नई दिल्ली स्थित आईसीएआर-एनएएससी कॉम्प्लेक्स, पूसा में 16 और 17 अप्रैल 2026 को आयोजित MIONP 2.0 (Make India Organic & Natural Profitable) सम्मेलन ने भारतीय कृषि के भविष्य को नई दिशा देने का काम किया. कृषि जागरण द्वारा Gujarat Natural Farming Science University (GNFSU), Indian Council of Agricultural Research (ICAR), National Centre for Organic and Natural Farming (NCONF) सहित कई प्रमुख संस्थानों के सहयोग से आयोजित यह दो दिवसीय कार्यक्रम देशभर से आए 600 से अधिक किसानों, एफपीओ, एग्री-स्टार्टअप्स, वैज्ञानिकों और उद्योग विशेषज्ञों का एक प्रभावशाली संगम साबित हुआ.
यह आयोजन केवल एक सम्मेलन नहीं, बल्कि एक ऐसा मंच था जहां जैविक और प्राकृतिक खेती को लाभकारी बनाने के लिए ठोस रणनीतियों, तकनीकों और साझेदारियों पर गंभीर चर्चा हुई. दोनों दिनों के सत्रों ने किसानों के अनुभव, वैज्ञानिक शोध, नीतिगत पहल और उद्योग की भूमिका को एक साथ जोड़ते हुए कृषि क्षेत्र में परिवर्तन का स्पष्ट रोडमैप प्रस्तुत किया.
पहला दिन: 16 अप्रैल 2026 - विचारों और नवाचारों का संगम
कार्यक्रम की शुरुआत गणमान्य अतिथियों के स्वागत और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई. मुख्य अतिथि के रूप में कृषि आयुक्त डॉ. पी.के. सिंह उपस्थित रहे, जबकि विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञों और उद्योग जगत के नेताओं ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई.
उद्घाटन सत्र और प्रमुख संबोधन
कृषि जागरण के संस्थापक एवं प्रधान संपादक एम.सी. डॉमिनिक ने स्वागत भाषण में MIONP के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए कहा कि “भारत को केवल जैविक नहीं, बल्कि लाभकारी प्राकृतिक खेती की दिशा में आगे बढ़ना होगा.”
इसके बाद विभिन्न विशेषज्ञों ने प्राकृतिक खेती के महत्व, इसकी आर्थिक व्यवहार्यता और तकनीकी पक्षों पर प्रकाश डाला. जायडेक्स ग्रुप, फर्टिस इंडिया और अन्य कंपनियों के प्रतिनिधियों ने किसानों के लिए आधुनिक जैविक समाधान प्रस्तुत किए.
किसान परिवर्तन की प्रेरक कहानियां
11:00 बजे से शुरू हुए “Farmer Transition Success Stories” सत्र मेंअनुभव साझा किए कि कैसे किसानों ने पारंपरिक खेती से प्राकृतिक खेती की ओर कदम बढ़ाया और कम लागत में बेहतर उत्पादन हासिल किया.
इन कहानियों ने यह साबित किया कि सही मार्गदर्शन और तकनीक के साथ प्राकृतिक खेती न केवल पर्यावरण के लिए बेहतर है, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने का भी प्रभावी माध्यम बन सकती है.
नई तकनीकों की प्रस्तुति
दोपहर के सत्र में “New Technology Presentations” के तहत कई एग्री-टेक कंपनियों और स्टार्टअप्स ने अपने उत्पाद और समाधान प्रस्तुत किए.
इनमें शामिल थे:
-
माइक्रोबियल सॉल्यूशंस
-
बायोलॉजिकल इनपुट्स
-
मृदा स्वास्थ्य सुधार तकनीक
-
डिजिटल कृषि प्लेटफॉर्म
इन प्रस्तुतियों का उद्देश्य किसानों को आधुनिक और टिकाऊ तकनीकों से जोड़ना था, जिससे उनकी उत्पादकता और लाभ दोनों बढ़ सकें.
उद्योग और नीति का संगम
दोपहर बाद आयोजित विशेष सत्र में नीति निर्माताओं, वैज्ञानिकों और उद्योग प्रतिनिधियों ने मिलकर प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक नीतिगत ढांचे और बाजार अवसरों पर चर्चा की.
इस दौरान फर्टिस इंडिया द्वारा उत्पाद लॉन्च भी किया गया, जिसने जैविक खेती के क्षेत्र में नवाचार को और गति दी.
बी2बी कनेक्ट और नेटवर्किंग
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा B2B Connect Session, जहां किसानों, एफपीओ और कंपनियों के बीच सीधे संवाद और साझेदारी के अवसर बने.
इससे:
-
नए व्यापारिक संबंध स्थापित हुए
-
किसानों को बाजार तक पहुंच के नए रास्ते मिले
-
कंपनियों को जमीनी स्तर की जरूरतों को समझने का अवसर मिला
शाम को आयोजित नेटवर्किंग डिनर ने इस संवाद को और मजबूत बनाया.
पुरस्कार एवं सम्मान समारोह (पहला दिन)
दिन का समापन एक भव्य Awards & Recognition Ceremony के साथ हुआ, जिसमें उन किसानों, एफपीओ और एग्री-उद्यमियों को सम्मानित किया गया जिन्होंने प्राकृतिक खेती को अपनाकर उत्कृष्ट कार्य किया.
दूसरा दिन: 17 अप्रैल 2026 - नीतियों, विज्ञान और किसानों का समन्वय
दूसरे दिन का कार्यक्रम और भी व्यापक और गहन रहा. मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. त्रिलोचन महापात्रा (पीपीवीएफआरए चेयरपर्सन) उपस्थित रहे, जबकि नीति आयोग सहित कई महत्वपूर्ण संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया.
उद्घाटन और उच्चस्तरीय विचार-विमर्श
कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई. इसके बाद:
-
नीति आयोग की कार्यक्रम निदेशक डॉ. नीलम पटेल
-
जीएनएफएसयू के कुलपति
-
एनसीओएफ के निदेशक
ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर चल रही पहलों पर प्रकाश डाला.
प्राकृतिक खेती में सूक्ष्मजीवों की भूमिका
“Role of Microbes in Natural Farming” सत्र में विशेषज्ञों ने बताया कि कैसे सूक्ष्मजीव मृदा की उर्वरता बढ़ाते हैं और रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता को कम करते हैं.
यह सत्र किसानों के लिए अत्यंत उपयोगी रहा क्योंकि इसमें व्यावहारिक तकनीकों पर चर्चा की गई.
एफपीओ और प्राकृतिक खेती का विकास
“Catalysing Growth of Natural Farming in FPOs” विषय पर आयोजित सत्र में यह बताया गया कि एफपीओ कैसे किसानों को संगठित करके:
-
लागत कम कर सकते हैं
-
बाजार तक पहुंच बढ़ा सकते हैं
-
प्राकृतिक उत्पादों के लिए बेहतर मूल्य दिला सकते हैं
प्रमाणीकरण और नीति ढांचा
Natural Farming Certification & Policy Framework सत्र में विशेषज्ञों ने प्राकृतिक उत्पादों के प्रमाणन की प्रक्रिया और सरकार की नीतियों पर विस्तार से चर्चा की.
यह विषय विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहा क्योंकि बाजार में विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए प्रमाणन आवश्यक है.
किसानों की सफलता की कहानियां (दूसरा दिन)
दूसरे दिन भी किसानों ने अपने अनुभव साझा किए, जिनमें:
-
कम लागत में अधिक उत्पादन
-
रसायन मुक्त खेती
-
बाजार में बेहतर मूल्य
जैसे पहलुओं पर जोर दिया गया.
तकनीकी समीक्षा और वैज्ञानिक चर्चा
दोपहर के सत्र में Technical Review Sessions आयोजित किए गए, जहां वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने:
-
तकनीकों की वैधता
-
स्केलेबिलिटी
-
व्यावसायिक संभावनाओं
पर गहन चर्चा की.
सीबीबीओ प्रस्तुतियां और उद्योग सहभागिता
जीएनएफएसयू के सीबीबीओ (Cluster Based Business Organizations) द्वारा प्रस्तुतियों में यह दिखाया गया कि कैसे क्लस्टर आधारित मॉडल किसानों को संगठित करके उनकी आय बढ़ाने में मदद कर सकते हैं.
पुरस्कार एवं सम्मान समारोह (दूसरा दिन)
दूसरे दिन का समापन भी एक प्रतिष्ठित पुरस्कार समारोह के साथ हुआ, जिसमें देशभर के उत्कृष्ट किसानों, एफपीओ और एग्री-उद्यमियों को सम्मानित किया गया.
यह समारोह इस बात का प्रतीक था कि जमीनी स्तर पर हो रहे बदलावों को पहचान और प्रोत्साहन मिल रहा है.
MIONP 2.0: परिवर्तन की दिशा में एक मजबूत कदम
MIONP 2.0 ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत में कृषि का भविष्य प्राकृतिक, टिकाऊ और लाभकारी मॉडल में ही निहित है.
इस कार्यक्रम की मुख्य उपलब्धियां रहीं:
-
किसानों और वैज्ञानिकों के बीच सीधा संवाद
-
नई तकनीकों का प्रदर्शन
-
नीति और उद्योग का एकीकरण
-
बाजार से जुड़ाव के अवसर
-
जमीनी स्तर के नवाचारों को पहचान
दो दिनों तक चले इस सम्मेलन ने यह साबित किया कि यदि सही दिशा, तकनीक और सहयोग मिले, तो भारत के किसान न केवल प्राकृतिक खेती को अपनाने में सक्षम हैं, बल्कि उसे लाभकारी व्यवसाय में भी बदल सकते हैं.
MIONP 2.0 ने एक मजबूत संदेश दिया कि: “भारत को आत्मनिर्भर और टिकाऊ कृषि प्रणाली की ओर बढ़ने के लिए प्राकृतिक खेती को मुख्यधारा में लाना होगा.”
इस प्रकार, यह आयोजन भारतीय कृषि के भविष्य को आकार देने वाला एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ, जिसने किसानों, वैज्ञानिकों और उद्योग के बीच एक मजबूत पुल का निर्माण किया.
Share your comments