दही के साथ खा सकते है.

इससे खूनी दस्त की समस्या तुरंत खत्म हो जाएगी. बता दें कि आदिवासी इलाकों में इसकी जड़ों का काढ़ा बनाकर खूनी दस्त की समस्या का समाधान किया जाता है.

अस्थमा में छुईमुई का इस्तेमाल (Chui Mui Plant for Asthama)

अस्थमा के लिए छुईमुई को बहुत असरदार माना गया है. इसमें कफ को खत्म करने के गुण पाए जाते हैं. इसके लिए पौधे के अर्क का सेवन करना है, जिससे अस्थमा की समस्या में फायदा होगा. मगर इसका उपयोग करने से पहले किसी आयुर्वेदाचार्य से सलाह जरूर लें.

पीलिया में छुईमुई का इस्तेमाल (Chui Mui Plant for Jaundice)

पीलिया एक ऐसी बीमारी है, जिसका अगर समय पर इलाज न किया जाए, तो मरीज की जान भी जा सकती है. इस समस्या में शरीर में खून की कमी और कमजोरी हो जाती है. ऐसे में छुईमुई के पौधों के इस्तेमाल से पीलिया की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है.  इसके लिए छुईमुई की पत्तियों का रस निकाल लें, फिर नियमित रूप से मरीज को दें. ऐसा  लगभग 1 हफ्ते तक करने से असर दिखाई देगा.

इसके अलावा छुईमुई या लाजवंती का इस्तेमाल ब्लड प्रेशर, बालों से जुड़ी समस्याएं, शारीरिक कमजोरी आदि में भी किया जाता है. यह जंगली और पहाड़ी इलाकों में आसानी से उगने वाला पौधा है.

मूत्र संबंधी समस्या में छुईमुई का इस्तेमाल (Chui Mui Plant for Urinary Problem) 

अगर आपको अत्यधिक मात्रा में मूत्र होने की समस्या है, तो आप छुईमुई का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके लिए छुईमुई के पत्तों को जल में पीसकर ब्लडर पर लेप करने से मूत्रातिसार में लाभ होता है.

खाँसी में छुईमुई का इस्तेमाल (Chui Mui Plant for Cough)

अगर आपको मौसम बदलाव की वजह से खांसी की समस्या हो जाती है, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है. आप छुईमुई से खांसी का इलाज कर सकते हैं. इसके लिए छुईमुई की जड़ को गले में बाँध लें. इससे खाँसी में लाभ होता है. 

(यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है. अगर आप इसका सेवन करना चाहते हैं, तो एक बार आयुर्वेदिक एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें.)

English Summary: characteristic of the chui mui or lajwanti plant

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