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बिहार लीची संगम-2026 : बाग से निर्यात तक मजबूत होगी लीची की वैल्यू चेन

देश में बिहार लीची का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है और उत्पादित कुल लीची का लगभग 40 प्रतिशत उत्पादन इस राज्य में होता है। इसी क्रम में आज कृषि विभाग अंतर्गत उद्यान निदेशालय द्वारा सोमवार को राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र, मुजफ्फरपुर परिसर में “बिहार लीची संगम-2026 : बाग से निर्यात तक” कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा, जिससे बाग से निर्यात तक मजबूत होगी लीची की वैल्यू।

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बिहार लीची संगम-2026
  • “लीची संगम-2026 : किसानों की आय बढ़ाने और निर्यात को नई उड़ान देने की तैयारी

  • “लीची राजधानी मुजफ्फरपुर में ‘बाग से निर्यात तक’ का महामंच

बिहार सरकार के कृषि विभाग अंतर्गत उद्यान निदेशालय द्वारा सोमवार को राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र, मुजफ्फरपुर परिसर में “बिहार लीची संगम-2026 : बाग से निर्यात तक” कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम का उद्घाटन बिहार सरकार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा द्वारा किया जाएगा। उद्यान निदेशालय के अनुसार यह आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बिहार के किसानों की समृद्धि, आधुनिक तकनीक और वैश्विक बाजार से जुड़ाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। कार्यक्रम का उद्देश्य लीची उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन एवं निर्यात को एक मजबूत मंच प्रदान करना है।

देश का सबसे बड़ा लीची उत्पादक राज्य है बिहार

बिहार वर्तमान में देश का सबसे बड़ा लीची उत्पादक राज्य है। देश में उत्पादित कुल लीची का लगभग 40 प्रतिशत उत्पादन बिहार में होता है। राज्य में प्रतिवर्ष करीब 2।5 से 3 लाख मीट्रिक टन लीची का उत्पादन होता है। लगभग 30 से 35 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में लीची की खेती की जाती है, जिससे लाखों परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है।

मुजफ्फरपुर, वैशाली और समस्तीपुर जैसे जिले लीची उत्पादन के प्रमुख केंद्र हैं। विशेषकर मुजफ्फरपुर की “शाही लीची” अपनी विशिष्ट सुगंध, स्वाद और गुणवत्ता के कारण देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी पहचान बना चुकी है।

कम समय की फसल, बड़ी चुनौती

दस्तावेज के अनुसार लीची का बाजार समय केवल 15 से 20 दिनों का होता है। ऐसे में मौसम की अनिश्चितता, परिवहन और बाजार प्रबंधन की कमी के कारण किसानों को कई बार भारी नुकसान उठाना पड़ता है।

इन्हीं चुनौतियों के समाधान के लिए “लीची संगम” का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें किसान, वैज्ञानिक, निर्यातक, संस्थागत खरीदार एवं नीति-निर्माता एक मंच पर आएंगे, ताकि “बाग से बाजार और निर्यात तक” एक सशक्त वैल्यू चेन विकसित की जा सके।

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नई तकनीक और निर्यात पर फोकस

कार्यक्रम में राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र द्वारा विकसित नई तकनीकों का प्रदर्शन किया जाएगा। वहीं भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC), मुंबई के वैज्ञानिकों द्वारा लीची की शेल्फ लाइफ बढ़ाने की तकनीक का भी लाइव प्रदर्शन किया जाएगा।

इसके अलावा जूस, पल्प और स्क्वैश जैसे मूल्य संवर्धित उत्पादों को बढ़ावा देने पर भी विशेष जोर रहेगा, ताकि किसानों की आय में वृद्धि हो सके।

वैश्विक बाजार तक पहुंच बढ़ाने की तैयारी

बिहार सरकार ने यूरोप, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक बिहार की लीची पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए APEDA सहित विभिन्न संस्थाओं के साथ समन्वय स्थापित कर कार्य किया जा रहा है। सरकार बेहतर परिवहन व्यवस्था, एयर कार्गो सुविधा और तेज डिलीवरी सिस्टम विकसित करने पर भी काम कर रही है, ताकि छोटे किसान भी अपने उत्पाद को देश-विदेश के बाजार तक पहुंचा सकें।

“बिहार लीची संगम-2026” आने वाले समय में किसानों की आय बढ़ाने, निर्यात को मजबूती देने तथा बिहार को वैश्विक लीची केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

English Summary: Bihar Litchi Sangam 2026 Litchi Export Value Chain Published on: 25 May 2026, 03:56 PM IST

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Hey! I am रौशन कुमार, एफटीजे, बिहार प्रेसिडेंट. Did you liked this article and have suggestions to improve this article? Mail me your suggestions and feedback.

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