आज के समय में किसान और युवाओं को ऐसे बिजनेस की तलाश रहते हैं, जो कम लागत में शुरु किया जा सकें. अगर आप भी अपना करोबार शुरु करने की सोच रहे हैं, तो कस्टम हायर सेंटर आपके लिए एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता है, क्योंकि देश में किसानों को 12 महीने कृषि उपकरण की आवश्यकता होती है और कई किसानों की आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं होती है कि वह कृषि यंत्रों की खरीद कर सकें. ऐसे में कस्टम हायर सेंटर एक बेहतरीन करोबार साबित हो सकता है.
क्या है कस्टम हायरिंग सेंटर ?
कस्टम हायरिंग सेंटर मूल रूप से कृषि उपकरणों और मशीनों का एक 'बैंक' या साझा सेवा केंद्र होता है. इस केंद्र को कोई भी ग्रामीण उद्यमी, किसान, प्रगतिशील युवा, स्वयं सहायता समूह (SHG) या किसान उत्पादक संगठन (FPO) स्थापित कर सकता है. इस सेंटर का मुख्य काम अपने क्षेत्र के छोटे किसानों को उनकी जरूरत के अनुसार विभिन्न फसल चक्रों (बुवाई से लेकर कटाई और पराली प्रबंधन) के लिए उचित किराए पर आधुनिक मशीनें उपलब्ध कराना है.
कस्टम हायरिंग सेंटर खोलने की लागत
कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC) खोलने की कुल लागत ₹5 लाख से ₹50 लाख तक होती है, जो मशीनों के चयन पर निर्भर करती है. सामान्य तौर पर इसे तीन श्रेणियों में बांटा गया है:
-
छोटा स्तर (₹5 - ₹10 लाख): ट्रैक्टर, रोटावेटर और कल्टीवेटर जैसे बुनियादी उपकरणों के लिए.
-
मध्यम स्तर (₹10 - ₹25 लाख): कंबाइन हार्वेस्टर और लेजर लैंड लेवलर जैसी आधुनिक मशीनों के लिए.
-
बड़ा स्तर (₹25 - ₹50 लाख): हाई-टेक कमर्शियल हब के लिए.
इसी प्रकार मशीनों के हिसाब से ही इस बिजनेस की शुरुआत की लागत तय होती है.
कस्टम हायरिंग सेंटर में किन मशीनों की मांग अधिक होती है?
अगर आप कस्टम हायरिंग सेंटर खोलने की सोच रहे हैं, तो आपको सबसे पहले इस बात की जानकारी होना बेहद ही जरुरी है कि इन सेंटर में किन मशीनों की अधिक मांग होती है, तो आपको बता दें कि कस्टम हायर केंद्र में ट्रैक्टर ट्राली, हार्वेस्टर, कल्टीवेटर, स्ट्रॉ रीपर, पंजा, बुवाई की मशीन, थ्रेसर, स्प्रे पंप, ड्रोन स्प्रे, कटर, जैसे यंत्र की मांग अधिक होती है. ऐसे में इन कृषि उपकरणों से अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है.
कितनी होगी कमाई?
ग्रामीण इलाकों में कृषि उपकरणों का किराया प्रति घंटा या प्रति एकड़ के हिसाब से तय होता है. इस प्रकार-
-
रोटावेटर (खेत की जुताई): ₹1,200 से ₹1,500 प्रति घंटा (डीजल और ड्राइवर के साथ).
-
थ्रेशर (गेहूं/धान की मड़ाई): ₹1,500 से ₹2,000 प्रति घंटा या कुल पैदावार का एक निश्चित हिस्सा.
इसके अलावा, ऐसे में किसान ट्रैक्टर को साल में 150 से 200 दिन भी चलता है, तो सभी खर्चे डीजल, ड्राइवर, मेंटेनेंस निकालकर आप आराम से ₹2.5 लाख से ₹3.5 लाख सालाना का शुद्ध मुनाफा कमा सकते हैं. इसका मतलब है कि अगले 2 साल के भीतर ही आपका पूरा निवेश वसूल हो जाएगा.
आवेदन के लिए जरुरी दस्तावेज
अगर आप कस्टम हायरिंग सेंटर खोलने की सोच रहे हैं, तो आवेदन करने के लिए जल्द ही इन सभी दस्तावेजों को तैयार कर लें, जिनमें शामिल है- आधार कार्ड और मोबाइल नंबर जो बैंक खाते से लिंक हो, ज़मीन के दस्तावेज खसरा-खतौनी या लीज एग्रीमेंट, बैंक पासबुक की प्रति, पंजीकृत डीलर से मशीनों का आधिकारिक कोटेशन, श्रेणी प्रमाण पत्र होना भी बेहद जरुरी है.
कस्टम हायरिंग सेंटर खोलने के लिए कहां आवेदन करें?
अगर आपने कस्टम हायरिंग सेंटर खोलने की सोच ली है, तो यह करोबार आपके लिए मुनाफे का सौदा साबित हो सकता है. अब आपके मन में यह सवाल होगा की कैसे इस बिजनेस की शुरुआत की जाए और कहां आवेदन करें, तो आपको बता दे कि आप इस करोबार की शुरुआत करने के लिए केंद्र सरकार के AgriMachinery पोर्टल या अपने राज्य के कृषि विभाग के आधिकारिक पोर्टल जैसे राजस्थान के लिए RajKisan या मध्य प्रदेश के लिए CHC MPdage पोर्टल पर जाकर आसानी से आवेदन कर सकते हैं और सरकारी मदद भी प्राप्त कर सकते हैं.
लेखक: रवीना सिंह
Share your comments