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नाइट्रोजनयुक्त जैव उर्वरक: नाइट्रोजन प्रबंधन का एक सतत समाधान

नाइट्रोजनयुक्त जैव उर्वरक ऐसे लाभकारी सूक्ष्मजीव हैं जो वायुमंडलीय नाइट्रोजन को पौधों के लिए उपलब्ध कराते हैं. इनके उपयोग से रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है, मृदा स्वास्थ्य सुधरता है और उत्पादन लागत घटती है. राइजोबियम, एजोटोबैक्टर, एजोस्पिरिलम एवं एजोला जैसे जैव उर्वरक सतत कृषि, पर्यावरण संरक्षण और बेहतर फसल उत्पादकता के लिए प्रभावी समाधान हैं.

KJ Staff
benefits of nitrogen biofertilizers
Benefits of Nitrogen Biofertilizers

नाइट्रोजन पौधों की वृद्धि एवं फसल उत्पादकता के लिए आवश्यक प्रमुख पोषक तत्वों में से एक है. परंतु यूरिया जैसे रासायनिक नाइट्रोजन उर्वरकों के लगातार और अत्यधिक उपयोग से मृदा स्वास्थ्य में गिरावट, उर्वरक उपयोग दक्षता में कमी, उत्पादन लागत में वृद्धि तथा पर्यावरण प्रदूषण जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं. जैव उर्वरक फसलों को नाइट्रोजन उपलब्ध कराने का एक वैकल्पिक स्रोत हो सकते हैं.

जैव उर्वरक ऐसे जीवित सूक्ष्मजीवों से युक्त उत्पाद हैं, जो प्राकृतिक जैविक प्रक्रियाओं के माध्यम से पौधों को पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ाते हैं. जब इन्हें बीज, पौध या मिट्टी में प्रयोग किया जाता है, तो ये लाभकारी सूक्ष्मजीव जड़ क्षेत्र (राइजोस्पीयर) में स्थापित होकर पोषक तत्वों के अवशोषण, पौध वृद्धि तथा मृदा उर्वरता में सुधार करते हैं. नाइट्रोजनयुक्त जैव उर्वरक ऐसे लाभकारी सूक्ष्मजीव हैं जो वायुमंडलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण कर उसे पौधों के लिए उपलब्ध कराते हैं. इससे रासायनिक नाइट्रोजन उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है तथा मृदा स्वास्थ्य में सुधार होता है.

डॉ. धीरज कुमार सिंह, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं डॉ. उज्ज्वल कुमार, प्रभागाध्यक्ष , भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना
डॉ. धीरज कुमार सिंह, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं डॉ. उज्ज्वल कुमार, प्रभागाध्यक्ष , भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना

नाइट्रोजन जैव उर्वरक क्यों?

भारत में नाइट्रोजनयुक्त उर्वरकों, विशेषकर यूरिया, की खपत बहुत अधिक है. किंतु फसलें प्रयुक्त नाइट्रोजन का केवल 30–35 प्रतिशत ही उपयोग कर पाती हैं, जबकि शेष नाइट्रोजन लीचिंग, वाष्पीकरण तथा डिनाइट्रीफिकेशन जैसी प्रक्रियाओं द्वारा नष्ट हो जाती है. इससे पर्यावरण प्रदूषण, उत्पादन लागत में वृद्धि तथा लाभप्रदता में कमी आती है. अध्ययनों से ज्ञात हुआ है कि फसल एवं प्रबंधन पद्धतियों के अनुसार जैव उर्वरकों के उपयोग से 20–50 किलोग्राम नाइट्रोजन प्रति हेक्टेयर तक की बचत की जा सकती है.

नाइट्रोजनयुक्त जैव उर्वरक निम्न प्रकार से लाभकारी हैं:

  • वायुमंडलीय नाइट्रोजन का प्राकृतिक रूप से स्थिरीकरण करते हैं.

    • उर्वरकों पर होने वाले खर्च को कम करते हैं.

    • उर्वरक उपयोग दक्षता में वृद्धि करते हैं.

    • मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता बनाए रखते हैं.

    • अत्यधिक उर्वरक उपयोग से होने वाले पर्यावरण प्रदूषण को कम करते हैं.

    • बदलती जलवायु परिस्थितियों में सतत कृषि उत्पादन को बढ़ावा देते हैं.

प्रमुख नाइट्रोजनयुक्त जैव उर्वरक

नाइट्रोजन स्थिरीकरण के लिए विभिन्न फसलों में अनेक प्रकार के नाइट्रोजन आधारित जैव उर्वरकों का उपयोग किया जा सकता है. कुछ प्रमुख नाइट्रोजन जैव उर्वरकों, उपयुक्त फसलों तथा उनके कार्यों का विवरण निम्नलिखित है:

क्र. सं.

जैव उर्वरक

उपयुक्त फसलें

कार्य

1

राइजोबियम (Rhizobium)

दलहनी फसलें (दालें, सोयाबीन, मूंगफली)

जड़ों में गांठें बनाकर सहजीवी रूप से वायुमंडलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करता है

2

एजोटोबैक्टर (Azotobacter)

गेहूँ, मक्का, सब्जियाँ, कपास, गन्ना

गैर-दलहनी फसलों में स्वतंत्र रूप से नाइट्रोजन स्थिरीकरण करता है

3

एजोस्पिरिलम (Azospirillum)

अनाज, मोटे अनाज एवं घास वर्गीय फसलें

सहचारी नाइट्रोजन स्थिरीकरण एवं पौध वृद्धि को प्रोत्साहित करता है

4

नील-हरित शैवाल (Blue-Green Algae) एवं एजोला (Azolla)

धान के खेत

जलभराव की स्थिति में नाइट्रोजन स्थिरीकरण करते हैं

प्रयोग की विधियाँ एवं मात्रा

जैव उर्वरकों के प्रयोग की तीन प्रमुख विधियाँ हैं: बीज उपचार, पौधों की जड़ों को घोल में डुबोना तथा मिट्टी में प्रयोग.

  1. बीज उपचार

यह विधि मुख्यतः उन फसलों के लिए उपयुक्त है जिनमें नर्सरी की आवश्यकता नहीं होती, जैसे – दलहन, मोटे अनाज, गेहूँ, मक्का आदि.

अनुशंसित मात्रा: 10 किलोग्राम बीज के लिए 200–250 ग्राम जैव उर्वरक.

विधि:

  • 1 लीटर पानी में 200 ग्राम गुड़ मिलाकर घोल तैयार करें.

    • इस घोल में जैव उर्वरक मिलाकर लेप (स्लरी) तैयार करें.

    • बीजों पर इस लेप को समान रूप से लगाएँ तथा छाया में सुखाकर बुवाई करें.

 

  1. पौधों की जड़ों को घोल में डुबोना (Seedling Root Dip)

यह विधि मुख्यतः रोपाई वाली फसलों जैसे धान, सब्जियाँ, टमाटर, प्याज आदि में उपयोग की जाती है.

विधि:

  • 20–25 लीटर पानी में 1–2 किलोग्राम जैव उर्वरक मिलाएँ.

    • रोपाई से पूर्व पौधों की जड़ों को 20–30 मिनट तक इस घोल में डुबोकर रखें.

  1. मिट्टी में प्रयोग (Soil Application)

इस विधि में जैव उर्वरक को कम्पोस्ट या गोबर की सड़ी हुई खाद (एफ.वाई.एम.) के साथ मिलाकर खेत में समान रूप से बिखेरा जाता है.

सामान्य मात्रा: 2–5 किलोग्राम जैव उर्वरक प्रति हेक्टेयर.

जैव उर्वरकों के उपयोग में सावधानियाँ

  • फसल-विशिष्ट एवं ताज़ी जैव उर्वरक कल्चर का उपयोग करें.

    • इन्हें ठंडी एवं छायादार जगह पर संग्रहित करें.

    • प्रयोग के समय रासायनिक कीटनाशकों अथवा फफूंदनाशकों के साथ न मिलाएँ.

    • बेहतर परिणाम हेतु नम मिट्टी की स्थिति में प्रयोग करें.

निष्कर्ष

नाइट्रोजनयुक्त जैव उर्वरक रासायनिक नाइट्रोजन उर्वरकों पर निर्भरता कम करने, मृदा स्वास्थ्य में सुधार लाने, उत्पादन लागत घटाने तथा पर्यावरण के अनुकूल तरीके से फसल उत्पादकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. यदि इनका उपयोग अनुशंसित विधियों के अनुसार किया जाए, तो यह सतत कृषि विकास की दिशा में एक प्रभावी समाधान सिद्ध हो सकते हैं.

लेखकगण : डॉ. धीरज कुमार सिंह, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं डॉ. उज्ज्वल कुमार, प्रभागाध्यक्ष
               भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना

English Summary: benefits of nitrogen biofertilizers in sustainable agriculture Published on: 04 June 2026, 06:20 PM IST

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