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बिना मृदा स्वास्थ्य कार्ड के लाभ नहीं

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के माध्यम से चलाई जा रही योजनाओं से लाभ उठाने के लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड (एसएसची) का होना अनिवार्य बनाया जा रहा है। कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाली केंद्र सरकार इस दिशा में एक प्रस्ताव लाने जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि मृदा स्वास्थ्य कार्ड पर बुलाए गए सत्र में इस प्रस्ताव पर काफी माथापच्ची हुई और सालाना खरीफ सम्मलेन में भी इस विषय पर चर्चा हुई। अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई तो इसमें पीएम-किसान के तहत मिलने वाले लाभ को भी शामिल किया जा सकता है। पीएम-किसान के तहत सरकार सभी लघु एवं सीमांत किसानों को सालाना 6,000 रुपये की सहायता राशि देती है।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने चुनावी घोषणापत्र में यह योजना सभी किसानों को देने का वादा किया था। सरकार उन सभी किसानों को एक प्रतिशत कैशबैक भी देने के प्रस्ताव की समीक्षा कर रही है, जो स्वास्थ्य कार्ड में सिफारिशों के आधार पर उर्वरक खरीदते हैं।

उर्वरक कंपनियां यह कैशबैक दे सकती हैं और यह उनकी कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) का हिस्सा हो सकता है। अब तक इस योजना में पहले चरण में 2.53 मृदा नमूने एकत्र किए गए और 10.73 करोड़ से अधिक नमूने वितरण किए गए। पहला चरण 2015 से 2017 तक चला। दूसरे चरण की शुरुआत मई 2017 से हुई, जिसमें केंद्र ने 2.73 करोड़ मिट्टी के नमूने एकत्र करने का लक्ष्य रखा था। अब तक 98 प्रतिशत नमूने एकत्र किए जा चुके हैं, जबकि 2.51 करोड़ नमूनों की जांच हो चुकी है। जहां तक कार्ड के वितरण की बात है तो 12.04 करोड़ कार्ड वितरित करने का लक्ष्य रखा गया है, जिनमें करीब 8.47 करोड़ कार्ड वितरित हो गए हैं।  वर्ष 2016-17 में केंद्र ने इस योजना के लिए 133.67 करोड़ रुपये रकम मंजूर की थी, जो 2017-18 में बढ़कर 152.77 करोड़ रुपये हो गई। 2018-19 में यह राशि बढ़कर 237.40 करोड़ रुपये हो गई। 

सौजन्य बिजनस स्टैण्डर्ड 


English Summary: No Benefits of Soil Health Card

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