किसानों को खेती करते समय कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, जैसे बारिश, ओला, बाढ़ जैसी समस्या जिससे किसानों की मेहनत पर पानी फिर जाता यानी की उनको भारी नुकसान का सामना करना पड़ता और यह आर्थिक परेशानी किसानों की इनकम पर भी बड़ा प्रभाव डालती है. इसी को देखते हुए सरकार ने फसल बीमा योजना चलाई, ताकि इस योजना की मदद से किसानों को कुछ आर्थिक सुरक्षा मिल सकें.
हांलाकि योजना का लाभ सिर्फ फसल खराब होने पर नहीं दिया जाता है, बल्कि सरकार ने इस योजना के लिए कुछ नियम तय किए हुए है. ऐसे में अगर इन नियमों शर्तों का पालन नहीं किया जाता है, तो फसल नुकसान का लाभ नहीं मिलता है.
किसानों को किन फसलों पर फसल बीमा मिलता है?
केंद्र सरकार दुवारा शुरु की गई फसल बीमा योजना किसानों के लिए एक सुरक्षा कवच है. सरकार इस योजना के तहत खाद्य फसलें है, जिनमें भारी फसल बीमा कवर प्रदान करती है, जिनमें अनाज, बाजरा और दालें शामिल हैं, तिलहन साथ ही वार्षिक वाणिज्यिक और वार्षिक बागवानी फसलों को बीमा कवर में शामिल किया गया है. साथ ही यह बीमा राशि किसानों को प्रति हेक्टेयर तय वित्तमान के आधार पर मिलती है. इससे यह लाभ होता है कि किसानों को आर्थिक बोझ का सामना नहीं करना पड़ता है.
किन किसानों को योजना का फायदा नहीं मिलता?
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ सभी किसानों को नहीं मिलता है यानी की किसानों को इन नियमों और शर्तों के हिसाब से योजना का लाभ मिलता है इस प्रकार-
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अगर किसान फसल खराब होने की सूचना समय पर नहीं देते हैं तो वह किसान इस योजना से वंचित हो सकते हैं.
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किसानों का जरूरी डॉक्यूमेंट्स में नाम या दूसरी जानकारी का मिलान नहीं होता तो भी योजना का फायदा नहीं मिलता.
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अगर किसान बीमा में दर्ज फसल की जगह दूसरी फसल बोते हैं या बैंक खाते से जुड़ी जरूरी जानकारी सही नहीं देते हैं तो दावा अटक या खारिज भी किया जा सकता है.
किन प्राकृतिक आपदाओं मिलता है योजना का फायदा?
अगर आप इस योजना में शामिल है और इस बात की बिल्कुल भी जानकारी नहीं है कि किन प्राकृतिक आपदा पर मुआवजा मिलता है, तो घबराएं नहीं इन आपदाओं पर योजना का फायदा मिलता है, जिनमें आग और बिजली गिरना, तूफान, ओलाबारिश, चक्रवात, आंधी और बवंडर जैसे जोखिम शामिल हैं.
इसके अलावा बाढ़, जलभराव, भूस्खलन, सूखा, कीट और बीमारियों के कारण होने वाले फसल नुकसान पर भी किसानों को फसल बीमा योजना के तहत आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है.
लेखक: रवीना सिंह
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