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नया शोध: गेहूं और चावल से कम हुए ये 2 पोषक तत्व, जानिए क्या है कारण

कंचन मौर्य
कंचन मौर्य
Agriculture News

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इंसान की तीन मुलभूत आवश्यकताएं रोटी, कपड़ा और मकान है. अगर बात रोटी की करें, तो पौष्टिक तत्वों की पूर्ति के लिए रोटी और चावल रोज की भोजन की थाली में शामिल होते है, पर क्या आप जानते है आपके भोजन की थाली से पोषक तत्व गायब होते जा रहे है, गेहूं और चावल में से आवश्यक पोषक तत्व जिंक और आयरन कम हो गये है, इसलिए बहुत से लोग शरीर में जिंक और आयरन की कमी से जूझ रहे है. इस बारे में आप सबके जानने योग्य एक नई रिसर्च रिपोर्ट आई है, तो रोटी और चावल पर हुए शोध के बारे में पढ़िए कृषि जागरण का विशेष लेख-

रोटी और चावल पर नई रिसर्च (New research on roti and rice)

यह माना जाता है कि चावल की खेती करीब 10 हजार वर्ष पहले शुरू हुई थी, जो अब दुनिया के तीन अरब से अधिक लोगों के भोजन का एक अभिन्न हिस्सा बन चुका है. लेकिन कृषि वैज्ञानिकों ने पाया है कि चावल में आवश्यक पोषक तत्वों का घनत्व अब उतना नहीं है, जितना कि 50 साल पहले खेती से प्राप्त चावल में होता था. इस रिसर्च में बताया गया है कि अब गेहूं और चावल की पौष्टिकता में बहुत कमी आई है. इस रिसर्च को एनवायरमेंट एंड एक्सपेरिमेंटल बॉटनी (Environmental and Experimental Botany) जर्नल में प्रकाशित किया गया है. इस रिसर्च को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (Indian Council of Agricultural Research) और बिधानचंद्र कृषि विश्वविद्यालय (Bidhan Chandra Agricultural University) के मार्गदर्शन  में कई संस्थाओं ने पूरा किया है. शोधकर्ताओं ने गेहूं की 18 और चावल की 16 किस्मों को आईसीएआर-नेशनल राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट, चिनसुराह राइस रिसर्च स्टेशन और आईसीएआर-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ व्हीट एंड बार्ले रिसर्च से एकत्रित किया है.

रिसर्च में लगे 2 साल (2 years in research)

गेहूं और चावल के बारे में की गयी इस शोध पर वर्ष 2018 से 2020 के दौरान 2 सालों तक काम किया गया. इसके लिए सैंपल्स को शोध संस्थानों से जुटाया गया फिर गमलों में लगाया गया. शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन के लिए एकत्रित किए गए बीजों को प्रयोगशाला में अंकुरित किया, गमलों में बोया और फिर बाहरी वातावरण में रखा. सभी बीजों की बुवाई के लिए सात किलो मिट्टी की क्षमता वाले मिट्टी के गमलों का चयन किया. बीजों की बुवाई के लिए ऐसी मिट्टी का चयन किया, जिसमें पोषक तत्वों की कमी न रहे, पौधों को आवश्यक उर्वरकों से उपचारित किया .

50 सालों में कम हुई जिंक और आयरन की मात्रा (The amount of zinc and iron decreased in 50 years)

दो साल तक बुवाई और हार्वेस्ट करने के बाद विश्लेषण करने पर निष्कर्ष निकला कि  1960 के दशक में जारी चावल की किस्मों के अनाज में जिंक और आयरन का घनत्व 27.1 मिलीग्राम / किलोग्राम और 59.8 मिलीग्राम / किलोग्राम था.  यह मात्रा वर्ष 2000 के दशक में घटकर क्रमशः 20.6 मिलीग्राम/किलोग्राम और 43.1 मिलीग्राम/किलोग्राम हो गई. रिसर्च में यह भी बताया है कि 1900 के बाद के दशक में मिट्टी में जिंक और आयरन, दोनों मिलाने से फसल पर कोई असर नहीं पड़ा है. शोध में वैज्ञानिकों ने पाया है कि पिछले 50 वर्षों में जिंक और आयरन की मात्रा में बहुत कमी आई है.  किसान उत्पादन बढ़ाने के लिए जिंक और आयरन की ज्यादा मात्रा का उपयोग करते है,  जिससे उपज तो बढ़ी लेकिन पोषण तत्व की कमी हो गई है.  साथ ही 1990 के बाद विकसित गेहूं और धान की नई किस्में जिंक और आयरन की कमी पूरा करने में सक्षम नहीं हैं, इसलिए इनपर ध्यान देने की जरूरत है.

गेहूं और चावल में दो पोषक तत्वों की कमी (Two Nutrient Deficiencies in Wheat and Rice)

इस शोध में पाया गया कि गेहूं और चावल में जिंक व आयरन की कमी है. अगर गेहूं और चावल में ऐसे ही जिंक और आयरन की कमी हुई, तो लोगों को दूसरे विकल्प भी तलाशने पड़ सकते हैं. अगर शरीर में इन दोनों तत्वों की पूर्ति नहीं होती है, तो आपको इनकी  गोलियां भी खानी पड़ सकती हैं. हमारे शरीर के लिए जिंक और आयरन की उचित मात्रा जरूरी है क्योकि इनकी कमी से होते है रोग. आगे पढ़ें जिंक और आयरन के फायदों के बारे में और उनकी कमी से शरीर में होने वाले रोगों के बारे में -

जिंक के फायदे (Benefits of zinc)

शरीर को मजबूत बनाने के लिए जिंक बहुत फायदेमंद  होता है. इससे रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, साथ ही जिंक कैंसर कोशिका से लड़ने में मदद करता है. अगर शरीर में जिंक की अत्यधिक कमी हो, तो रोगप्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है.

आयरन के फायदे (Benefits of iron)

आयरन यानी लौह तत्व शरीर में हीमोग्लोबीन बनाने में मदद करता है. हीमोग्लोबीन हमारे रक्त का वह हिस्सा है, जो सभी कोशिकाओं तक ऑक्सीजन पहुंचाता है. इसकी कमी से एनीमिया, थकान, सांस की कमी, हृदय और फेफड़ो से सम्बंधित रोग हो जाते हैं.

क्या है वजह? (What is the reason?)

  • शोधकर्ता  इसकी एक वजह यह मानते हैं कि एक ही साथ में पौध मिट्टी में मौजूदा जिंक और आयरन, दोनों को सोख नहीं पाते हैं. ऐसे में आप मिट्टी में चाहें जितनी जिंक और आयरन मिला दें, वह पौधों तक नहीं पहुंच पाएंगे. अब गेंहू और चावल के नई ब्रीड को कुछ इस तरह तैयार करना होगा कि इनमें सभी जरूरी पौष्टिक तत्व पहुंच सकें.

  • इस तरह की कमी के कई संभावित कारण हो सकते हैं, जैसे ‘कमज़ोर पड़ने वाला प्रभाव’ (Dilution Effect),  जो उच्च अनाज उपज के प्रतिउत्तर में पोषक तत्त्वों की मात्रा में कमी के कारण होता है.

  • इसका अभिप्राय यह है कि उपज में वृद्धि की दर, पौधों द्वारा पोषक तत्त्व ग्रहण करने की दर को क्षतिपूर्ति प्रदान नहीं कर पा रही है.  साथ ही, पौधों को सहारा देने वाली मृदा में पौधों के लिये उपलब्ध पोषक तत्त्व कम हो सकते हैं.

  • खाद्यान्नों में इस तरह की कमी के कई संभावित कारण हो सकते हैं, इनमें से एक 'डाईल्यूशन इफेक्ट' है,  जो अनाज की उच्च उपज की प्रतिक्रिया में पोषक तत्वों के घनत्व में कमी के कारण होता है। इसका मतलब यह है कि उपज में वृद्धि दर की भरपाई पौधों द्वारा पोषक तत्व लेने की दर से नहीं होती है।”

  • गेहूं और धान में इस तरह जिंक और आयरन की कमी के और भी  कई कारण हो सकते हैं  क्योंकि यह जो जिंक और आयरन हैं,  एक-दूसरे से  टकराते हैं,  क्योंकि यह दोनों एक ही जरिए से पौधों में जाते हैं,  तो इसमें यह होता है कि अगर इसमें एक की मात्रा ज्यादा है तो दूसरे को जाने नहीं देगा.  एक तो जिंक और आयरन की मात्रा  में तो कमी आयी ही है,  लेकिन इन दोनों में जो टकराव है वो भी बढ़ गया है, इस समय आप खेत में कितना भी जिंक डाल दें कोई फर्क नहीं पड़ रहा है.

समाधान (Solution)

भविष्य के बीज कार्यक्रमों में किस्मों को जारी करते हुए ‘अनाज आयनोम’, अर्थात पोषण संबंधी पैटर्न में सुधार करके इन नकारात्मक प्रभावों को दूर करने की आवश्यकता है. साथ ही बायोफोर्टिफिकेशन जैसे अन्य विकल्पों पर भी ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है, जिसके द्वारा सूक्ष्म पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य फसलों का उत्पादन किया जा सकता है। आपने जाना गेहूं और चावल में हुई जिंक और आयरन की कमी के बारे में,  कारणों के बारे में और समाधान क्या हो सकते है इस विषय में .  खेती से संबंधित हर जानकारी के लिए जरुर पढ़ें कृषि जागरण के हर लेख और समाचार को हमारी वेबसाइट पर..

English Summary: research shows the lack of 2 essential nutrients in wheat and rice

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