1. Home
  2. खेती-बाड़ी

मशरूम की खेती: कम जगह में ज्यादा कमाई का मौका, जानिए कैसे करें शुरुआत और कितना चाहिए तापमान

Mushroom Farming: देश में जिस तरह से खेती की लागत बढ़ती जा रही है. किसानों को तलाश रहती है उन फसलों की जिनसे कम लागत में अच्छी इनकम हो सकें. ऐसे में मशरुम की ये उन्नत किस्में किसानों के लिए मुनाफे का सौदा साबित हो सकती है. कैसे आगे इस लेख में जानें..

KJ Staff
mushroom
मशरूम की खेती: कम जगह में ज्यादा कमाई का मौका (Image Source-AI generate)

आज के समय में खेती की लागत में जिस तरह बढ़ोतरी हो रही है और पारंपरिक फसलों से घटते मुनाफे के बीच मशरूम उत्पादन किसानों के बीच आय बढ़ाने का एक बेहतर विकल्प बनकर उभर रहा है. कम जगह, कम समय और अपेक्षाकृत कम निवेश में शुरू होने वाली मशरूम की खेती आज ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में तेजी से लोकप्रिय हो रही है. बाजार में इसकी लगातार बढ़ती मांग और अच्छे दाम किसानों को इस व्यवसाय की ओर आकर्षित कर रहे हैं.

भारत में किन मशरूम की होती है ज्यादा खेती?

देश में मुख्य रूप से तीन प्रकार के मशरूम की व्यावसायिक खेती की जाती है, जिनमें है-

 1. बटन मशरूम

यह भारत में सबसे अधिक लोकप्रिय और बाजार में सबसे ज्यादा बिकने वाला मशरूम है. इसकी मांग होटल, रेस्टोरेंट और प्रोसेसिंग उद्योगों में काफी रहती है.

2. ऑयस्टर मशरूम

ऑयस्टर मशरूम की खेती अपेक्षाकृत आसान मानी जाती है. कम निवेश और कम तकनीकी जटिलता के कारण छोटे और नए किसानों के लिए यह एक अच्छा विकल्प है.

3. मिल्की मशरूम

यह मुख्य रूप से गर्म और आर्द्र क्षेत्रों में उगाया जाता है. दक्षिण भारत सहित कई राज्यों में इसकी खेती तेजी से बढ़ रही है.

मशरूम उत्पादन में तापमान कितना होना चाहिए?

मशरूम की खेती में तापमान और नमी का सही संतुलन बनाए रखना बेहद आवश्यक होता है. अलग-अलग प्रजातियों के लिए तापमान की जरूरत भी अलग होती है.

  • ऑयस्टर मशरूम: 20 से 25 डिग्री सेल्सियस तापमान उपयुक्त माना जाता है.

  • बटन मशरूम: 15 से 24 डिग्री सेल्सियस तापमान सबसे बेहतर रहता है.

  • मिल्की मशरूम: 25 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान में अच्छी वृद्धि करता है.

इसके साथ ही उत्पादन कक्ष में लगभग 80 से 90 प्रतिशत तक नमी बनाए रखना जरूरी होता है.

किन सामग्रियों की होती है जरूरत?

मशरूम उत्पादन शुरू करने के लिए बहुत अधिक संसाधनों की आवश्यकता नहीं होती. किसान निम्नलिखित सामग्री के साथ इसकी शुरुआत कर सकते हैं-

  •  गेहूं या धान का सूखा भूसा

  •  मशरूम स्पॉन (बीज)

  •  पॉलीबैग

  •  पानी की व्यवस्था

  •  तापमान और नमी नियंत्रित करने वाला कमरा या शेड

  •  स्प्रे मशीन

खेती शुरू करने से पहले भूसे को गर्म पानी या रासायनिक विधि से उपचारित किया जाता है ताकि उसमें मौजूद हानिकारक जीवाणु और फफूंद नष्ट हो जाएं. इसके बाद पॉलीबैग में भूसा और स्पॉन की परतें लगाकर बैग बंद कर दिए जाते हैं. करीब 10 से 15 दिनों के भीतर सफेद कवक-जाल (मायसेलियम) पूरे बैग में फैल जाता है और इसके बाद मशरूम निकलना शुरू हो जाते हैं.

कितने दिनों में मिलने लगती है उपज?

मशरूम की खेती का सबसे बड़ा फायदा इसका कम उत्पादन चक्र है. सामान्यतः बुवाई के 15 से 25 दिनों के भीतर पहली तुड़ाई शुरू हो जाती है. इसके बाद 8 से 10 दिनों के अंतराल पर दूसरी और तीसरी तुड़ाई भी की जा सकती है. एक बैग से कई बार उत्पादन प्राप्त होता है, जिससे किसानों की आय बढ़ती है.

कितना हो सकता है उत्पादन?

अगर आप मशरुम की खेती करते हैं तो 1 किलोग्राम सूखे भूसे से औसतन 600 से 650 ग्राम तक मशरूम प्राप्त किया जा सकता है. यदि उत्पादन वैज्ञानिक तरीके से किया जाए तो यह मात्रा और अधिक भी हो सकती है. बाजार में मशरूम की कीमत आमतौर पर 120 से 300 रुपये प्रति किलोग्राम या उससे अधिक तक मिल जाती है. ऐसे में छोटे स्तर पर भी मशरूम उत्पादन किसानों, युवाओं और महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए अच्छा स्वरोजगार साबित हो सकता है.

लेखक: रवीना सिंह

English Summary: Mushroom Cultivation Business Idea High Profit Low Space Farming Published on: 11 June 2026, 04:20 PM IST

Like this article?

Hey! I am KJ Staff. Did you liked this article and have suggestions to improve this article? Mail me your suggestions and feedback.

Share your comments

हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें. कृषि से संबंधित देशभर की सभी लेटेस्ट ख़बरें मेल पर पढ़ने के लिए हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें.

Subscribe Newsletters

Latest feeds

More News