1. Home
  2. ख़बरें

BRICS में किसानों के लिए बड़े फैसले! 23,890 करोड़ की बचत से लेकर Grain Exchange तक, जानें क्या बदलेगा

BRICS देशों ने कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए ग्रेन एक्सचेंज, BRICS AGRIN, किसानों के बीज अधिकारों पर ग्लोबल फोरम, एग्रोइकोलॉजी और डिजिटल एग्रीकल्चर नेटवर्क जैसी पहल शुरू की हैं. रूस के प्रस्तावित ग्रेन एक्सचेंज से कृषि व्यापार बढ़ाने, खाद्य सुरक्षा मजबूत करने और किसानों के लिए बेहतर बाजार अवसर उपलब्ध कराने की उम्मीद है.

KJ Staff
brics
BRICS में किसानों के लिए बड़े फैसले क्या लिए गए जानें (Image Source-AI generate)

BRICS देशों ने कृषि क्षेत्र को लेकर कई अहम पहल की हैं, जिनका सीधा असर आने वाले समय में किसानों, कृषि व्यापार, खाद्य सुरक्षा और खेती से जुड़े इनपुट की उपलब्धता पर पड़ सकता है. नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में रूस की ओर से प्रस्तावित BRICS Grain Exchange को लेकर आगे बढ़ने पर सहमति जताई गई है. इस प्रस्ताव को न्यू दिल्ली डिक्लेरेशन में भी जगह मिली है.

रूस की योजना के मुताबिक, BRICS Grain Exchange को 2026 में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया जा सकता है और 2027 तक इसे पूरी तरह ऑपरेशनल करने का लक्ष्य है. इसका उद्देश्य BRICS देशों के बीच अनाज के व्यापार को बढ़ावा देना और मौजूदा वैश्विक कमोडिटी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर निर्भरता कम करना है.

हर साल 23,890 करोड़ रुपये की बचत का दावा

BRICS Grain Exchange को लेकर रूस की ओर से सबसे महत्वपूर्ण दावा संभावित आर्थिक बचत को लेकर किया गया है. रूस के मुताबिक, साझा ग्रेन एक्सचेंज के शुरू होने से BRICS सदस्य देश हर साल करीब 2.5 अरब डॉलर यानी लगभग 23,890 करोड़ रुपये की बचत कर सकते हैं.

यह प्रस्ताव मौजूदा अंतरराष्ट्रीय फ्यूचर्स और कमोडिटी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है. रूस का तर्क है कि BRICS देशों के लिए अपना साझा प्लेटफॉर्म होने से अनाज की कीमतों और ट्रेडिंग व्यवस्था में अधिक पारदर्शिता तथा विकल्प मिल सकता है.

शुरुआत में इस एक्सचेंज का फोकस गेहूं, चावल और अन्य प्रमुख अनाजों पर हो सकता है. हालांकि, आगे चलकर इसे दूसरे कृषि उत्पादों और कमोडिटीज तक भी विस्तारित किया जा सकता है. इससे BRICS देशों के बीच कृषि व्यापार को एक नया प्लेटफॉर्म मिल सकता है.

खाद्य सुरक्षा पर भी BRICS का फोकस

BRICS घोषणापत्र में खाद्य सुरक्षा को महत्वपूर्ण मुद्दा माना गया है. दुनिया के कई हिस्सों में मौसम की अनिश्चितता, सूखा, बाढ़, युद्ध और सप्लाई चेन में व्यवधान के कारण खाद्य कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है. इसका असर किसानों के साथ-साथ उपभोक्ताओं पर भी पड़ता है.

इसी चुनौती को देखते हुए BRICS देशों ने खाद्य कीमतों में अचानक होने वाली वृद्धि, सप्लाई संकट और कृषि इनपुट की उपलब्धता जैसे मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया है. राष्ट्रीय स्तर पर फूड रिजर्व को मजबूत करने के साथ सूखा सहने वाली फसलों और बदलते मौसम के अनुकूल बीजों को बढ़ावा देने की जरूरत पर भी ध्यान दिया गया है.

फर्टिलाइजर सप्लाई पर अभी पूरी सहमति नहीं

कृषि उत्पादन के लिए खाद और उर्वरकों की उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण है. BRICS बैठक में फर्टिलाइजर सप्लाई का मुद्दा भी चर्चा में रहा, लेकिन भविष्य में संभावित फर्टिलाइजर एक्सपोर्ट प्रतिबंधों से जुड़े मुद्दे पर कोई ठोस व्यवस्था नहीं बन सकी. ऐसे में घोषणापत्र में कृषि इनपुट और खाद्य सुरक्षा से जुड़े राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर आगे भी चर्चा जारी रखने की बात कही गई है. यदि सदस्य देश भविष्य में इस दिशा में मजबूत सहयोग विकसित करते हैं, तो इससे किसानों को आवश्यक कृषि इनपुट की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है.

BRICS देशों के बीच बढ़ेगा कृषि व्यापार

BRICS ने कृषि उत्पादों और कृषि इनपुट के बीच आपसी व्यापार को आसान बनाने पर भी जोर दिया है. इसके लिए गैर-भेदभावपूर्ण और मजबूत सप्लाई चेन विकसित करने की आवश्यकता बताई गई है. इसका फायदा यह हो सकता है कि यदि किसी एक देश में किसी कृषि उत्पाद या इनपुट की कमी होती है, तो दूसरे सदस्य देशों से उसकी आपूर्ति की जा सके. इससे कृषि बाजारों को अधिक विकल्प मिलेंगे और सप्लाई में अचानक आने वाले व्यवधानों का असर कम करने में मदद मिल सकती है.

4 नई कृषि पहलों से किसानों को क्या फायदा होगा?

1. BRICS AGRIN नेटवर्क

BRICS AGRIN यानी Agro-Inputs, Genetic Resources, and Information Network कृषि क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने वाली महत्वपूर्ण पहल है. यह एक सहयोगात्मक, गैर-बाध्यकारी और किसान-केंद्रित नेटवर्क होगा.

इसका उद्देश्य कृषि इनपुट, आनुवंशिक संसाधनों और कृषि संबंधी सूचनाओं को लेकर BRICS देशों के बीच सहयोग बढ़ाना है. इससे कृषि तकनीक, संसाधनों और जानकारी के आदान-प्रदान को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है.

2. किसानों के अधिकार पर ग्लोबल फोरम

BRICS देशों ने Farmers’ Rights in Seed Systems को लेकर ग्लोबल फोरम शुरू करने का स्वागत किया है. इसका उद्देश्य बीज प्रणाली में किसानों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करना और बेहतर नीतियों को बढ़ावा देना है.

यह पहल पारंपरिक बीजों, स्थानीय कृषि ज्ञान और किसानों की भूमिका को संरक्षित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण हो सकती है. खासकर छोटे किसानों के लिए बीजों और पारंपरिक ज्ञान से जुड़े अधिकारों का संरक्षण महत्वपूर्ण है.

3. एग्रोइकोलॉजी और रीजेनेरेटिव एग्रीकल्चर नेटवर्क

BRICS ने Network of Centres of Excellence on Agroecology and Regenerative Agriculture बनाने की दिशा में भी कदम बढ़ाया है. इसका उद्देश्य जलवायु परिवर्तन के बीच कृषि को अधिक टिकाऊ और लचीला बनाना है.

एग्रोइकोलॉजी और रीजेनेरेटिव एग्रीकल्चर के जरिए मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने, पानी के बेहतर इस्तेमाल और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर जोर दिया जाता है. इससे लंबे समय में कृषि उत्पादकता और खेती की टिकाऊ क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है.

4. डिजिटल एग्रीकल्चर नेटवर्क

BRICS देशों ने डिजिटल कृषि के लिए नेटवर्क विकसित करने पर भी सहमति जताई है. इसमें कृषि के साथ एग्रोफॉरेस्ट्री, फिशरीज और एक्वाकल्चर जैसे क्षेत्र भी शामिल होंगे.

डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल से किसानों को मौसम, बाजार, उत्पादन और सप्लाई चेन से जुड़ी जानकारी अधिक प्रभावी तरीके से उपलब्ध कराई जा सकती है. डेटा आधारित कृषि व्यवस्था से किसानों को बेहतर निर्णय लेने में मदद मिलने की उम्मीद है.

WTO में कृषि व्यापार पर भी जोर

BRICS देशों ने विश्व व्यापार संगठन यानी WTO में कृषि से जुड़े लंबित मुद्दों पर बातचीत आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी दोहराई है. सदस्य देशों ने ऐसे कृषि व्यापार सिस्टम की जरूरत बताई है, जो निष्पक्ष, संतुलित और विकासोन्मुख हो.

बदलती कृषि नीतियों और नियामकीय बदलावों का असर कृषि उत्पादन, व्यापार, खाद्य सुरक्षा और छोटे एवं पारिवारिक किसानों की आजीविका पर पड़ता है. ऐसे में BRICS के स्तर पर साझा रणनीति बनाने की कोशिश महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है BRICS का यह एजेंडा?

कुल मिलाकर, BRICS Grain Exchange को केवल अनाज की खरीद-बिक्री के प्लेटफॉर्म के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. इसके साथ खाद्य सुरक्षा, फर्टिलाइजर सप्लाई, बीज अधिकार, डिजिटल कृषि, टिकाऊ खेती और कृषि व्यापार जैसे कई मुद्दे जुड़े हुए हैं.

यदि रूस की योजना के अनुसार 2026 में ग्रेन एक्सचेंज का पायलट प्रोजेक्ट शुरू होता है और 2027 में यह पूरी तरह ऑपरेशनल होता है, तो BRICS देशों के बीच कृषि व्यापार के लिए एक नया अंतरराष्ट्रीय मंच तैयार हो सकता है. इससे सदस्य देशों के किसानों और कृषि बाजारों को नए अवसर मिल सकते हैं. हालांकि, इन पहलों का वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि सदस्य देश इन्हें जमीन पर किस तरह लागू करते हैं और किसानों तक इनका फायदा कितनी प्रभावी तरीके से पहुंचता है.

English Summary: BRICS 2026 grain exchange agriculture initiatives farmers food security trade Published on: 14 September 2026, 05:45 PM IST

Like this article?

Hey! I am KJ Staff. Did you liked this article and have suggestions to improve this article? Mail me your suggestions and feedback.

Share your comments

हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें. कृषि से संबंधित देशभर की सभी लेटेस्ट ख़बरें मेल पर पढ़ने के लिए हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें.

Subscribe Newsletters

Latest feeds

More News