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किसानों की आय बढ़ाने में कार्बन क्रेडिट बन सकता है नया आधार, किसान चैंबर ऑफ कॉमर्स ने तैयार की रणनीति

हरियाणा के अर्श गुरुकुल विद्यापीठ में किसान चैंबर ऑफ कॉमर्स की अहम बैठक आयोजित हुई, जिसमें कार्बन क्रेडिट बाजार पर चर्चा हुई। अध्यक्षता न्यायमूर्ति प्रीतम पाल ने की। विशेषज्ञों ने कहा कि टिकाऊ कृषि अपनाकर किसान पर्यावरण संरक्षण के साथ कार्बन क्रेडिट से अतिरिक्त आय का मजबूत विकल्प हासिल कर सकते हैं। पूरी खबर पर नजर डालें।

chamber meeting
हरियाणा के अर्श गुरुकुल विद्यापीठ में किसान चैंबर ऑफ कॉमर्स की अहम बैठक की झलक

हरियाणा के अर्श गुरुकुल विद्यापीठ में रविवार को किसान चैंबर ऑफ कॉमर्स की कार्यकारिणी एवं विशेष आमंत्रित सदस्यों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। बैठक का विषय था “किसानों के लिए कार्बन क्रेडिट बाजार : वर्तमान स्थिति, चुनौतियाँ और आगे की राह”। इस विशेष बैठक में देशभर के कृषि, पर्यावरण और नीति क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने भाग लिया।

बैठक की अध्यक्षता न्यायमूर्ति प्रीतम पाल ने की। इस अवसर पर किसान चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष जितेंद्र मोर ने विस्तार से बताया कि बदलते जलवायु परिदृश्य में कार्बन क्रेडिट बाजार भारतीय किसानों के लिए आय का एक नया और मजबूत विकल्प बनकर उभर सकता है। उन्होंने कहा कि यदि किसान जलवायु-स्मार्ट एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाते हैं, तो वे खेती के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में योगदान देते हुए कार्बन क्रेडिट के माध्यम से अतिरिक्त आमदनी भी प्राप्त कर सकते हैं।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत जैसे कृषि प्रधान देश में कार्बन बाजार की अपार संभावनाएँ हैं, लेकिन किसानों तक इसकी वास्तविक पहुंच बनाने के लिए जागरूकता, संस्थागत सहयोग, सरल प्रमाणन प्रणाली और स्पष्ट नीतिगत ढांचे की आवश्यकता होगी। उन्होंने किसानों की भागीदारी बढ़ाने के लिए एक ठोस रोडमैप तैयार करने पर बल दिया।

बैठक में डॉ. गुरबचन सिंह, डॉ. समर सिंह, डॉ. जे.सी. डागर, एस.एस. संधू, प्रो. पी.एस. पंवार, कर्नल एम.एस. दहिया, राजकुमार सांगवान, डॉ. अतुल जैन, डॉ. नवीन हुड्डा, वीरेंद्र चौहान तथा अधिवक्ता मयंक चौहान सहित कई विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे। विशेषज्ञों ने कहा कि विश्वभर में सरकारें और कॉर्पोरेट संस्थान नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्यों की दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं, जिसके कारण वैश्विक कार्बन बाजार का विस्तार हो रहा है। ऐसे समय में भारतीय किसानों को इससे जोड़ना समय की बड़ी आवश्यकता है।

अध्यक्षीय संबोधन में यह भी कहा गया कि कार्बन क्रेडिट केवल पर्यावरणीय पहल नहीं, बल्कि किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा अवसर है। इससे प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण होगा, टिकाऊ खेती को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल सकती है।

बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर यह निर्णय लिया गया कि किसान चैंबर ऑफ कॉमर्स किसानों को कार्बन क्रेडिट प्रणाली से जोड़ने, टिकाऊ कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने तथा किसानों के लिए आय के नए अवसर विकसित करने हेतु एक स्पष्ट एवं व्यावहारिक कार्ययोजना तैयार करेगा।

बैठक के निष्कर्ष में यह बात प्रमुख रूप से सामने आई कि कार्बन क्रेडिट बाजार किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। हालांकि इसकी सफलता मजबूत संस्थागत समर्थन, पारदर्शी नीतियों, कम लागत वाली प्रमाणन व्यवस्था तथा बड़े स्तर पर किसान जागरूकता पर निर्भर करेगी।

कार्यक्रम के अंत में किसान चैंबर ऑफ कॉमर्स के महासचिव सुरेश देसवाल ने सभी विशेषज्ञों, अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।

English Summary: Farmers Income Growth Chamber Meeting on Carbon Credit Market Commerce-strategy Published on: 18 May 2026, 05:28 PM IST

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