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काली-मिर्च की नई किस्म को डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने बताया कृषि का ‘गेम चेंजर’)*
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मां दंतेश्वरी काली मिर्च-16: सामान्य किस्मों से चार गुना तक अधिक उत्पादन क्षमता.
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नेचुरल ग्रीनहाउस मॉडल: ₹40 लाख के पॉलीहाउस का लगभग ₹1.5 से ₹2 लाख में प्राकृतिक विकल्प.
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बस्तर से देश तक जैविक खेती: 34 गांवों के हजारों किसान परिवारों को टिकाऊ कृषि से जोड़ा.
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कृषि नवाचार का राष्ट्रीय मॉडल: डॉ. राजाराम त्रिपाठी के प्रयोगों ने बस्तर को नई कृषि पहचान दिलाई.
छत्तीसगढ़ शासन के ढाई वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर हरिभूमि समाचार पत्र एवं INH 24x7 के संयुक्त तत्वावधान में कोंडागांव में आयोजित ‘जिला संवाद 2026’ में बस्तर और कोंडागांव की विशिष्ट पहचान बनाने वाली संस्था ‘मां दंतेश्वरी हर्बल समूह’ को विशेष सम्मान से नवाजा गया. कार्यक्रम में जिले के विकास, शासन की योजनाओं, उपलब्धियों, चुनौतियों तथा भविष्य की संभावनाओं पर व्यापक संवाद हुआ.
अपनी तरह के इस महत्वपूर्ण जनसंवाद में छत्तीसगढ़ के वन मंत्री केदार कश्यप, विधायक लता उसेंडी, पूर्व मंत्री मोहन मरकाम, विधायक नीलकंठ टेकाम, भाजपा कोंडागांव के जिलाध्यक्ष सेकेराम नेताम, कोंडागांव कलेक्टर नूपुर राशि पन्ना, पुलिस अधीक्षक पंकज चंद्रा तथा डीएफओ चूड़ामणि सिंह सहित जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, किसान, सामाजिक प्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे.
कार्यक्रम में हरिभूमि के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी की विशेष उपस्थिति रही. कार्यक्रम में तीजऊ राम बघेल को लोक कला में विशिष्ट उपलब्धियां के लिए सम्मानित किया गया. इसके अलावा, कोंडागांव की पुलिस के जवानों को तथा पूर्व सैनिकों के संगठन को भी सम्मानित किया गया.
जिले की विशिष्ट पहचान बनाने वाली उपरोक्त चार विभूतियों एवं संस्थानों को दिए गए विशेष सम्मान में मां दंतेश्वरी हर्बल समूह को भी प्रमुख सम्मान प्राप्त हुआ. समूह की ओर से संस्थापक सदस्य शिप्रा त्रिपाठी, अध्यक्ष दसमती नेताम तथा निदेशक अनुराग त्रिपाठी ने सम्मान ग्रहण किया, तथा हरिभूमि समूह को ,बस्तर प्रशासन को तथा बस्तर के सभी जनप्रतिनिधियों को सतत सहयोग हेतु धन्यवाद दिया.
उल्लेखनीय है कि, वर्ष 1996 में डॉ. राजाराम त्रिपाठी द्वारा स्थापित मां दंतेश्वरी हर्बल समूह ने पिछले तीन दशकों में बस्तर की जैविक एवं टिकाऊ खेती को नई पहचान देने का काम किया है. समूह के साथ देशभर के किसान तथा विशेष रूप से बस्तर के 34 गांवों के हजारों किसान परिवार जैविक खेती, औषधीय एवं सुगंधित पौधों, मसालों, कृषि प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन से जुड़े हैं. समूह का मॉडल किसान की आय बढ़ाने के साथ स्थानीय संसाधनों, पर्यावरण संरक्षण और आदिवासी समुदायों की आर्थिक आत्मनिर्भरता को केंद्र में रखता है.
समूह की सबसे चर्चित उपलब्धि ‘मां दंतेश्वरी काली मिर्च-16 (MDBP-16)’ है, जिसे डॉ. राजाराम त्रिपाठी और उनकी टीम ने विकसित किया है. बस्तर जैसे मध्य भारत के अपेक्षाकृत गर्म क्षेत्र में व्यावसायिक स्तर पर काली मिर्च की सफल खेती स्थापित कर इस प्रयोग ने उस धारणा को चुनौती दी कि काली मिर्च की खेती केवल पारंपरिक दक्षिण भारतीय क्षेत्रों में ही संभव है. समूह के अनुसार यह किस्म सामान्य भारतीय किस्मों की तुलना में चार गुना तक अधिक उत्पादन, कम सिंचाई तथा अपेक्षाकृत गर्म और कम वर्षा वाले क्षेत्रों में भी उत्पादन की क्षमता रखती है.
इसकी गुणवत्ता, सुगंध और बाजार संभावनाओं के कारण इसे देश की महत्वपूर्ण उच्च उत्पादक काली मिर्च किस्मों में माना जा रहा है. बस्तर और छत्तीसगढ़ के साथ देश के विभिन्न राज्यों में इसकी खेती का विस्तार हुआ है.
इस उपलब्धि की सराहना करते हुए डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने मां दंतेश्वरी काली मिर्च-16 को बस्तर ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश और देश की कृषि का ‘गेम चेंजर’ बनने की क्षमता वाला नवाचार बताया. उन्होंने समूह के कृषि प्रयोगों और बस्तर को नई कृषि पहचान देने वाले प्रयासों की प्रशंसा की.
मां दंतेश्वरी समूह का दूसरा उल्लेखनीय नवाचार वृक्ष आधारित ‘नेचुरल ग्रीनहाउस’ है. समूह ने लगभग ₹40 लाख प्रति एकड़ की लागत वाले पारंपरिक पॉलीहाउस के मुकाबले लगभग ₹1.5 से ₹2 लाख की लागत में प्राकृतिक वृक्षों पर आधारित मॉडल विकसित किया है. इसमें प्राकृतिक सूक्ष्म जलवायु के निर्माण के साथ जैविक खाद तैयार करने, वर्षाजल के संग्रहण और किसान की अतिरिक्त आय के अवसर भी जुड़ते हैं. इस प्रकार यह मॉडल कम लागत, पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ कृषि को एक साथ जोड़ता है.
डॉ. राजाराम त्रिपाठी स्वयं अखिल भारतीय किसान महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक हैं और कृषि क्षेत्र में अपने नवाचारों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखते हैं. उन्हें देश के अत्यंत शिक्षित किसान-नवप्रवर्तकों में माना जाता है. कृषि क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें छह बार देश के सर्वश्रेष्ठ किसान का सम्मान विभिन्न केंद्रीय कृषि मंत्रियों के हाथों प्राप्त हो चुका है. जैविक खेती, औषधीय एवं सुगंधित पौधों, मसाला उत्पादन, उच्च उत्पादक काली मिर्च, प्राकृतिक ग्रीनहाउस, जल संरक्षण, जैविक कृषि तकनीक और कृषि प्रसंस्करण के क्षेत्र में उनके प्रयोगों ने बस्तर के किसानों के लिए नए अवसर पैदा किए हैं.
‘जिला संवाद 2026’ में डॉ. राजाराम त्रिपाठी को भी बस्तर के विकास की दिशा-दशा, संभावनाओं, कृषि और शासन की योजनाओं पर डॉ. हिमांशु द्विवेदी के साथ विशेष संवाद में शामिल होना था, लेकिन परिवार में अचानक उत्पन्न हुई अपरिहार्य मेडिकल इमरजेंसी के कारण वे कार्यक्रम में उपस्थित नहीं हो सके.
कार्यक्रम के माध्यम से डॉ. त्रिपाठी ने हरिभूमि, INH तथा सभी समाचार माध्यमों के प्रति आभार व्यक्त किया. उन्होंने विशेष रूप से कहा कि हरिभूमि वह समाचार पत्र है जिसने उनकी काली मिर्च की खेती के संघर्ष और सफलता की कहानी को उस समय सबसे पहले अपने पन्नों पर स्थान दिया, जब कई कृषि विशेषज्ञ और वैज्ञानिक यह मानने को तैयार नहीं थे कि बस्तर में काली मिर्च की खेती व्यावसायिक रूप से संभव है. उस दौर में हरिभूमि द्वारा उनके प्रयोग को प्रोत्साहन दिए जाने को वे आज भी कृतज्ञता के साथ याद करते हैं.
मां दंतेश्वरी हर्बल समूह का यह सम्मान बस्तर में जैविक खेती, कृषि नवाचार, पर्यावरण संरक्षण, आदिवासी किसान सशक्तिकरण और स्थानीय संसाधनों पर आधारित टिकाऊ कृषि मॉडल की बढ़ती स्वीकार्यता का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है. इस पहल ने कोंडागांव और बस्तर को केवल अपनी समृद्ध वन एवं आदिवासी संस्कृति के लिए ही नहीं, बल्कि आधुनिक और नवाचारी कृषि के एक उभरते केंद्र के रूप में भी राष्ट्रीय पहचान दिलाई है.
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