लेपित उर्वरक संतुलित पोषक तत्व उपयोग को कैसे बढ़ावा देते हैं
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फसल की आवश्यकता के अनुरूप पोषक तत्वों की उपलब्धता सुनिश्चित करना
लेपित उर्वरक समय के साथ धीरे-धीरे पोषक तत्वों का उत्सर्जन करते हैं, जिससे पोषक तत्व उस समय उपलब्ध होते हैं जब फसल को उनकी सबसे अधिक आवश्यकता होती है. इससे विभिन्न वृद्धि अवस्थाओं में पोषक तत्वों की आपूर्ति फसल की मांग के अनुरूप बनी रहती है तथा पोषक तत्वों की कमी या अधिकता की स्थिति से बचाव होता है. -
पोषक तत्वों की हानि को कम करना
परंपरागत उर्वरकों से प्राप्त पोषक तत्वों का एक बड़ा भाग लीचिंग, अपवाह (रनऑफ) अथवा वाष्पीकरण (वोलैटिलाइजेशन) के माध्यम से नष्ट हो सकता है. नियंत्रित पोषक तत्व उत्सर्जन पोषक तत्वों को अधिक समय तक जड़ क्षेत्र में बनाए रखता है, जिससे वे प्रणाली से नष्ट होने के बजाय पौधों द्वारा अवशोषित किए जा सकते हैं. -
नाइट्रोजन प्रबंधन में सुधार
नाइट्रोजन कृषि में सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले तथा अक्सर अधिक मात्रा में प्रयुक्त पोषक तत्वों में से एक है. लेपित उर्वरक, विशेषकर नीम-लेपित एवं नियंत्रित उत्सर्जन वाले नाइट्रोजन उर्वरक, नाइट्रोजन की उपलब्धता को विनियमित करने और इसके अत्यधिक प्रयोग को कम करने में सहायता करते हैं, जिससे N:P:K अनुपात अधिक संतुलित बना रहता है. -
पोषक तत्वों की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करना
प्रयोग के तुरंत बाद पोषक तत्वों की अचानक अधिक उपलब्धता होने के बजाय, लेपित उर्वरक पूरी फसल अवधि के दौरान पोषक तत्वों की निरंतर आपूर्ति प्रदान करते हैं. इससे पौधों का पोषण संतुलित बना रहता है तथा महत्वपूर्ण वृद्धि अवस्थाओं में पोषक तत्वों के तनाव को कम करने में सहायता मिलती है. -
स्थान-विशिष्ट एवं एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन को बढ़ावा देना
लेपित उर्वरक मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक अनुशंसाओं, जैविक खादों, जैव उर्वरकों तथा सूक्ष्म पोषक तत्वों के उपयोग के पूरक के रूप में कार्य करते हैं. उनकी नियंत्रित उत्सर्जन प्रकृति विभिन्न पोषक स्रोतों के प्रभावी एकीकरण में सहायता करती है, जिसके परिणामस्वरूप अधिक संतुलित एवं दक्ष पोषक तत्व प्रबंधन रणनीति विकसित होती है.
लेपित उर्वरकों के सामान्य प्रकार
लेपित एवं गैर-लेपित उर्वरकों की तुलना
लेपित उर्वरकों के प्रभावी उपयोग हेतु सर्वोत्तम प्रबंधन उपाय
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जहाँ भी उपलब्ध हो, सामान्य यूरिया के स्थान पर नीम-लेपित यूरिया का उपयोग करें.
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उर्वरकों का प्रयोग मृदा स्वास्थ्य कार्ड अथवा मृदा परीक्षण की अनुशंसाओं के आधार पर करें.
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केवल उर्वरक के लेपित होने के कारण उसकी मात्रा न बढ़ाएँ; फसल के लिए अनुशंसित पोषक तत्व मात्रा का ही पालन करें.
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संतुलित पोषण सुनिश्चित करने के लिए लेपित उर्वरकों को गोबर खाद (FYM), कम्पोस्ट, हरी खाद, फसल अवशेषों तथा जैव उर्वरकों के साथ एकीकृत रूप से प्रयोग करें.
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जहाँ अनुशंसित हो, नाइट्रोजन उर्वरकों का प्रयोग विभाजित खुराकों (Split Doses) में करें.
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पोषक तत्वों की हानि तथा अनावश्यक लागत से बचने के लिए उर्वरकों का अत्यधिक प्रयोग न करें.
भारत में सामान्यतः उपयोग किए जाने वाले लेपित उर्वरक
मुख्य संदेश
लेपित उर्वरक संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन प्राप्त करने के लिए एक प्रभावी एवं उन्नत साधन हैं. पोषक तत्वों को क्रमिक एवं नियंत्रित रूप से उपलब्ध कराकर तथा उनकी हानि को कम करके ये सुनिश्चित करते हैं कि फसलों को आवश्यकता के समय पर्याप्त पोषक तत्व प्राप्त हों. इससे उर्वरक उपयोग दक्षता में वृद्धि होती है, पर्यावरणीय प्रभाव कम होते हैं तथा कृषि की लाभप्रदता में सुधार होता है. जब लेपित उर्वरकों का उपयोग मृदा परीक्षण आधारित अनुशंसाओं, जैविक पोषक स्रोतों तथा अच्छी कृषि प्रबंधन पद्धतियों के साथ किया जाता है, तब वे टिकाऊ, संतुलित एवं उत्पादक कृषि को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं.
लेखकगण : संतोष एस. माली, रेशमा शिंदे एवं अनुप दास
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना
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